अध्याय ८

कृष्ण

यह अवतार जानता था कि वह कौन है — और यही सबसे बड़ा फ़र्क़ है

तीसरा जन्म

जय और विजय का शाप तीन जन्मों का था।

पहला जन्म हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु का था — वराह और नरसिंह वाले अध्याय।

दूसरा रावण और कुंभकर्ण का — रामायण।

तीसरा शिशुपाल और दंतवक्र का, और वह कृष्ण के समय में पूरा हुआ।

यानी जो सिलसिला वराह से शुरू हुआ था, वह यहाँ आकर बंद होता है।

वही ढाँचा, फिर से

मथुरा में एक राजा था जिसे उसकी मौत की शर्त बता दी गई थी।

उसने वही किया जो पहले हिरण्यकशिपु ने किया था और जो आगे कई करेंगे — रास्ता बंद करने की कोशिश। पहरा, गिनती, और हर जन्म पर वही दरवाज़ा।

और वही हुआ जो हर बार होता है: बचने की कोशिश ही वह रास्ता बन गई जिससे अंत आया।

जो फ़र्क़ है

पर एक बात राम से बिलकुल अलग है।

राम कथा के भीतर कभी नहीं कहते कि वे कौन हैं। कृष्ण कहते हैं।

वे रथ पर खड़े होकर अर्जुन से कहते हैं, और वह पूरा प्रसंग महाभारत में गीता के नाम से अलग से खड़ा है।

इसीलिए यह अवतार बाक़ी सबसे अलग पढ़ा जाता है — यहाँ कथा के भीतर का आदमी ख़ुद बताता है कि वह क्या है।

बाक़ी कथा कहाँ है

बचपन, गोकुल, कालिया, गोवर्धन, मथुरा, द्वारका — यह सब इसी साइट पर कृष्ण-लीला में है, अठारह अध्यायों में।

और कुरुक्षेत्र वाला हिस्सा महाभारत में।

यह अध्याय उन्हें दोहराता नहीं। यह सिर्फ़ बताता है कि वे इस सूची में कहाँ बैठते हैं।

टिप्पणी: कृष्ण को दशावतार में आठवाँ माना जाता है, और उनकी पूरी कथा इस साइट पर कृष्ण-लीला में अलग से है — इसलिए यह अध्याय उसे दोहराता नहीं। विष्णु पुराण का पाँचवाँ अंश पूरा कृष्ण-कथा है। ध्यान देने लायक़ फ़र्क़ यह है कि महाभारत में कृष्ण का बचपन नहीं है; वह हरिवंश और भागवत पुराण के दसवें स्कंध में आता है, यानी बाद की परत में। जय-विजय वाला तीन जन्मों का ढाँचा भागवत का है। दशावतार की सूची में सबसे ज़्यादा फ़र्क़ नौवें स्थान पर है, जहाँ कुछ सूचियों में बुद्ध की जगह बलराम आते हैं।

स्रोत: कई ग्रंथों से, कृष्ण

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

दस अवतारों की प्रचलित सूची में कृष्ण का स्थान कौन-सा है?

  • सातवाँ
  • नौवाँ
  • दसवाँ
  • आठवाँ
पूरी कथा पढ़िए — आठवाँ, और आठवाँ

एक संयोग ध्यान देने लायक़ है — कृष्ण सूची में आठवें अवतार हैं, और देवकी की आठवीं संतान भी।

यह संयोग ग्रंथों का दावा नहीं है, पर परंपरा में इसे बार-बार दोहराया जाता है।

कृष्ण-लीला का पहला अध्याय उसी आठवीं संतान वाली भविष्यवाणी से शुरू होता है।

कौन हूँ मैं?

मैं जय और विजय के शाप का तीसरा और आख़िरी जन्म हूँ, और मेरा अंत कृष्ण के हाथों हुआ। मैं कौन हूँ?

