पर्व ४

विराट पर्व

तेरहवाँ वर्ष — पाँच योद्धा, पाँच नए नाम

पाँच भेस

तेरहवाँ वर्ष अज्ञातवास का था। पूरे एक साल छिपकर रहना था, और पहचाने जाने पर फिर बारह साल वन। पाँचों ने मत्स्य देश चुना, जहाँ राजा विराट थे। जाने से पहले उन्होंने अपने हथियार एक शमी वृक्ष पर बाँध दिए और ऊपर एक शव लटका दिया, ताकि कोई पास न जाए, न कोई छूने की हिम्मत करे, न कोई पूछे कि भीतर क्या छिपा है।

फिर सबने नाम और काम बदल लिए। युधिष्ठिर कंक बने, राजा के पास बैठकर पासे खेलने वाला ब्राह्मण, वही खेल जिसने उन्हें यहाँ तक पहुँचाया था। भीम वल्लभ बने, रसोइया, जिसकी बाँहों में पूरी सेना को चीर डालने की ताक़त थी। अर्जुन बृहन्नला बने, राजकुमारी उत्तरा को नृत्य और संगीत सिखाने वाली, उर्वशी का शाप यहाँ काम आया, वह एक साल का था, और यही वह साल था। नकुल ग्रंथिक बने और घोड़ों का काम सँभाला, सहदेव तंत्रिपाल बने और गायों का। और द्रौपदी सैरंध्री बनीं, रानी सुदेष्णा की दासी। जो लोग अब तक राजघराने की तरह जीते थे, उन्हें एक साल दूसरों की सेवा में रहना था, चुपचाप, नज़रें झुकाकर।

कीचक-वध

रानी का भाई कीचक उस राज्य का सेनापति था, और असल ताक़त उसी के पास थी। उसकी नज़र सैरंध्री पर पड़ी। उसने पीछा किया, द्रौपदी ने मना किया, उसने सुनने से इनकार कर दिया। एक दिन उसने भरी सभा में उन्हें लात मार दी। युधिष्ठिर वहीं बैठे थे और कुछ नहीं कर सकते थे, बोलते ही भेस खुल जाता, और तेरह साल का त्याग एक पल में बेकार हो जाता।

रात में द्रौपदी भीम के पास गईं। योजना बनी। द्रौपदी ने कीचक को नाचघर में मिलने बुलाया। अँधेरे में कीचक पहुँचा, वहाँ द्रौपदी नहीं, भीम बैठे थे। भीम ने उसे मार डाला, और शरीर को इस तरह गूँथ दिया कि हाथ-पैर सिर अलग पहचाने ही न जाएँ, गेंद जैसा कर दिया। यह जान-बूझकर किया गया, ताकि कोई यह न सोच सके कि यह किसी आदमी का काम है, अगर लोग समझते कि इतनी ताक़त वाला कोई इंसान यहाँ है, तो भेस उसी दिन खुल जाता। लोगों ने कहा कि किसी गंधर्व ने मारा है।

गायों का हरण

कीचक मरा, तो मत्स्य कमज़ोर पड़ गया, उसका सबसे बड़ा योद्धा चला गया था। कौरवों को यह ख़बर मिली, वे यह भी ढूँढ़ रहे थे कि पांडव कहाँ हैं। उन्होंने विराट की गायें घेर लीं। राजा और उनकी सेना एक तरफ़ से लड़ने निकल गए, नगर में सिर्फ़ राजकुमार उत्तर बचा। उत्तर ने बड़ी-बड़ी बातें कीं, कि मैं अकेला सबको हरा दूँगा, बस मुझे एक अच्छा सारथी मिल जाए। बृहन्नला को सारथी बनाकर भेज दिया गया।

रथ जब कौरव सेना के सामने पहुँचा, उत्तर ने भीष्म, द्रोण, कर्ण, दुर्योधन, सबको एक साथ खड़ा देखा। वह डरकर रथ से कूद पड़ा और भागने लगा। बृहन्नला ने उसे पकड़ा, वापस लाया, और कहा कि अब तुम रथ हाँको। फिर वे शमी वृक्ष के पास गए, गांडीव उतारा, और लौट आए। एक अकेले रथ ने पूरी कौरव सेना को रोक दिया। भीष्म ने पहचान लिया, द्रोण ने भी। पर तब तक तेरहवाँ वर्ष पूरा हो चुका था, भीष्म ने ख़ुद गिनकर बता दिया कि गिनती के हिसाब से समय बीत चुका है। शर्त टूटी नहीं थी।

अर्जुन का प्रकट होना

उत्तर लौटकर सबको बताने लगा कि उसने जीत लिया। राजा विराट ख़ुश हुए। उत्तर ने कहा कि जीता उसने नहीं है, उसने बताया कि उसका सारथी कौन था। तब पाँचों ने भेस उतार दिया। विराट ने अपनी बेटी उत्तरा का विवाह अर्जुन से करना चाहा। अर्जुन ने मना कर दिया, पर बुरा मानकर नहीं, उन्होंने कहा कि वे एक साल उसके गुरु रहे हैं, नाच सिखाते रहे हैं, और इसलिए वह उनके लिए पुत्री जैसी है। फिर उन्होंने कहा कि वह उनकी बहू बने। उत्तरा का विवाह अभिमन्यु से हुआ। उस विवाह में जो लोग जुटे, वही आगे युद्ध की योजना बनाएँगे।

