अध्याय ५

छह कृत्तिकाएँ

छह चिंगारियाँ, छह कृत्तिकाएँ — आकाश के छह तारे — और उनसे बना एक छह मुँह वाला बच्चा

छह में बँटा

सरकंडों के वन में रखा बीज छह हिस्सों में बँट गया — छह चिंगारियाँ, छह शिशु।

उन्हें छह कृत्तिकाओं ने पाया और दूध पिलाया।

कृत्तिकाएँ आकाश में एक तारा-समूह हैं — जिसे आज प्लीयडीज़ कहते हैं, और भारतीय परंपरा में कृत्तिका नक्षत्र। सबसे पुरानी वैदिक तारा-सूचियों में वर्ष कृत्तिका से शुरू होता था।

एक में मिला

पार्वती ने छहों शिशुओं को एक साथ गोद में लिया — और वे एक ही बच्चे में मिल गए, छह सिर और बारह भुजाओं वाले।

(दूसरे पाठों में वह एक ही बच्चा है जो छह सिर उगा लेता है ताकि छहों माताओं का दूध एक साथ पी सके।)

षण्मुख। षडानन। तमिल में आरुमुगम — छह मुँह वाला।

नाम

महाभारत ख़ुद कहता है: "क्योंकि वह कृत्तिकाओं से जन्मा और उन्हीं ने उसे पाला, इसलिए वह तीनों लोकों में कार्तिकेय कहलाया।"

जिन सप्तर्षियों ने अपनी पत्नियों को शक में त्याग दिया था, उनकी वे पत्नियाँ ही, एक कथा में, आकाश में तारे बनाकर बिठाई गईं। वह तारा-समूह ही छह माताएँ हैं।

टिप्पणी: कृत्तिकाएँ प्लीयडीज़ तारा-समूह हैं (कृत्तिका नक्षत्र)। सबसे पुरानी वैदिक तारा-गणना में वर्ष कृत्तिका से आरंभ होता था — यही एक कारण है कि इस नक्षत्र और "कार्तिकेय" नाम का इतना भार है। छह-मुँह वाले बालक की छवि पुरानी और व्यापक है, पर उसके बनने का तरीका पाठ-दर-पाठ बदलता है। पार्वती द्वारा छह शिशुओं को एक करने वाला रूप विशेष रूप से दक्षिणी/कंद पुराणम् परंपरा में प्रमुख है; दूसरी संस्कृत कथाओं में एक ही बालक छह कृत्तिकाओं का दूध पीने के लिए छह मुख धारण करता है, और कुछ में छह भ्रूणों का मेल अलग ढंग से होता है। "कार्तिकेय" नाम की व्युत्पत्ति महाभारत ख़ुद देता है। सप्तर्षियों द्वारा पत्नियों के त्याग वाला प्रसंग पाठ में है; गाथा उसे बीच-दृश्य में नैतिक टिप्पणी के बिना रखती है।

स्रोत: कई ग्रंथों और परंपराओं से, छह कृत्तिकाएँ

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

कृत्तिकाएँ आकाश का कौन-सा तारा-समूह हैं?

  • सप्तर्षि (बिग डिपर)
  • प्लीयडीज़
  • ओरायन
  • ध्रुवमंडल
पूरी कथा पढ़िए — आकाश की छह

कृत्तिकाएँ प्लीयडीज़ तारा-समूह हैं।

सबसे पुरानी वैदिक तारा-सूचियों में वर्ष कृत्तिका से शुरू होता था।

यही एक कारण है कि इस नक्षत्र का इतना भार है।

क्या हुआ?

सरकंडों में रखा बीज कितने हिस्सों में बँटा?

  • छह
  • दो
  • तीन
  • सात
पूरी कथा पढ़िए — छह चिंगारियाँ

बीज छह हिस्सों में बँट गया।

छह कृत्तिकाओं ने उन्हें पाया और दूध पिलाया।

आगे ये छह एक ही बच्चे में मिलते हैं।

तथ्य

छह शिशुओं को दूध किसने पिलाया?

  • सप्तर्षियों ने
  • पार्वती ने
  • छह कृत्तिकाओं ने
  • गंगा ने
पूरी कथा पढ़िए — छह माताएँ

कृत्तिकाओं ने छह शिशुओं को पाया और पाला।

उन्हीं के नाम पर बच्चा "कार्तिकेय" कहलाया।

आकाश का वह तारा-समूह ही छह माताएँ हैं।

क्या हुआ?

छह शिशु एक कैसे हुए?

