अध्याय १

दो धाराएँ

एक ही देवता, दो परंपराएँ — उत्तर का एक युद्ध-देवता, और दक्षिण का सबसे प्रिय देवता, जो उससे भी पुराना है

पहाड़ों का लाल देवता

तमिल की सबसे पुरानी कविताएँ — संगम काल की, दो हज़ार साल पुरानी — एक देवता को जानती हैं: मुरुगन।

वहाँ वह पहाड़ों का देवता है, "कुरिंजि" भूमि का। जवानी, युद्ध और प्रेम उसके हैं। उसका रंग लाल है। उसका चिह्न एक भाला है — वेल। उसके झंडे पर मुर्गा और मोर हैं।

उसकी पूजा एक पुजारी करता है जिसे "वेलन" कहते हैं, और वह नाचते-नाचते देवता के आवेश में आ जाता है।

नक्कीरर की "तिरुमुरुकाट्रुप्पडै" — मुरुगन की ओर ले जाने वाली कविता — किसी भी हिंदू देवता के सबसे पुराने लंबे स्तोत्रों में से एक है। वह उसके छह धामों के नाम भी गिनाती है।

उत्तर का सेनापति

उधर उत्तर में, उसी समय के आस-पास, एक अलग देवता है: स्कंद।

यौधेय गणराज्य के सिक्कों पर वह भाला और मोर लिए खड़ा है — एक राज्य का देवता। कुषाण राजा हुविष्क के सिक्कों पर उसके नाम आते हैं — स्कंद, कुमार, महासेन, विशाख।

गुप्त राजाओं ने अपने नाम उसी पर रखे — कुमारगुप्त, स्कंदगुप्त — और कुमारगुप्त प्रथम के सिक्कों पर कार्तिकेय मोर पर बैठा है।

यहाँ वह एक योद्धा है, देवताओं का सेनापति।

एक और भी पुरानी परत

पर सबसे पुरानी परत में स्कंद इतना सौम्य नहीं है।

महाभारत के अपने स्कंद-प्रसंग में, और सुश्रुत जैसे चिकित्सा-ग्रंथों में, "स्कंद", "विशाख" और "कुमार" उन आत्माओं में गिने जाते हैं जो छोटे बच्चों को पकड़ती और सताती हैं — जिन्हें शांत करने के लिए अनुष्ठान होता था।

सौम्य सेनापति बाद का समाधान है। यही बात गणेश के साथ भी है, जो शुरू में एक उपद्रवी शक्ति था।

दो नदियाँ मिलीं

गुप्तकाल तक दोनों देवता एक मान लिए जाते हैं।

कृत्तिकाओं से जन्म, तारक-युद्ध, शिव-पार्वती का पुत्र — यह उत्तर का ढाँचा है। तमिल परंपरा इसे अपना लेती है, पर वेल, मोर, मुर्गा, वल्ली और छह धाम अपने रखती है।

यह कहना ग़लत होगा कि "वह हमेशा से एक ही देवता था"। यह भी ग़लत होगा कि "उत्तर ने एक तमिल देवता चुरा लिया"। दोनों धाराएँ पुरानी हैं, और वे यहाँ आकर मिलीं।

टिप्पणी: मुरुगन तमिल संगम साहित्य (लगभग तीसरी सदी ईसा पूर्व से तीसरी सदी ईस्वी) में एक स्थापित देवता है — कुरिंजि (पर्वतीय) भूमि का, वेल, मोर और मुर्गे वाला; नक्कीरर की तिरुमुरुकाट्रुप्पडै उसका सबसे पुराना लंबा स्तोत्र है और छह धामों के नाम देती है। उत्तर में स्कंद प्रारंभिक ईस्वी सदियों के यौधेय सिक्कों और दूसरी सदी ईस्वी के कुषाण (हुविष्क) सिक्कों पर एक युद्ध-देवता है; उत्तर भारत में कार्तिकेय-स्कंद की स्वतंत्र छवियाँ लगभग पहली सदी ईसा पूर्व तक प्रमाणित हैं। गुप्त राजा कुमारगुप्त और स्कंदगुप्त उसी के नाम पर हैं। महाभारत के स्कंद-प्रसंग और आरंभिक चिकित्सा-ग्रंथों में "स्कंद/विशाख/कुमार" बाल-ग्रह भी हैं — सौम्य सेनापति वाला रूप बाद का है (जैसे गणेश)। गुप्तकाल तक तमिल मुरुगन और उत्तरी स्कंद एक पहचाने जाने लगते हैं। मुरुगन को आधुनिक समय में तमिल-द्रविड़ पहचान का प्रतीक भी माना गया है और पूर्ण रूप से पैन-हिंदू देवता भी; उसकी तमिल पूजा की प्राचीनता पर कोई विवाद नहीं है, और यह गाथा उस राजनीति में किसी पक्ष में नहीं जाती।