टिप्पणी: शमी वृक्ष पर हथियार छिपाना, पाँचों के नए नाम, कीचक-वध, गो-हरण, अर्जुन का प्रकट होना और उत्तरा-अभिमन्यु का विवाह — सब व्यास रचित महाभारत के विराट पर्व में हैं। अर्जुन का बृहन्नला बनना उर्वशी के उसी शाप से जुड़ता है जो वन पर्व में मिला था, और पाठ इसे वरदान की तरह दर्ज करता है। अर्जुन का उत्तरा से विवाह न करना पाठ में है, और कारण भी — वे उसके गुरु रह चुके थे, इसलिए वह उनके लिए पुत्री जैसी थी। भीम का कीचक के शरीर को गूँथ देना भी पाठ में है, और उसका कारण भी: भेस बचाना।

स्रोत: महाभारत (परंपरा में वेदव्यास से संबद्ध), विराट पर्व

अब बताइए — कितना याद रहा?

कौन हूँ मैं?

मैं एक वर्ष तक राजकुमारी को नृत्य सिखाता रहा। यह वेश मुझे एक पुराने शाप से मिला था। मैं कौन हूँ?

  • नकुल
  • सहदेव
  • युधिष्ठिर
  • अर्जुन
पूरी कथा पढ़िए — शाप जो ढाल बना

इंद्रलोक में उर्वशी का शाप अर्जुन के लिए अपमान था, और इंद्र ने उसे एक वर्ष तक सीमित करवाया था।

पूरे तेरहवें वर्ष के लिए यही सबसे कठिन समस्या थी — अर्जुन जैसा योद्धा एक साल कैसे छिपे।

बृहन्नला के वेश में वे अंतःपुर में रह सके, जहाँ किसी को शक नहीं हुआ।

यानी जो श्राप था, वही एकमात्र कारण बना कि पांडव तेरहवाँ वर्ष निकाल पाए।

तथ्य

अज्ञातवास में युधिष्ठिर ने कौन-सा वेश धरा?

  • रसोइया
  • घोड़ों का रखवाला
  • कंक
  • सारथी
पूरी कथा पढ़िए — जो पासे ही खेलता रहा

महाभारत यहाँ एक कड़वी विडंबना रखता है, और उस पर कोई टिप्पणी नहीं करता।

जिस आदमी ने पासों में राज्य, भाई और पत्नी हारी, उसने छिपने के लिए वही काम चुना — दरबार में राजा को पासे खिलाना।

कंक के वेश में वे विराट के प्रिय बन गए, और उन्हीं की सभा में बैठकर उन्होंने द्रौपदी का अपमान भी देखा।

यह पूरे पर्व का सबसे शांत हिस्सा है, और शायद सबसे भारी भी।

क्या हुआ?

कीचक ने भरी सभा में द्रौपदी को लात मारी। उस समय युधिष्ठिर ने क्या किया?

  • उन्होंने कीचक को दंड दिया
  • उन्होंने भीम को भेजा
  • उन्होंने सभा छोड़ दी
  • कुछ नहीं
पूरी कथा पढ़िए — एक साल की चुप्पी

यह प्रसंग सभा पर्व की चुप्पी को दोहराता है, पर इस बार कारण अलग है।

द्रौपदी ने भरी सभा में कहा कि यहाँ बैठे लोग नाम के ही पति हैं। वे सीधे युधिष्ठिर को सुना रही थीं।

युधिष्ठिर ने इतना ही कहा कि सैरंध्री को अपने कमरे में जाना चाहिए, और यह गंधर्व-पतियों का मामला है।

रात में द्रौपदी भीम के पास गईं, और वहीं तय हुआ कि कीचक चुपचाप मारा जाएगा — ताकि तेरहवाँ वर्ष न टूटे। भीम ने उसे नृत्यशाला के अँधेरे में पकड़ा और इतनी बुरी तरह कुचल दिया कि सुबह उसकी पहचान तक मुश्किल हो गई।

पहेली

मैं एक पेड़ था। मुझ पर हथियार बाँधे गए, और ऊपर एक शव लटका दिया गया ताकि कोई पास न आए। मैं क्या हूँ?

  • वट वृक्ष
  • शमी वृक्ष
  • अशोक वृक्ष
  • शिंशपा
पूरी कथा पढ़िए — जहाँ हथियार सोए रहे

हथियार छिपाना आसान नहीं था। गांडीव जैसा धनुष किसी संदूक में नहीं जाता।

पांडवों ने उन्हें शमी की ऊँची शाखाओं पर बाँधा और ऊपर एक शव बाँध दिया।

पास के गाँव वालों को बता दिया गया कि यह उनकी बूढ़ी माँ का शव है, जिसे कुल की रीति से पेड़ पर रखा गया है। इसके बाद कोई उस पेड़ के पास नहीं गया।

तेरहवें वर्ष के अंत में अर्जुन उसी पेड़ पर लौटते हैं और गांडीव समेत अपने अस्त्र निकाल लाते हैं। छिपना शमी से शुरू हुआ था, और शमी पर ही ख़त्म हुआ।

कौन हूँ मैं?