  • अग्नि ने उन्हें पिघलाया
  • पार्वती ने छहों को एक साथ गोद में लिया, और वे छह सिर वाले एक बच्चे में मिल गए
  • वे कभी एक नहीं हुए; छह अलग रहे
  • ब्रह्मा ने उन्हें जोड़ा
पूरी कथा पढ़िए — छह मुँह

पार्वती के गोद लेने पर छह शिशु एक हो गए — छह सिर, बारह भुजाएँ।

कुछ पाठों में वह एक ही बच्चा है जो छह मुँह उगाता है ताकि छहों माताओं का दूध एक साथ पिए।

इसीलिए वह षण्मुख, षडानन, आरुमुगम है।

तथ्य

"छह मुँह वाला" तमिल में क्या कहलाता है?

  • मुरुगन
  • वेलन
  • कंदन
  • आरुमुगम
पूरी कथा पढ़िए — छह मुँह के नाम

संस्कृत में षण्मुख और षडानन।

तमिल में आरुमुगम — "आरु" यानी छह, "मुगम" यानी मुँह।

यह उसका सबसे पहचाना जाने वाला रूप है।

किसने कहा?

"क्योंकि वह कृत्तिकाओं से जन्मा और उन्हीं ने उसे पाला, इसलिए वह तीनों लोकों में कार्तिकेय कहलाया।" — यह किस ग्रंथ की अपनी बात है?

  • रामायण
  • शिव पुराण
  • स्कंद पुराण
  • महाभारत
पूरी कथा पढ़िए — नाम की व्युत्पत्ति

महाभारत का स्कंद-प्रसंग "कार्तिकेय" शब्द को कृत्तिकाओं से सीधे जोड़ता है।

यानी छह पालक माताएँ ही उसका सबसे प्रचलित नाम बन गईं।

बाक़ी नाम — स्कंद, कुमार, गुह — अलग-अलग बातों से हैं।

ऐसा क्यों?

सबसे पुरानी भारतीय नक्षत्र-गणनाओं में कृत्तिका को शुरुआत में क्यों रखा गया?

  • क्योंकि कृत्तिका सबसे चमकीला तारा है
  • क्योंकि उस प्राचीन काल में प्लीयडीज़ वसंत-विषुव / वर्षारंभ के बिंदु के पास था और कैलेंडर की शुरुआत का चिह्न बन गया
  • क्योंकि कृत्तिका उत्तर दिशा में है
  • क्योंकि कृत्तिका छह तारों का समूह है
पूरी कथा पढ़िए — साल की शुरुआत

विषुव का बिंदु अयनचालन के कारण धीरे-धीरे तारों के मुकाबले खिसकता है।

जिस प्राचीन काल को यह गणना दिखाती है, उसमें प्लीयडीज़ को वसंत-विषुव और वर्षारंभ से जोड़ा गया था।

यही एक कारण है कि शुरुआती सूचियों में कृत्तिका पहले आती है।

ग्रंथ असहमत

पार्वती द्वारा छह शिशुओं को एक करने वाला रूप ख़ासकर किस परंपरा में प्रमुख है?

  • वैदिक संहिताओं में
  • सिर्फ़ महाभारत में
  • दक्षिणी / कंद पुराणम् परंपरा में
  • रामायण में
पूरी कथा पढ़िए — एक छवि, कई तरीक़े

छह-मुँह वाले बालक की छवि पुरानी और व्यापक है।

पर वह "कैसे बना" — यह पाठ-दर-पाठ बदलता है।

पार्वती वाला मेल दक्षिणी परंपरा में सबसे प्रमुख है।

क्या हुआ?

सप्तर्षियों ने अपनी पत्नियों को शक में त्याग दिया — एक कथा में उन पत्नियों का क्या हुआ?

  • उन्हें आकाश में तारे बनाकर बिठा दिया गया
  • वे वन में चली गईं
  • वे पार्वती की सेविकाएँ बन गईं
  • वे गंगा में विलीन हो गईं
पूरी कथा पढ़िए — तारे बनीं

शक में त्यागी गई पत्नियाँ, एक कथा में, आकाश में तारे बना दी गईं।

वही तारा-समूह — कृत्तिकाएँ — छह माताएँ हैं।

गाथा इस प्रसंग को बीच-दृश्य में नैतिक टिप्पणी के बिना रखती है।

पहेली

मैं छह कृत्तिका माताओं से जुड़ा छह-मुँह वाला बालक हूँ। मैं कौन हूँ?

  • ब्रह्मा
  • रावण
  • शेषनाग
  • कार्तिकेय
पूरी कथा पढ़िए — छह का हिसाब

एक दक्षिणी कथा में छह शिशु मिलकर एक छह-मुँह वाला बालक बनते हैं।

दूसरी कथा में एक ही बालक छह कृत्तिकाओं का दूध पीने के लिए छह मुख धारण करता है।

दोनों षण्मुख नाम को समझाती हैं; दोनों तरीकों को एक ही घटना नहीं बनाना चाहिए।