कांड ५

कालिया

यमुना के एक मोड़ पर पक्षी नहीं उड़ते थे, पशु पानी नहीं पीते थे — और एक दिन एक गेंद वहीं जा गिरी

नदी जो साँस लेना भूल गई थी

गोकुल में एक जगह ऐसी थी जहाँ कोई नहीं जाता था। यमुना का वह मोड़, जहाँ पानी से भाप जैसी लपटें उठती थीं, और किनारे पर बस एक सूखा हुआ कदंब खड़ा था — बाक़ी हर पेड़ मुरझाकर काला पड़ चुका था।

पक्षी उसके ऊपर से उड़ने के बजाय घूमकर जाते थे। गायें उस पानी के पास पहुँचने से पहले ही रँभाकर पीछे हट जातीं।

गाँव के बूढ़े बच्चों को दूर से ही चेता देते: "उधर मत जाना। वहाँ कालिया रहता है — सौ फनों वाला नाग, जो अपना विष यमुना में उगलता है।"

बरसों से वह मोड़ ऐसे ही पड़ा था — नदी का एक हिस्सा, जो साँस लेना भूल गया था।

गेंद, और वह मूर्खता जो बच्चे ही कर सकते हैं

एक दोपहर ग्वाल-बाल गेंद खेल रहे थे। किसी ने ज़ोर से मारी, गेंद हवा में उछली, और ठीक उसी ज़हरीले मोड़ में जा गिरी।

खेल रुक गया। सब एक-दूसरे को देखने लगे — गेंद तो वहाँ से कोई नहीं लाएगा।

"मत जा, कान्हा!" किसी ने चिल्लाया। पर कृष्ण तब तक कदंब पर चढ़ चुके थे। ऊपर की डाल पर खड़े होकर उन्होंने एक बार नीचे उबलते काले पानी को देखा, कमरबंद कसा, और छलाँग लगा दी।

पानी में डूबते ही जैसे किसी ने भट्टी में हाथ डाल दिया हो। पूरा कुंड खौल उठा, तल से बुलबुले फूटे, और फिर पानी चीरकर एक विशाल फन ऊपर उठा।

फन पर नाच

कालिया ने कृष्ण को अपने कुंडलों में कस लिया, गले तक लपेट लिया। किनारे खड़े बच्चे चीख़ पड़े। एक बच्चा दौड़कर गाँव की ओर भागा।

यशोदा दौड़ी आईं, नंद उनके पीछे, और आधा गोकुल। सबने वही देखा जिससे वे बरसों से डरते थे — पानी लाल और काला उबल रहा था, और कहीं कृष्ण नहीं दिख रहे थे। नंद ने पानी में उतरने के लिए क़दम बढ़ाया; बलराम ने रोक लिया — "रुको। कुछ नहीं होगा उसे।"

फिर पानी हिला। कृष्ण उभरे — पर इस बार कालिया की पकड़ में नहीं, उसके सबसे ऊँचे फन पर खड़े।

और फिर वे नाचने लगे। हर क़दम एक फन पर पड़ता, और हर क़दम पर वह फन झुक जाता, लहूलुहान होता जाता। सौ फन थे, और कृष्ण एक-एक पर बारी-बारी थिरकते रहे, जब तक नाग की सारी अकड़ टूट नहीं गई।

जो बचा वह गया, जो गया वह सुरक्षित हुआ

तभी पानी से कालिया की पत्नियाँ निकलीं, हाथ जोड़े। "इसे छोड़ दीजिए, प्रभु। यह अपने स्वभाव से विषैला है — इसमें इसका दोष कितना?"

कृष्ण रुक गए। उन्होंने कालिया को मारा नहीं। बस आदेश दिया: "यमुना छोड़ दे। समुद्र लौट जा, रमणक द्वीप, जहाँ तेरा घर था।"

और एक वचन भी दिया — "जिस फन पर मेरे पैर पड़े हैं, वहाँ अब गरुड़ की परछाईं भी नहीं गिरेगी। तू सुरक्षित रहेगा।" कालिया गरुड़ के डर से ही यमुना में आ छिपा था; अब वही डर कृष्ण के पैरों के निशान ने ख़त्म कर दिया।

वह अपने कुनबे को लेकर रेंगता हुआ चला गया — अपने ही अपमान को कवच बनाकर।

टिप्पणी: भागवत पुराण (दसवाँ स्कंध, अध्याय १६) में कालिया-दमन अध्याय-स्तर पर पक्की तरह मिलता है। हरिवंश के आलोचनात्मक संस्करण (पी.एल. वैद्य, १९६९-७१) की सामग्री-सूची में भी यह प्रसंग नामित रूप से है, पर इस सत्र में उसकी सटीक अध्याय-संख्या नहीं मिल सकी — इसलिए यहाँ सिर्फ़ इतना कहा गया है कि प्रसंग दोनों ग्रंथों में मौजूद है, बराबरी का दावा नहीं किया गया।

स्रोत: कई ग्रंथों से, कालिया

अब बताइए — कितना याद रहा?

कौन हूँ मैं?

