महाकाव्य पढ़िए अपना ज्ञान परखिए
हर महाकाव्य कुछ पड़ावों में बँटा है। हर पड़ाव पर पहले कहानी, फिर सवाल — और हर सही जवाब के पीछे एक और कथा।
- रामायण — एक राजकुमार जिसे चौदह बरस का वनवास मिला, और एक युद्ध जो एक अपहरण से शुरू हुआ।
- महाभारत — एक ही घर के दो पक्ष, अठारह दिन का युद्ध, और कोई भी पूरी तरह निर्दोष नहीं।
- कृष्ण-लीला — माखन चुराने वाला बच्चा, बाँसुरी वाला प्रेमी, और वह सारथी जिसने गीता कही।
- हनुमान-गाथा — वह जो अपनी ही शक्ति भूल गया था, और जिसे हर बार याद दिलाना पड़ा।
- विष्णु-पुराण — मछली से लेकर कल्कि तक — दस अवतार, और वे कथाएँ जो उनके बीच पड़ी हैं।
- शिव-महिमा — जो माँगनेवाले को तौलता नहीं, और व्यवस्था के बाहर खड़ा है।
- देवी-चरित — देवता उसे अपनी हार से बनाते हैं — और फिर वह लौटती नहीं।
- भगवद गीता — एक रुके हुए रथ पर कही गई बात, जिसे अठारह सदियों ने अठारह तरह से पढ़ा।
- गणेश-वृत्तांत — जिस देवता को सबसे पहले पूजते हैं — और जिसकी हर कहानी दो-दो बार कही गई है।
- भागवत भक्त — दस लोग, दस शुरुआतें — और हर एक भगवान तक सिर्फ़ चाहने से पहुँचा।
- कार्तिकेय-वृत्तांत — उत्तर में जिसे लगभग भुला दिया गया — दक्षिण में शायद सबसे प्रिय देवता।
- गरुड़-पुराण — मृत्यु के बाद क्या होता है — इसका सबसे विस्तृत नक्शा, और उससे परे की ओर एक इशारा।
- हरिश्चंद्र — एक राजा, जिसने वचन के लिए सब कुछ दे दिया — और वह कथा जो दो बार, दो तरह से कही गई।
- नल-दमयंती — एक राजा जिसने अपने ही जुए में सब कुछ हारा, और एक रानी जिसकी बुद्धि ने उसे फिर से पा लिया।
- सावित्री-सत्यवान — एक राजकुमारी जिसने अपने तर्क से स्वयं यम को उलझा दिया, और अपने पति को मृत्यु से वापस ले आई।
- सिलप्पदिकारम् — एक पायल, एक झूठा आरोप, और एक स्त्री जिसने अपने ही शरीर से एक नगर को भस्म कर दिया।
- मणिमेखलै — एक कटोरा जो कभी ख़ाली नहीं होता — और एक गणिका की बेटी जिसने भूख को सबसे बड़ा रोग माना।
- कथासरित्सागर — एक कथा जो शिव ने पार्वती को सुनाई, शाप से होकर धरती पर उतरी — और फिर सैकड़ों कथाओं का सागर बन गई।
- विक्रम और बेताल — एक राजा, एक शव, एक बेताल — और हर कहानी के अंत में ऐसा सवाल जिसका जवाब देते ही वह फिर पेड़ पर लौट जाता है।
- रघुवंश — सूर्य से निकला एक वंश — दिलीप, रघु, अज, दशरथ, राम — जिसे एक कवि ने इतने प्रेम से गाया कि जब वह ख़त्म होता है, तब भी पाठक को नहीं लगता कि कथा पूरी हुई।
- मत्स्य पुराण — एक छोटी मछली से शुरू हुआ पुराण — जिसमें प्रलय की नाव है, ययाति का बुढ़ापा है, एक यक्ष का तप है, और तीन नगरों की राख।