  • रावण
  • हिरण्यकशिपु
  • कंस
  • शिशुपाल
पूरी कथा पढ़िए — शृंखला बंद हुई

भागवत के अनुसार जय और विजय ने सात जन्म भक्त बनने के बजाय तीन जन्म शत्रु बनना चुना था, क्योंकि उसमें लौटने में कम समय लगता।

तीनों जन्म इसी साइट पर बँटे हुए हैं — पहला विष्णु-पुराण में, दूसरा रामायण में, तीसरा कृष्ण-लीला और महाभारत में।

इसीलिए यह ढाँचा इस साइट के लिए ख़ास है: वह तीन अलग महाकाव्यों को एक ही धागे से बाँध देता है।

ऐसा क्यों?

कृष्ण और राम के अवतार में सबसे बड़ा फ़र्क़ क्या माना जाता है?

  • कृष्ण के पास हथियार थे, राम के पास नहीं
  • राम कथा के भीतर कभी अपने विष्णु होने का दावा नहीं करते, कृष्ण करते हैं
  • राम की कथा लंबी है, कृष्ण की छोटी
  • कृष्ण देवता हैं और राम मनुष्य
पूरी कथा पढ़िए — जो कहा गया, और जो नहीं

यह फ़र्क़ कथा-शिल्प का है, और बहुत बड़ा है। राम की कथा बाहर से देखी जाती है — पाठक जानता है, पात्र नहीं।

कृष्ण की कथा में वह पर्दा हटा दिया जाता है। वे ख़ुद बताते हैं, और सुनने वाला उसी रथ पर खड़ा होता है।

इसीलिए राम की कथा एक जीवन की तरह पढ़ी जाती है, और कृष्ण की कथा में एक हिस्सा ऐसा है जो सीधे पाठक से बात करता है।

तथ्य

कृष्ण की बाल-लीलाएँ किस ग्रंथ में सबसे विस्तार से मिलती हैं?

  • महाभारत में
  • भागवत पुराण के दसवें स्कंध में
  • ऋग्वेद में
  • रामायण में
पूरी कथा पढ़िए — बचपन, जो बाद में जुड़ा

महाभारत में कृष्ण एक राजनीतिज्ञ, सारथी और सलाहकार हैं। माखन, गोकुल, गोपियाँ — इनमें से कुछ भी वहाँ नहीं है।

वह पूरा बचपन हरिवंश में आता है, जिसे महाभारत का परिशिष्ट कहा जाता है, और फिर भागवत पुराण के दसवें स्कंध में उसका सबसे विस्तृत रूप मिलता है।

यानी जिस कृष्ण को आज सबसे ज़्यादा जाना जाता है — बंसी और माखन वाले — वह कथा की बाद की परत है, और यह इस गाथा में बार-बार दिखने वाले ढाँचे का ही एक और उदाहरण है।

क्या हुआ?

जय-विजय के शाप का दूसरा जन्म कौन-सा था?

  • रावण और कुंभकर्ण
  • शिशुपाल और दंतवक्र
  • कंस और जरासंध
  • हिरण्याक्ष और हिरण्यकशिपु
पूरी कथा पढ़िए — तीन जन्म, तीन महाकाव्य

पहला जन्म वराह और नरसिंह वाले अध्यायों में है — इसी गाथा में।

दूसरा रामायण में, जहाँ दोनों भाई लंका में हैं।

तीसरा कृष्ण के समय में। इस साइट पर तीनों पढ़े जा सकते हैं, और वही एक शाप उन्हें आपस में जोड़ता है।

पहेली

मैं एक रथ पर खड़ा था, युद्ध शुरू होने से ठीक पहले, और मैंने वह कहा जो इस सूची में किसी और अवतार ने नहीं कहा। मैं कौन हूँ?

  • राम
  • परशुराम
  • वामन
  • कृष्ण
पूरी कथा पढ़िए — रथ पर कही गई बात

महाभारत के भीष्म पर्व में वह प्रसंग आता है जिसे अलग से गीता कहा जाता है — युद्ध रुका हुआ है, और सारथी अपने रथी से बात कर रहा है।

यही वह जगह है जहाँ अवतार अपने बारे में ख़ुद बताता है, और यही उसे बाक़ी नौ से अलग करता है।

इस साइट पर वह हिस्सा महाभारत में है, भीष्म पर्व वाले अध्याय में।

किसने कहा?

"बचने की कोशिश ही वह रास्ता बन गई जिससे अंत आया" — यह ढाँचा इस गाथा में किन-किन के साथ दोहराया है?

