
कांड २
आधी रात, और एक नदी
जिस रात सबसे ज़्यादा पहरा था, उसी रात कोई बाहर निकल गया
आधी रात, और एक नदी — कृष्ण-लीला का कांड २। स्रोत: भागवत पुराण। इसमें ४ दृश्य हैं — जब सब सो गए; यमुना, उस रात; गोकुल में अदला-बदली; जो हाथ से फिसल गई — और अंत में १० सवाल।
जब सब सो गए
आठवीं बार का इंतज़ार पूरे मथुरा को था। पहरा दोगुना था, बेड़ियाँ कसी हुई थीं, कारागार के हर दरवाज़े पर ताला था, और चारों ओर सिपाही तैनात थे।
आधी रात को बच्चा हुआ। और उसी क्षण पूरा कारागार जैसे साँस लेना भूल गया।
पहरेदारों की पलकें अपने आप झुक गईं। देवकी की बेड़ियाँ खनक के साथ खुल गईं। और भारी लोहे के दरवाज़े, जिन्हें धकेलने में चार आदमी लगते थे, बिना आवाज़ के अपने आप सरक गए।
वसुदेव ने बच्चे को उठाया, एक टोकरी में रखा, सिर पर धरा, और गलियारे से बाहर निकल आए। एक भी सिपाही ने आँख नहीं खोली।
यमुना, उस रात
बाहर तूफ़ान था। बारिश ऐसी कि हाथ-भर आगे का रास्ता नहीं दिखता था, और यमुना दोनों किनारों से ऊपर चढ़ी हुई थी, गरजती हुई।
वसुदेव पानी में उतर गए। लौटने का रास्ता नहीं था — पीछे कारागार था, आगे यह नदी।
भागवत की कथा कहती है कि पानी उन्हें डुबाने के बजाय रास्ता देता चला गया, और ऊपर एक विशाल शेषनाग ने अपने फन फैलाकर बच्चे पर से बारिश रोक ली।
एक बूढ़ा आदमी, सिर पर टोकरी, कमर तक उफनता पानी — और चारों ओर कुछ ऐसा हो रहा था जो प्रकृति के नियम से नहीं होना चाहिए था। वसुदेव ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
गोकुल में अदला-बदली
नंद का घर सोया पड़ा था। यशोदा को उसी रात एक बच्ची हुई थी, और वे प्रसव की थकान से बेसुध थीं — उन्हें पता ही नहीं चला कि कोई भीतर आया।
वसुदेव ने अपने बेटे को यशोदा के पास लिटाया, उनकी बच्ची को उठाया, और उल्टे पाँव लौट पड़े। एक शब्द नहीं बोले, किसी को जगाया नहीं।
कारागार में लौटते ही सब कुछ पहले जैसा हो गया — दरवाज़े बंद, बेड़ियाँ कसी हुई, पहरेदार जागते हुए। जैसे वसुदेव कभी उठे ही न हों।
फिर बच्ची रोई। और उसकी आवाज़ सुनते ही सिपाही कंस को बुलाने दौड़े।
जो हाथ से फिसल गई
कंस आधी नींद में, नंगी तलवार लिए भागा आया। कोठरी में घुसते ही रुका — यह तो लड़की थी।
एक पल को वह ठिठका। फिर उसने ख़ुद से कहा कि आकाशवाणी झूठी भी हो सकती है, पर जोखिम नहीं लिया जा सकता। उसने बच्ची को बालों से पकड़ा और पत्थर की देहरी पर दे मारने के लिए हाथ उठाया।
बच्ची उसकी मुट्ठी से छूटकर हवा में ऊपर उठ गई। जहाँ वह थी, वहाँ अब आठ भुजाओं वाली एक देवी खड़ी थी।
"जिसे तू ढूँढ़ रहा है, वह जन्म ले चुका है — और यहाँ नहीं है।"
फिर वह ओझल हो गई। कंस अकेला खड़ा रह गया, हाथ में तलवार, और तलवार के लिए कुछ नहीं।
टिप्पणी: पहरेदारों का सो जाना, बेड़ियों का खुलना, यमुना पार करना और गोकुल में अदला-बदली — यह पूरा क्रम भागवत पुराण के दसवें स्कंध में मिलता है। हरिवंश के प्रचलित पाठ में भी अदला-बदली और बच्ची का देवी-रूप में बदल जाना मौजूद है, साथ में एक ब्योरा जो भागवत में इस तरह नहीं है: कंस बाद में पछताता है। पानी के अपने आप हटने वाला ब्योरा भागवत में साफ़ है; हरिवंश के उसी अध्याय में वह नहीं दिखा, इसलिए उसे हर ग्रंथ की बात मानकर नहीं चलना चाहिए।
स्रोत: कई ग्रंथों से, आधी रात, और एक नदी