कांड ७

उत्तरकांड

कहानी ख़त्म हो चुकी थी, फिर भी एक कांड बाक़ी था

रावण की कथा

अयोध्या लौटकर राम का राज्याभिषेक हुआ, और वह समय शुरू हुआ जिसे रामराज्य कहा जाता है।

पर उत्तरकांड आगे बढ़ने से पहले पीछे मुड़ता है।

ऋषि अगस्त्य राम को बैठाकर रावण की पूरी कथा सुनाते हैं — वह कथा, जो युद्ध के दौरान किसी ने नहीं पूछी थी।

रावण का वंश केवल राक्षसों का नहीं था।

वह ब्रह्मा के पुत्र पुलस्त्य का वंशज था, यानी उसके पिता की ओर से उसका संबंध ऋषि-कुल से था।

और लंका पर पहले उसका अधिकार नहीं था। वह उसके सौतेले भाई कुबेर के पास थी।

रावण ने कठोर तप किया और ब्रह्मा से वर पाया — देवता, गंधर्व, यक्ष, राक्षस, इनमें से कोई उसे न मार सके।

जिन जातियों से उसे ख़तरा लग सकता था, उसने एक-एक करके सब गिना दीं।

एक जाति उसने गिनाई ही नहीं।

मनुष्य।

वे उसे इतने मामूली लगे कि गिनने लायक़ नहीं समझा।

वर मिलने के बाद उसने कुबेर को युद्ध में हराकर लंका छीन ली।

पुष्पक विमान भी उसी हार में उसके हाथ आया — वही विमान, जो बरसों बाद राम को अयोध्या वापस ले गया।

और वह एक चूक, जो उसने वरदान माँगते समय की थी, आख़िर में उसकी मृत्यु का रास्ता बनी।

इसी हिस्से में हनुमान के बचपन की कथा भी आती है।

बालक हनुमान ने एक बार आकाश में सूरज देखा, और उसे फल समझकर पकड़ने के लिए छलाँग लगा दी।

और वह अकेली शरारत नहीं थी। वे ऋषियों के आश्रमों में घुसकर उनका सामान बिखेर देते, पूजा की चीज़ें उलट देते, यज्ञ की सामग्री तितर-बितर कर देते।

ऋषि परेशान थे।

पर उन्हें यह भी पता था कि ब्रह्मा और इंद्र के वरदानों से यह बालक अजेय है, और बड़ा दंड देने की न ज़रूरत है, न रास्ता।

तो उन्होंने एक छोटा-सा शाप दिया — हनुमान को अपनी शक्ति ख़ुद याद नहीं रहेगी। कोई याद दिलाएगा, तभी याद आएगी।

समुद्र के किनारे जांबवान ने यही किया था।

एक धोबी की बात

बरसों बीत गए।

राजा के गुप्तचर हर नगर में रहते थे। उनका काम यही था — गली-गली घूमकर सुनना कि लोग राजा के बारे में क्या कह रहे हैं, और वही लौटकर बता देना।

एक दिन उन्होंने जो बताया, वह अच्छा नहीं था।

नगर में इस बात पर चर्चा हो रही थी कि रानी इतने समय लंका में रहीं और राजा ने उन्हें वापस रख लिया।

और उसी चर्चा में एक बात यह भी थी कि एक धोबी ने अपनी पत्नी से झगड़ते हुए कह दिया था कि वह राम नहीं है, जो किसी और के घर रह आई स्त्री को वापस घर में रख ले।