  • हिरण्यकशिपु, रावण और कंस
  • सिर्फ़ कंस के साथ
  • सिर्फ़ रावण के साथ
  • किसी के साथ नहीं
पूरी कथा पढ़िए — एक ही ढाँचा, तीन बार

हिरण्यकशिपु ने वरदान में हर रास्ता बंद किया, और उन्हीं शर्तों के बीच से अंत आया।

रावण ने मनुष्य और वानर को गिना नहीं, और वही दोनों सामने आए।

कंस ने पहरा दोगुना किया, गिनती रखी, और उसी गिनती के आठवें पर वह बच निकला जिससे डर था। तीनों बार बचाव ख़ुद रास्ता बन गया।

ऐसा क्यों?

इस गाथा में कृष्ण को भी सिर्फ़ एक अध्याय क्यों दिया गया है?

  • क्योंकि उनकी पूरी कथा इसी साइट पर कृष्ण-लीला में अलग से है, अठारह अध्यायों में
  • क्योंकि उनकी कथा कम ज़रूरी है
  • क्योंकि विष्णु पुराण में उनकी कथा नहीं है
  • क्योंकि उनकी कथा किसी एक ग्रंथ में नहीं मिलती
पूरी कथा पढ़िए — दोहराने से बचना

विष्णु पुराण का पाँचवाँ अंश पूरा कृष्ण की कथा है — यानी अगर यह गाथा उस ग्रंथ को शब्दशः निभाती, तो यहाँ अठारह अध्याय दोबारा लिखने पड़ते।

वही कथा इस साइट पर पहले से है, अपने सारे स्रोत-भेदों के साथ।

इसलिए यह अध्याय एक दरवाज़ा है, दीवार नहीं — ठीक वैसे ही जैसे पिछला अध्याय राम के लिए था।

ग्रंथ असहमत

कुछ सूचियों में कृष्ण के आसपास क्या फ़र्क़ मिलता है?

  • कृष्ण को सूची से बाहर रखा जाता है
  • कृष्ण को दसवाँ अवतार कहा जाता है
  • कुछ सूचियों में बलराम को भी अवतार गिना जाता है, और कहीं-कहीं बुद्ध की जगह वही आते हैं
  • कृष्ण को पहला अवतार कहा जाता है
पूरी कथा पढ़िए — सूची, जो हिलती रहती है

दशावतार की सूची तय दिखती है, पर है नहीं। सबसे बड़ा फ़र्क़ नौवें स्थान पर मिलता है, जहाँ कहीं बुद्ध हैं और कहीं बलराम।

भागवत पुराण तो दस पर रुकता ही नहीं — वह बाईस अवतार गिनाता है, और कहता है कि गिनती इससे भी आगे जा सकती है।

इसीलिए इस गाथा में सबसे प्रचलित सूची ली गई है, यह कहकर कि वह इकलौती नहीं है। अगला अध्याय ठीक उसी विवाद वाले स्थान पर है।

सही क्रम

जय-विजय के तीनों जन्मों का सही क्रम क्या है?

  • रावण-कुंभकर्ण → हिरण्याक्ष-हिरण्यकशिपु → शिशुपाल-दंतवक्र
  • शिशुपाल-दंतवक्र → रावण-कुंभकर्ण → हिरण्याक्ष-हिरण्यकशिपु
  • हिरण्याक्ष-हिरण्यकशिपु → रावण-कुंभकर्ण → शिशुपाल-दंतवक्र
  • हिरण्याक्ष-हिरण्यकशिपु → शिशुपाल-दंतवक्र → रावण-कुंभकर्ण
पूरी कथा पढ़िए — एक धागा, तीन युग

यह क्रम इस साइट पर तीन अलग-अलग जगहों से होकर गुज़रता है, और हर बार वही दो लौटते हैं।

हर जन्म में वे विष्णु के सामने पड़ते हैं और हर बार हारते हैं — और कथा के अनुसार यही उनका चुना हुआ रास्ता था, क्योंकि इसमें लौटना जल्दी होता।

यह ढाँचा भागवत का है, और यह अकेला ऐसा सूत्र है जो इस साइट के तीन महाकाव्यों को एक साथ बाँधता है।