मैं गरुड़ के डर से अपना घर छोड़कर यमुना में जा बसा था। मेरे ज़हर से नदी का एक हिस्सा हमेशा उबलता रहता था। मैं कौन हूँ?

  • शेषनाग
  • वासुकि
  • तक्षक
  • कालिया
पूरी कथा पढ़िए — रमणक द्वीप से यमुना तक

भागवत पुराण के दसवें स्कंध, अध्याय १६ में कालिया की पूरी कथा आती है।

कालिया गरुड़ का सामना करने से डरता था, इसलिए यमुना के एक कुंड में जा छिपा — जहाँ किसी पुराने शाप के कारण गरुड़ नहीं आ सकता था।

उसके वहाँ बसने से यमुना का वह हिस्सा इतना विषैला हो गया कि किनारे की एक कदंब को छोड़कर कोई पेड़-पौधा जीवित नहीं बचा।

पहेली

मैं गेंद के पीछे कूदा, ज़हर में डूबा, और जब बाहर आया तो मेरे पैरों के निशान हमेशा के लिए एक साँप के सिर पर छप गए। मैं कौन हूँ?

  • कृष्ण
  • बलराम
  • अर्जुन
  • नंद
पूरी कथा पढ़िए — निशान जो सुरक्षा बन गया

कालिया-दमन के बाद कृष्ण ने वचन दिया कि जिस नाग के सिर पर उनके पैरों के निशान हों, उसे अब गरुड़ नहीं छुएगा।

यही निशान कालिया की जान भी बचा गया और उसकी शर्मिंदगी भी हमेशा के लिए दर्ज कर गया।

भागवत पुराण इसे कृष्ण की दंड-नीति का उदाहरण मानता है — दंड मिला, पर मृत्यु नहीं; और दंड के साथ सुरक्षा भी जुड़ गई।

तथ्य

कालिया-दमन का प्रसंग भागवत पुराण के किस स्कंध में आता है?

  • ग्यारहवें
  • पहले
  • नौवें
  • दसवें
पूरी कथा पढ़िए — दसवां स्कंध, कृष्ण का घर

भागवत पुराण के बारह स्कंधों में दसवाँ स्कंध सबसे बड़ा है — क़रीब नब्बे अध्याय, चार हज़ार श्लोक — और यही कृष्ण-लीला का मुख्य ठिकाना है।

माखन-चोरी, कालिया-दमन, गोवर्धन, कंस-वध — ये सब इसी एक स्कंध में एक के बाद एक आते हैं, बचपन से जवानी की ओर बढ़ते हुए।

यही वजह है कि जब कोई "भागवत में कृष्ण की कथा" कहता है, अक्सर उसका मतलब यही दसवाँ स्कंध होता है।

क्या हुआ?

कालिया के फनों पर चढ़कर कृष्ण के नाचने के बाद, कालिया की पत्नियों ने क्या किया?

  • कालिया को छोड़कर भाग गईं
  • हाथ जोड़कर सामने आईं और क्षमा माँगी
  • कृष्ण पर हमला किया
  • कुछ नहीं किया, दूर खड़ी देखती रहीं
पूरी कथा पढ़िए — पत्नियों की विनती

भागवत पुराण के अनुसार जब कालिया लहूलुहान होकर लगभग बेदम हो गया, उसकी पत्नियाँ जल से बाहर आकर कृष्ण के सामने खड़ी हुईं।

उन्होंने कहा कि कालिया ने अपनी प्रकृति के अनुसार ही ज़हर फैलाया — यह उसका दोष कम, स्वभाव ज़्यादा है — और दया माँगी।

कृष्ण ने बात मान ली। यही वह मोड़ है जहाँ दंड करुणा में बदल जाता है — कालिया मरा नहीं, निर्वासित हुआ।

सही क्रम

इन घटनाओं का सही क्रम कौन-सा है?

  • कृष्ण का कूदना → पत्नियों की विनती → गेंद का गिरना → फन पर नृत्य
  • फन पर नृत्य → गेंद का गिरना → पत्नियों की विनती → निर्वासन
  • निर्वासन → गेंद का गिरना → फन पर नृत्य → पत्नियों की विनती
  • गेंद का गिरना → कृष्ण का कूदना → फन पर नृत्य → पत्नियों की विनती और निर्वासन
पूरी कथा पढ़िए — एक दोपहर की पूरी कहानी

भागवत पुराण के अनुसार यह पूरी घटना एक ही दिन में घट जाती है — गेंद खेल से शुरू होकर निर्वासन तक।

किनारे खड़े ग्वाल-बाल और गायों की चीख़ सुनकर नंद और गोपियाँ भी वहाँ दौड़ी आती हैं, यह सोचकर कि कृष्ण डूब गए।

जब तक वे पहुँचते, कृष्ण पहले ही कालिया के फन पर नाच चुके होते हैं — डर की जगह मेला जैसा दृश्य बन जाता है।

ऐसा क्यों?

कृष्ण ने कालिया को मार क्यों नहीं डाला, जबकि उन्होंने उसे बुरी तरह हरा दिया था?