राम ने पूछा कि क्या यह सिर्फ़ एक आदमी की बात है।

जवाब मिला कि नहीं।

लंका में उन्होंने कहा था कि वे चाहते हैं जवाब सबके सामने आए।

अब वही "सब" फिर बोल रहा था।

और इस बार अग्नि बीच में नहीं थी।

राम ने गर्भवती सीता को वन भेज देने का फ़ैसला किया।

राजा के रूप में उन्होंने प्रजा की बात को अपने घर से ऊपर रखा।

उसकी क़ीमत पति के रूप में उन्होंने नहीं, सीता ने चुकाई।

यह काम लक्ष्मण को सौंपा गया।

वे उन्हें रथ पर बिठाकर ले गए। रास्ते भर उन्होंने कुछ नहीं बताया।

सीता समझ रही थीं कि वे किसी आश्रम के दर्शन को जा रही हैं।

गंगा पार उतारने के बाद ही लक्ष्मण ने सच कहा।

और फिर रथ लेकर लौट गए।

सीता वहीं खड़ी रह गईं।

वाल्मीकि के आश्रम में

सीता को ऋषि वाल्मीकि के आश्रम में शरण मिली।

वहीं लव और कुश जन्मे, और वहीं बड़े हुए।

वाल्मीकि वही थे जिन्होंने वह कथा रची थी जिसे हम रामायण कहते हैं।

उन्होंने दोनों बालकों को वह पूरी कथा कंठस्थ करा दी, और दोनों उसे गाकर सुनाना सीख गए — बिना यह जाने कि वे किसकी कथा गा रहे हैं।

इसी बीच अयोध्या में एक और घटना हुई, जो इस कांड के सबसे कठिन प्रसंगों में गिनी जाती है।

एक ब्राह्मण अपने बेटे का शव लेकर राजदरबार आया। उसका कहना था कि राज्य में कुछ ग़लत हो रहा है, इसीलिए ऐसा हुआ।

राम को बताया गया कि शंबूक नाम का एक व्यक्ति तपस्या कर रहा है, और अपने वर्ण के हिसाब से उसे ऐसा करने का अधिकार नहीं है।

राम ने शंबूक को खोजा और उसका वध कर दिया।

यह प्रसंग सदियों से कड़ी आलोचना का विषय रहा है, और आज भी है।

कई विद्वान इसे उत्तरकांड की बाद की परत का हिस्सा मानते हैं।

पर जो पाठ हमें मिलता है, उसमें यह मौजूद है — इसीलिए इसे छिपाया नहीं गया।

लव और कुश

बरसों बाद अयोध्या में अश्वमेध यज्ञ हुआ।

राम ने दूसरा विवाह नहीं किया था।

उन्होंने यज्ञ के लिए सीता की सोने की प्रतिमा बनवाई, और वही अपने साथ रखी।

उसी यज्ञ में दो बालक आए और भरी सभा में वह कथा गाना शुरू किया।

वे गाते रहे। एक सर्ग के बाद दूसरा, दूसरे के बाद तीसरा।

सभा सुनती रही, और सुनते-सुनते चुप होती चली गई।

जो गाया जा रहा था, वह उन्हीं की कथा थी।

अयोध्या, वनवास, हरण, समुद्र, लंका — वह सब जो इसी सभा में बैठे लोगों ने जिया था, अब उनके सामने छंद में बाँधकर गाया जा रहा था।

और गाने वाले दो लड़के थे, जिन्हें कोई नहीं जानता था।

राम अपने ही जीवन को सुन रहे थे, किसी और की आवाज़ में।

और फिर उन्होंने चेहरे देखे।

दोनों लड़कों की उम्र वही थी जितनी होनी चाहिए थी।

और उनकी शक्ल वैसी थी जैसी होनी चाहिए थी।

राम ने पहचान लिया कि ये उन्हीं के पुत्र हैं।

धरती में

सीता को बुलाया गया।

राम ने कहा कि वे सबके सामने एक बार अपनी शुद्धता की शपथ ले लें, और उसके बाद सब ठीक हो जाएगा।

सीता आईं।

उन्होंने शपथ ली।

और फिर लौटने से इनकार कर दिया।

उन्होंने धरती को पुकारा — अगर मैंने राम के सिवा किसी और के बारे में नहीं सोचा, तो धरती माँ मुझे अपने भीतर ले लें।

धरती फटी।

एक सिंहासन ऊपर आया, और उस पर धरती स्वयं बैठी थीं।

उन्होंने सीता को गोद में लिया।

और दोनों नीचे उतर गईं।

धरती फिर बंद हो गई।

राम वहीं खड़े रह गए।

यह वही आदमी था जिसने समुद्र पर सेतु बँधवाया था, रावण को मारा था, और चौदह साल का वनवास बिना शिकायत काटा था।