स्रोत: कई ग्रंथों और परंपराओं से, दो धाराएँ

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

संगम काल की तमिल कविताओं में मुरुगन किस भूमि के देवता हैं?

  • समुद्र-तट की
  • पहाड़ों की
  • खेती की ज़मीन की
  • रेगिस्तान की
पूरी कथा पढ़िए — पहाड़ों का लाल देवता

संगम कविता तमिल भूमि को पाँच "तिणै" में बाँटती है, और हर एक का अपना देवता है।

मुरुगन कुरिंजि — पहाड़ी — भूमि के देवता हैं। उनका रंग लाल है, उनका चिह्न भाला है।

यह एक प्राचीन तमिल परत है, जो उत्तरी स्कंद के साथ हुए बाद के संस्कृत-समन्वय से पुरानी है।

तथ्य

एक चिह्न जो मुरुगन के साथ उत्तर और दक्षिण, दोनों में जुड़ा है — क्या?

  • चक्र
  • त्रिशूल
  • भाला
  • गदा
पूरी कथा पढ़िए — वेल

तमिल परंपरा में वेल पार्वती/शक्ति का दिया है — ज्ञान-वेल।

उत्तरी ग्रंथों में यह एक शक्ति है, कभी अग्नि की दी, कभी इंद्र की।

दोनों धाराओं में भाला ही उनका असली हथियार है।

कौन हूँ मैं?

सबसे पुरानी तमिल कविताओं में मैं पहाड़ों का लाल देवता हूँ, मेरे झंडे पर मुर्गा और मोर हैं। उत्तर में मैं देवताओं का सेनापति हूँ। मैं कौन हूँ?

  • मुरुगन / स्कंद
  • इंद्र
  • अग्नि
  • हनुमान
पूरी कथा पढ़िए — दो नामों वाला एक देवता

दक्षिण में वह मुरुगन है — तमिल का देवता।

उत्तर में वह स्कंद, कार्तिकेय, कुमार है — युद्ध का देवता।

गुप्तकाल तक दोनों एक मान लिए जाते हैं।

बाद की परंपरा

नक्कीरर की "तिरुमुरुकाट्रुप्पडै" किसी हिंदू देवता के सबसे पुराने लंबे ___ में से एक है।

  • मंदिरों
  • मूर्तियों
  • शिलालेखों
  • स्तोत्रों
पूरी कथा पढ़िए — सबसे पुरानी भक्ति

"तिरुमुरुकाट्रुप्पडै" का अर्थ है "मुरुगन की ओर ले जाने वाली कविता"।

यह मुरुगन के छह पवित्र स्थानों का गुणगान करती है।

ऐसा लंबा, सधा हुआ स्तोत्र किसी भी हिंदू देवता के लिए इतना पुराना कम ही मिलता है।

तथ्य

किन गुप्त राजाओं ने अपने नाम इसी देवता पर रखे?

  • चंद्रगुप्त और समुद्रगुप्त
  • कुमारगुप्त और स्कंदगुप्त
  • हर्षगुप्त और देवगुप्त
  • घटोत्कच और श्रीगुप्त
पूरी कथा पढ़िए — राजाओं का देवता

पाँचवीं सदी तक कार्तिकेय एक राजकीय, युद्ध का देवता है।

कुमारगुप्त प्रथम के सिक्कों पर वह मोर पर बैठा दिखता है।

स्कंदगुप्त के नाम में ही देवता का नाम है।

क्या हुआ?

