
अध्याय ६
छह दिन का सेनापति
छह दिन की उम्र में उसे देवताओं की सेना का सेनापति बना दिया गया
जल्दी बड़ा
बच्चा असाधारण गति से बढ़ा।
कुछ ही दिनों में देवताओं ने उसे देवसेनापति बना दिया — देवताओं की सेना का सेनापति।
इंद्र ने कमान सौंप दी। (कुछ पाठों में पहले इंद्र ने बच्चे पर वज्र चलाया, हारा, फिर झुका।)
देवसेना नाम की एक लड़की
"देवसेना" सिर्फ़ सेना नहीं — स्कंद की पत्नी का नाम भी है।
महाभारत में वह प्रजापति की पुत्री और इंद्र की संबंधी है; तमिल कंद पुराणम् परंपरा में उसे देइवानै कहते हैं और वह इंद्र की बेटी है। दोनों में इंद्र ही विवाह कराता है।
तो "देवताओं की सेना का नेतृत्व" और "देवराज की बेटी से विवाह" एक ही राजनीतिक क़दम थे। तमिल परंपरा यह विवाह थिरुपरंकुंड्रम में रखती है — छह धामों में से एक।
वेल
उत्तर के पाठों में स्कंद एक शक्ति रखता है — एक भाला, कभी अग्नि का दिया, कभी इंद्र का।
तमिल परंपरा में वेल पार्वती — शक्ति — ख़ुद देती है। यह ज्ञान-वेल है, ज्ञान का भाला। और यही मुरुगन का सबसे बड़ा चिह्न है — वेल की अपने आप में पूजा होती है।
टिप्पणी: स्कंद का देवसेनापति बनना उत्तरी कथा की धुरी है — छह दिन की उम्र में देवताओं की सेना की कमान। "देवसेना" स्कंद की पत्नी का नाम भी है: महाभारत में वह प्रजापति की पुत्री और इंद्र की संबंधी है, और इंद्र विवाह कराते हैं; तमिल कंद पुराणम् परंपरा में देइवानै इंद्र की पुत्री है और विवाह थिरुपरंकुंड्रम में रखा जाता है। वेल: उत्तरी ग्रंथों में यह अग्नि या इंद्र की दी शक्ति है; तमिल परंपरा में यह पार्वती/शक्ति का दिया ज्ञान-वेल है और स्वतंत्र रूप से पूजा जाता है। पार्वती द्वारा दिया गया वेल आज की तमिल मुरुगन-पूजा में विशेष रूप से प्रमुख है।
स्रोत: कई ग्रंथों और परंपराओं से, छह दिन का सेनापति