मैंने बड़ी-बड़ी बातें कीं, फिर सेना देखकर रथ से कूदकर भाग निकला। बाद में मैं उसी रथ का सारथी बना। मैं कौन हूँ?

  • अभिमन्यु
  • विराट
  • उत्तर
  • कीचक
पूरी कथा पढ़िए — भूमिकाएँ बदल गईं

उत्तर ने अंतःपुर में शेख़ी बघारी थी कि सारथी मिल जाए तो वे अकेले कौरवों को हरा देंगे।

द्रौपदी ने सुझाया कि बृहन्नला कभी अर्जुन के सारथी रह चुके हैं, इसलिए उन्हें ले जाया जाए।

सेना देखते ही उत्तर भागे, और बृहन्नला ने उन्हें चोटी से पकड़ लिया।

फिर दोनों की भूमिकाएँ बदल गईं — जो राजकुमार लड़ने चला था वह रथ हाँकने लगा, और जो नृत्य सिखाता था वह गांडीव उठाकर खड़ा हो गया।

ऐसा क्यों?

अर्जुन ने उत्तरा से विवाह करने से मना कर दिया। क्यों?

  • वे पहले से विवाहित थे
  • क्योंकि वे उसके गुरु रह चुके थे, इसलिए वह उनके लिए पुत्री जैसी थी
  • विराट ने शर्त रखी थी
  • क्योंकि उत्तरा ने मना कर दिया था
पूरी कथा पढ़िए — एक वर्ष का असर

विराट ने विवाह का प्रस्ताव कृतज्ञता में रखा था — अर्जुन ने उनका राज्य बचाया था।

अर्जुन ने कहा कि वे पूरे वर्ष उत्तरा के आचार्य रहे हैं, और अंतःपुर में उन्होंने उसे पुत्री की तरह देखा है।

इसके बाद उन्होंने प्रस्ताव अपने पुत्र अभिमन्यु के लिए स्वीकार किया।

इस विवाह का महत्व आगे बहुत बढ़ जाता है। अभिमन्यु कुरुक्षेत्र में मारे जाएँगे, और उत्तरा के गर्भ में पल रहा बच्चा ही वंश बचाएगा — परीक्षित, जिसका पुत्र जनमेजय पहले पर्व में यह कथा सुन रहा था।

किसने कहा?

"सैरंध्री के पति गंधर्व हैं, और वही इसका हिसाब लेंगे।" — कीचक-वध के बाद यह बात क्यों फैलाई गई?

  • ताकि किसी को शक न हो कि कीचक को भीम ने मारा है
  • क्योंकि यह सच थी
  • क्योंकि विराट ने ऐसा कहा था
  • क्योंकि द्रौपदी डर गई थीं
पूरी कथा पढ़िए — जिसे गंधर्व-वध कहा गया

कीचक का शरीर ऐसी हालत में मिला कि किसी मनुष्य का काम नहीं लगा।

द्रौपदी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए यह कह रखा था कि उनके पाँच गंधर्व पति हैं जो उनकी रक्षा करते हैं। यह उनका गढ़ा हुआ बहाना था, और कीचक-वध के बाद सबने उसे मान लिया।

इससे दो काम हुए — भेस बचा रहा, और द्रौपदी को कोई दोबारा छेड़ने की हिम्मत नहीं कर सका।

पर हस्तिनापुर में दुर्योधन ने ठीक उल्टा निष्कर्ष निकाला। उसने कहा कि ऐसा काम भीम के सिवा कौन कर सकता है — और वहीं से गायें हरने की योजना बनी।

सही क्रम

इन घटनाओं का सही क्रम कौन-सा है?

  • भेस बदलना → कीचक-वध → गायों का हरण → अर्जुन का प्रकट होना
  • गायों का हरण → कीचक-वध → भेस बदलना → अर्जुन का प्रकट होना
  • भेस बदलना → गायों का हरण → कीचक-वध → अर्जुन का प्रकट होना
  • कीचक-वध → भेस बदलना → अर्जुन का प्रकट होना → गायों का हरण
पूरी कथा पढ़िए — छोटा पर्व, तंग समय

विराट पर्व महाभारत के अपेक्षाकृत छोटे पर्वों में है, और उसकी पूरी कसावट एक ही शर्त से आती है — पहचाने गए तो फिर बारह वर्ष।

इसीलिए हर घटना समय से बँधी है। कीचक को चुपचाप मरना है। गायें तेरहवें वर्ष के अंत में हरी जाती हैं।

कौरवों की कोशिश यही थी कि पांडवों का पता अज्ञातवास की अवधि पूरी होने से पहले चल जाए।

पर गिनती में वह चूक गया। अर्जुन जब प्रकट हुए, वर्ष पूरा हो चुका था — और उसके बाद बात सीधे युद्ध पर आ गई।