सबसे पुरानी परत में — महाभारत के अपने प्रसंग और सुश्रुत जैसे चिकित्सा-ग्रंथों में — "स्कंद", "विशाख" और "कुमार" किस तरह की शक्तियाँ हैं?

  • छोटे बच्चों को पकड़ने और सताने वाली आत्माएँ (ग्रह)
  • देवताओं के सारथी
  • नदियों के रक्षक
  • वेदों के ऋषि
पूरी कथा पढ़िए — जो पहले डराता था

सौम्य सेनापति वाला रूप बाद का समाधान है।

शुरू में स्कंद उन बाल-ग्रहों में गिना जाता है जिनसे बच्चों की रक्षा के लिए पूजा होती थी।

यही बात गणेश के साथ भी है — जो शुरू में एक उपद्रवी विनायक था।

ऐसा क्यों?

यह अध्याय एक लगातार कहानी के बजाय "दो धाराओं" से क्यों शुरू होता है?

  • क्योंकि कहानी बहुत लंबी है
  • क्योंकि पाठ खो गए हैं
  • क्योंकि यह देवता सचमुच दो पुरानी परंपराओं का मेल है
  • क्योंकि दो अलग देवता हैं जिन्हें लोग भ्रम से एक मानते हैं
पूरी कथा पढ़िए — दो नदियाँ मिलीं

तमिल मुरुगन संगम काल से एक स्थापित देवता है।

उत्तरी स्कंद यौधेय और कुषाण सिक्कों से एक युद्ध-देवता है।

यह कहना ग़लत है कि "वह हमेशा एक था"; यह भी ग़लत कि "उत्तर ने तमिल देवता चुरा लिया"।

तथ्य

किन सिक्कों पर स्कंद भाला और मोर लिए एक राज्य-देवता के रूप में मिलता है?

  • चोल सिक्कों पर
  • यौधेय सिक्कों पर
  • मौर्य सिक्कों पर
  • सातवाहन सिक्कों पर
पूरी कथा पढ़िए — एक गणराज्य का देवता

यौधेय एक सैनिक गणराज्य था और स्कंद को अपना राज्य-देवता मानता था।

उनके सिक्कों पर स्कंद भाला और मोर के साथ है।

ये कार्तिकेय वाले सिक्के प्रारंभिक ईस्वी सदियों के हैं।

क्या हुआ?

संस्कृत ढाँचे (कृत्तिका-जन्म, तारक-युद्ध, शिव-पार्वती का पुत्र) को अपनाते हुए तमिल परंपरा ने कौन-सी चीज़ें अपनी रखीं?

  • सिर्फ़ नाम "मुरुगन"
  • सिर्फ़ छह धाम
  • कुछ नहीं; तमिल परंपरा ने सब कुछ उत्तर से लिया
  • वेल, मोर, मुर्गा, वल्ली और छह धाम
पूरी कथा पढ़िए — जो तमिल रहा

जन्म-कथा और तारक-युद्ध उत्तर का ढाँचा है।

पर वेल, मोर-मुर्गा वाला झंडा, वल्ली से विवाह, और छह धाम — ये तमिल परत हैं।

इसीलिए यह एक ही देवता दो बहुत अलग तरीक़ों से पूजा जाता है।

कौन हूँ मैं?

आज मैं देवताओं का मित्र-सेनापति हूँ। पर सबसे पुराने ग्रंथों में मैं वह शक्ति था जिससे लोग अपने बच्चों की रक्षा के लिए अनुष्ठान करते थे। मैं कौन हूँ?

  • यम
  • राहु
  • वृत्र
  • स्कंद
पूरी कथा पढ़िए — उलटी दिशा

गणेश की तरह स्कंद की भी शुरुआत एक ambivalent, कभी डरावनी शक्ति के रूप में हुई।

महाभारत ख़ुद उसे बाल-ग्रहों में गिनता है।

प्रारंभिक ईस्वी सदियों तक युद्ध-देवता और विजयी सेनापति स्कंद का रूप साफ़ स्थापित हो चुका था, और गुप्तकाल तक वह प्रमुख बना रहा।