  • क्योंकि कालिया की पत्नियों ने क्षमा माँगी, और कालिया ने भी हार मानकर शरण ली
  • क्योंकि कालिया बहुत बलवान था
  • क्योंकि गरुड़ ने रोका
  • क्योंकि यमुना का जल फिर से साफ़ हो चुका था
पूरी कथा पढ़िए — करुणा जो निर्वासन में बदली

भागवत पुराण में यह प्रसंग सिर्फ़ पराक्रम की कथा नहीं, दंड और दया के बीच के फ़र्क़ की कथा भी है।

कालिया ने अपने स्वभाव का बचाव किया, उसकी पत्नियों ने विनती की — और कृष्ण ने माना कि सज़ा दी जा चुकी है, अब मृत्यु की ज़रूरत नहीं।

इसीलिए कालिया को यमुना छोड़कर समुद्र में रमणक द्वीप जाने को कहा गया, जान बख़्श दी गई।

तथ्य

कालिया को निर्वासित करने के बाद कृष्ण ने उसे कहाँ जाकर बसने को कहा?

  • रमणक द्वीप में वापस, समुद्र की ओर
  • गंगा में
  • हिमालय में
  • पाताल में
पूरी कथा पढ़िए — घर वापसी, एक शर्त के साथ

कृष्ण ने कालिया से कहा कि यमुना अब उसका ठिकाना नहीं रहेगी — उसे समुद्र लौटकर रमणक द्वीप में बसना होगा।

साथ ही यह वचन भी दिया कि उसके फन पर पड़े पैरों के निशान अब उसे गरुड़ से सुरक्षा देंगे।

भागवत पुराण इसे यमुना के जल के फिर से साफ़ होने के साथ जोड़ता है — कालिया के जाते ही नदी फिर से जीने लायक़ बन जाती है, पक्षी लौट आते हैं।

कौन हूँ मैं?

जब मेरा बेटा ज़हरीले पानी में कूदा, मैं और बाक़ी सब किनारे खड़े होकर रोते-चीखते रहे, यह सोचकर कि वह डूब गया। मैं कौन हूँ?

  • देवकी
  • रोहिणी
  • यशोदा (और नंद व गोपियाँ)
  • राधा
पूरी कथा पढ़िए — किनारे पर मचा हाहाकार

भागवत पुराण बताता है कि गेंद खोजते हुए जब ग्वाल-बाल भागे-भागे नंद के पास पहुँचे और बताया कि कृष्ण ज़हरीले पानी में कूद गए हैं, पूरा गोकुल दौड़ पड़ा।

यशोदा बेसुध होने की हालत में थीं। कुछ गोपियाँ पानी में उतरने तक को तैयार हो गईं।

यह हाहाकार तभी थमा जब कृष्ण कालिया के फन पर नाचते हुए ऊपर आए — डर मेले में बदल गया।

तथ्य

हरिवंश के आलोचनात्मक संस्करण के बारे में क्या सही है?

  • वह गर्ग संहिता का ही दूसरा नाम है
  • उसमें भी "कालिया के फन पर नृत्य" नामित प्रसंग है, पर सटीक अध्याय-संख्या इस सत्र में नहीं मिली
  • वह भागवत पुराण से भी लंबा है
  • उसमें कालिया की कथा है ही नहीं
पूरी कथा पढ़िए — दो ग्रंथ, एक कथा, अलग विस्तार

पी.एल. वैद्य के संपादन में तैयार हरिवंश के आलोचनात्मक संस्करण (१९६९-७१) की विषय-सूची में कालिया के फन पर नृत्य नामित रूप से मिलता है।

पर इस विषय-सूची से यह पता नहीं चलता कि कथा किस अध्याय-संख्या पर है, या उसका विस्तार भागवत जितना ही है या छोटा।

इसलिए यहाँ ईमानदारी से इतना ही कहा जा सकता है: प्रसंग दोनों ग्रंथों में है, पर बराबर तुलना के लिए और गहरी जाँच चाहिए।

ऐसा क्यों?

गरुड़ कालिया के उस कुंड में क्यों नहीं आ पाता था, जहाँ वह यमुना में छिपा हुआ था?

  • क्योंकि कृष्ण ने रोक रखा था
  • क्योंकि किसी पुराने शाप के कारण गरुड़ उस विशेष कुंड में प्रवेश नहीं कर सकता था
  • क्योंकि गरुड़ पानी में उड़ नहीं सकता
  • क्योंकि यमुना पवित्र नदी है
पूरी कथा पढ़िए — छिपने की जगह जो जाल बन गई

भागवत पुराण के अनुसार कालिया ने यमुना का वही कुंड इसलिए चुना क्योंकि किसी शाप के कारण वहाँ गरुड़ नहीं आ सकता था — नागों का शत्रु वहाँ बेबस था।

यही सुरक्षा कालिया के लिए जाल भी बन गई — वह इतना निश्चिंत हो गया कि नदी को ज़हरीला बनाता चला गया, बिना यह सोचे कि यहाँ कोई और भी आ सकता है जिससे गरुड़ के बराबर डरना चाहिए था।

कृष्ण के आगमन ने यही दिखाया — सुरक्षा हमेशा एक ही ख़तरे से नहीं होती।