इस बार उनके पास कोई अस्त्र नहीं था, और सामने कोई शत्रु नहीं था।

कहानी यहीं ख़त्म होती है — जीत के साथ नहीं, एक ख़ालीपन के साथ।

टिप्पणी: रावण का पूर्व-वृत्तांत, हनुमान का शाप (सर्ग ३६ — सर्ग का शीर्षक ही "ऋषियों द्वारा हनुमान को शाप" है), सीता का वनवास, शंबूक-वध, लव-कुश, सोने की प्रतिमा (सर्ग ९१, राम के अपने शब्दों में) और सीता का धरती में समाना — सब वाल्मीकि के उत्तरकांड में हैं। पर उत्तरकांड ही वह कांड है जिसे कई आधुनिक विद्वान बालकांड के साथ बाद की परत मानते हैं, और इस पर बहस आज भी चल रही है। यानी इस कांड की हर बात के बारे में यही कहना ठीक है: प्राप्त वाल्मीकि पाठ में है, उस कांड में जिसकी प्राचीनता पर विवाद है। गुप्तचर भद्र नगर भर में फैली चर्चा की ख़बर देता है (सर्ग ४२–४३); धोबी की बात उसी में एक उदाहरण है, अकेला कारण नहीं। और शाप ऋषियों ने जान-बूझकर छोटा दिया था, क्योंकि ब्रह्मा और इंद्र के वरदानों के आगे बड़ा दंड न ज़रूरी था न संभव।

स्रोत: वाल्मीकि रामायण, उत्तरकांड

अब बताइए — कितना याद रहा?

कौन हूँ मैं?

मैं वह कवि हूँ जिसने यह कथा रची — और फिर कथा के पात्र मेरे ही आश्रम में रहने आ गए। मैं कौन हूँ?

  • व्यास
  • अगस्त्य
  • वशिष्ठ
  • वाल्मीकि
पूरी कथा पढ़िए — कथा के भीतर कथा

रामायण की सबसे असाधारण बात यह है कि उसका रचयिता ख़ुद उसका पात्र है।

वाल्मीकि सिर्फ़ कथा लिखते नहीं — वे सीता को शरण देते हैं, लव-कुश को पालते हैं, उन्हें कथा सिखाते हैं, और अंत में राम की सभा में जाकर सीता की सच्चाई की गवाही देते हैं।

यानी जो कथा सुनाई जा रही है, वह उसी आदमी की लिखी है जो उस कथा के अंत में खड़ा है।

रामायण को इसीलिए "आदिकाव्य" कहा जाता है — पहला काव्य, और अपने रचयिता को अपने भीतर रखने वाला।

पहेली

हम दो थे। हमने भरी सभा में वह कथा गाई जिसमें हम ख़ुद थे — और सामने बैठा राजा हमारा पिता निकला। हम कौन हैं?

  • नल और नील
  • लव और कुश
  • खर और दूषण
  • बालि और सुग्रीव
पूरी कथा पढ़िए — गाने वाले दो बालक

लव और कुश आश्रम में पले, और उन्हें पता नहीं था कि वे किसके पुत्र हैं।

वाल्मीकि ने उन्हें पूरी रामायण कंठस्थ करा दी थी — चौबीस हज़ार श्लोक, वीणा के साथ गाने के लिए।

अश्वमेध यज्ञ में वे ऋषियों के बीच बैठकर गाने लगे। सभा सुनती रह गई। राम ने उन्हें सोना देना चाहा, पर उन्होंने लेने से मना कर दिया — आश्रम में रहने वालों को सोने का क्या काम।

राम को शक तब हुआ जब उन्होंने देखा कि दोनों बालक हूबहू उन्हीं जैसे दिखते हैं। तब उन्होंने वाल्मीकि के पास संदेश भेजा।

तथ्य

उत्तरकांड में सीता अंततः कहाँ गईं?

  • अयोध्या में ही रह गईं
  • वन में लौट गईं
  • धरती में समा गईं
  • स्वर्ग चली गईं
पूरी कथा पढ़िए — आख़िरी सभा

राम ने वाल्मीकि से कहा कि सीता सभा में आकर शपथ लें, तब वे उन्हें स्वीकार करेंगे।

वाल्मीकि ने ख़ुद खड़े होकर कहा कि सीता निर्दोष हैं, और उनकी गवाही काफ़ी होनी चाहिए। राम ने कहा कि उन्हें भी यही विश्वास है, पर लोक को दिखाना ज़रूरी है।

सीता आईं, ज़मीन की ओर देखते हुए खड़ी हुईं, और कहा कि अगर उन्होंने मन-वचन-कर्म से राम के सिवा किसी को नहीं जाना, तो धरती माता उन्हें अपने भीतर ले लें।

धरती फटी, सिंहासन के साथ धरती की देवी ऊपर आईं, सीता को गोद में लिया, और नीचे चली गईं। सभा देखती रह गई।

कौन हूँ मैं?

