
अध्याय १०
कल्कि
इकलौता अवतार जिसकी कोई कथा नहीं है — सिर्फ़ एक वर्णन है
जो अभी हुआ ही नहीं
बाक़ी नौ के साथ कुछ न कुछ घटा है। कोई पानी में उतरा, कोई खंभे से निकला, कोई तीन पग चला।
दसवें के साथ कुछ नहीं घटा।
कल्कि की कोई कथा नहीं है — सिर्फ़ एक वर्णन है, भविष्य में रखा हुआ।
इसीलिए यह अध्याय बाक़ी सबसे छोटा है, और होना भी चाहिए।
ग्रंथ क्या बताते हैं
विष्णु पुराण और भागवत पुराण, दोनों में यह वर्णन आता है।
एक समय आएगा जब बात कम और दिखावा ज़्यादा होगा, जब जिसके पास ज़्यादा होगा वही ठीक माना जाएगा, और जब वचन का कोई मोल नहीं रहेगा।
उसी समय के आख़िर में, शंभल नाम के गाँव में, एक ब्राह्मण के घर एक जन्म होगा।
सफ़ेद घोड़ा
वर्णन में तीन चीज़ें बार-बार आती हैं: एक सफ़ेद घोड़ा, हाथ में एक तलवार, और एक युग का ख़त्म होना।
यह अवतार समझाने नहीं आता, न माँगने, न उठाने।
वह एक हिसाब बंद करने आता है, ताकि गिनती दोबारा शुरू हो सके।
और फिर से
और यहीं यह सूची गोल हो जाती है।
क्योंकि युग ख़त्म होने के बाद फिर वही शुरू होता है जो हर बार शुरू होता आया है — सत्ययुग, गिनती का फिर से पहले पायदान पर लौटना।
पहला अध्याय एक प्रलय के बाद दोबारा शुरुआत का है। आख़िरी अध्याय एक युग के बाद दोबारा शुरुआत का है। दोनों एक ही ढाँचे के हैं, एक ही घटना नहीं।
टिप्पणी: कल्कि का वर्णन विष्णु पुराण (चौथे अंश के अंत में, कलियुग के वर्णन के साथ) और भागवत पुराण (बारहवाँ स्कंध) में मिलता है। इसे कथा कहना ठीक नहीं होगा — यह भविष्य में रखा गया वर्णन है, और उसमें घटनाएँ नहीं, संकेत हैं: शंभल गाँव, ब्राह्मण कुल में जन्म, सफ़ेद घोड़ा, तलवार, और युग का अंत। इस अध्याय को जान-बूझकर छोटा रखा गया है, क्योंकि ग्रंथों में इससे ज़्यादा है ही नहीं, और जो नहीं है उसे गढ़ना इस साइट का तरीक़ा नहीं।
स्रोत: कई ग्रंथों से, कल्कि