लंका पहले मेरी थी। मेरे ही सौतेले भाई ने वह मुझसे छीन ली, और मुझे उत्तर जाकर बसना पड़ा। मैं कौन हूँ?

  • कुबेर
  • विभीषण
  • मय
  • सुमाली
पूरी कथा पढ़िए — लंका किसकी थी

लंका मूल रूप से विश्वकर्मा की बनाई नगरी थी, और राक्षसों के पास थी। विष्णु के डर से राक्षस पाताल चले गए और नगरी ख़ाली पड़ी रही।

फिर ब्रह्मा ने वह अपने वंशज कुबेर को दे दी। कुबेर वहाँ बसे और धन के स्वामी कहलाए।

रावण उन्हीं का सौतेला भाई था। तप से वर पाने के बाद उसने कुबेर को ललकारा और युद्ध में हराकर लंका पर अधिकार कर लिया। उसी हार में पुष्पक विमान भी उसके हाथ आया।

कुबेर उत्तर की ओर चले गए और अलकापुरी बसाई। यानी जिस विमान से राम अयोध्या लौटे, वह असल में कुबेर का था — और युद्ध के बाद विभीषण ने वह राम को दिया।

ऐसा क्यों?

बड़े होकर हनुमान अपनी असली शक्ति भूल गए थे। ऐसा क्यों हुआ?

  • क्योंकि ऋषियों ने शाप दिया था कि याद दिलाने पर ही उन्हें अपनी शक्ति याद आएगी
  • क्योंकि उन्हें चोट लगी थी
  • क्योंकि उन्होंने ख़ुद यह वरदान माँगा था
  • क्योंकि इंद्र ने उनकी शक्ति छीन ली थी
पूरी कथा पढ़िए — सूरज को फल समझना

बालक हनुमान ने उगते सूरज को पका हुआ फल समझा और उसे पकड़ने आकाश में उछल पड़े।

इंद्र ने वज्र मारा। हनुमान गिरे और उनकी ठुड्डी टूट गई — "हनु" यानी ठुड्डी, और वहीं से नाम पड़ा।

वायु देव नाराज़ हो गए और उन्होंने संसार की हवा रोक दी। देवताओं को मनाना पड़ा, और सबने बालक को वरदान दिए।

पर वह बालक इतना शरारती था कि ऋषियों का जीना मुश्किल हो गया। तब उन्होंने हल्का-सा शाप दिया — तुम अपनी शक्ति भूल जाओगे, और तभी याद आएगी जब कोई याद दिलाए।

इसीलिए किष्किंधाकांड के अंत में जांबवान को हनुमान की शक्ति उन्हें गिना-गिनाकर बतानी पड़ती है।

क्या हुआ?

नगर में हुई बात के बाद राम ने क्या किया?

  • उन्होंने धोबी को दंड दिया
  • उन्होंने गर्भवती सीता को वन भेज दिया
  • उन्होंने सभा बुलाकर सफ़ाई दी
  • उन्होंने राजपाट छोड़ दिया
पूरी कथा पढ़िए — लक्ष्मण के लिए सबसे कठिन दिन

राम ने चारों भाइयों को बुलाकर बात बताई और लक्ष्मण को यह काम सौंपा।

सीता से कहा गया कि उन्हें ऋषियों के आश्रम घुमाने ले जाया जा रहा है। वे ख़ुश थीं — उन्होंने ऋषि-पत्नियों के लिए उपहार तक बाँधे।

गंगा पार करने के बाद लक्ष्मण ने उन्हें सच बताया और फिर रो पड़े। सीता बेहोश हो गईं।

होश आने पर उन्होंने लक्ष्मण से कहा कि वे राम के लिए कोई शिकायत लेकर नहीं जा रही हैं, और उन्हें यह संदेश दे दें कि वे राजा का धर्म निभा रहे हैं। फिर लक्ष्मण लौट आए।

वाल्मीकि या परंपरा?

उत्तरकांड के बारे में कई आधुनिक विद्वान क्या मानते हैं?

  • कि यह रामायण का सबसे पुराना हिस्सा है
  • कि यह वाल्मीकि ने सबसे पहले लिखा
  • कि यह असल में महाभारत का हिस्सा है
  • कि यह बाद में जोड़ी गई परत हो सकती है
पूरी कथा पढ़िए — बहस किस बात पर है

रामायण के बीच के पाँच कांड — अयोध्या से युद्ध तक — शैली में एक जैसे चलते हैं। बालकांड और उत्तरकांड को लेकर विद्वानों में लंबे समय से बहस है।

तर्क कई हैं: भाषा का अंतर, कथा का ढाँचा, और यह भी कि युद्धकांड के अंत में कथा स्वाभाविक रूप से पूरी हो जाती है।

दूसरी ओर, उत्तरकांड के बिना कई चीज़ें अधूरी रह जाती हैं — रावण की पृष्ठभूमि, हनुमान का बचपन, और सीता का अंत।

हमने इसे इसलिए रखा है कि यह परंपरा का हिस्सा है, और इसलिए अलग बताया है कि पाठक जान सके कि बहस मौजूद है। यही इस साइट का तरीक़ा है — छिपाना नहीं, बता देना।

तथ्य

अश्वमेध यज्ञ में राम के साथ क्या रखा गया था, क्योंकि उन्होंने दूसरा विवाह नहीं किया था?

  • सीता की सोने की प्रतिमा
  • सीता का चित्र
  • खड़ाऊँ
  • चूड़ामणि
पूरी कथा पढ़िए — सोने की सीता

सीता वन में थीं, और यज्ञ अयोध्या में हो रहा था।

राम ने दूसरा विवाह नहीं किया। उन्होंने सीता की सोने की प्रतिमा बनवाई, और यज्ञ उसी के साथ हुआ।

पाठ यह प्रतिमा राम के अपने शब्दों में रखता है — यह उनका निर्णय था, किसी की सलाह नहीं।

यह छोटी-सी बात उत्तरकांड की सबसे कड़ी विडंबना है — जिसे सभा से निकाल दिया गया, यज्ञ उसी के बिना पूरा नहीं हो सकता था।

किसने कहा?

"मैंने राम के सिवा किसी को नहीं जाना — अगर यह सच है, तो धरती माता मुझे अपने भीतर ले लें।" — यह किसने कहा?

  • कौसल्या
  • मंदोदरी
  • सीता
  • तारा
पूरी कथा पढ़िए — लौटने से इनकार

इस दृश्य में सबसे अहम बात यह है कि सीता शपथ लेने से मना नहीं करतीं — वे लौटने से मना करती हैं।

राम ने कहा था कि शपथ के बाद वे उन्हें स्वीकार कर लेंगे। सीता ने शपथ ली, पर उसी शपथ को अपने जाने का रास्ता बना लिया।

वाल्मीकि लिखते हैं कि सभा में मौजूद ऋषि, राजा और नागरिक — सब स्तब्ध रह गए। राम भी।

यह रामायण का अकेला ऐसा क्षण है जहाँ राम कुछ रोक नहीं पाते।

सही क्रम

इन घटनाओं का सही क्रम कौन-सा है?

  • लव-कुश का गाना → सीता का वनवास → अश्वमेध → सीता का धरती में समाना
  • सीता का वनवास → अश्वमेध → सीता का धरती में समाना → लव-कुश का गाना
  • अश्वमेध → सीता का वनवास → लव-कुश का गाना → सीता का धरती में समाना
  • सीता का वनवास → अश्वमेध → लव-कुश का गाना → सीता का धरती में समाना
पूरी कथा पढ़िए — कहानी अपने पास लौटती है

उत्तरकांड की बनावट गोल है। जो कथा शुरू हुई थी एक राजा के पुत्र न होने से, वह ख़त्म होती है उसी राजा के पुत्रों के उसकी कथा गाने से।

बीच में जो कुछ हुआ — वनवास, अपहरण, युद्ध — वह सब अब एक गीत बन चुका है, जो दो बालक वीणा पर गा रहे हैं।

और जिस स्त्री के बारे में वह गीत है, वह सभा में बैठकर उसे सुन रही है।

रामायण अपनी ही कथा को अपने भीतर सुनाकर ख़त्म होती है।