अध्याय ३

जंगल में एक पुकार

एक शिकार, एक पुकार, और एक क्षण की भूल — जिसने एक तपस्वी का तप तोड़ दिया, और एक राजा से उसका पूरा राज्य माँगा

एक ऐसा राज

हरिश्चंद्र त्रेता युग के राजर्षि थे, अयोध्या के राजा। पाठ कहता है कि उनके राज में न अकाल पड़ता था, न रोग फैलता था, न कोई असमय मरता था। प्रजा धर्म में लगी थी, और राजा सत्य के लिए जाने जाते थे।

उनकी पत्नी शैव्या थी, और बेटा रोहिताश्व — अभी एक बच्चा। यह ऐतरेय ब्राह्मण के उस बड़े रोहित से अलग है, जो जंगल भाग गया था; दोनों में केवल नाम मिलता है।

पुकार

एक दिन राजा हिरण का पीछा करते हुए जंगल में बहुत भीतर चले गए। तभी उन्हें स्त्रियों की पुकार सुनाई दी — जैसे कोई बचाओ, बचाओ कह रहा हो। उस पुकार का संबंध पास ही तप कर रहे विश्वामित्र की साधना से था।

राजा उस ओर दौड़े। उन्होंने पुकारा कि मेरे राज में कौन किसी को सताता है? और उसी क्षण विघ्नराज — बाधाओं का एक रौद्र स्वामी — राजा के भीतर समा गया।

विघ्नराज के असर में हरिश्चंद्र ने विश्वामित्र पर क्रोध बरसाया। तपस्वी का तप डोल गया, और वह क्रोध से काँपता हुआ उठ खड़ा हुआ।

पैरों में

राजा को होश आया, तो सामने एक ऋषि खड़े थे जिनकी वर्षों की साधना बिखर चुकी थी। हरिश्चंद्र काँप उठे। उन्होंने विश्वामित्र के पैर पकड़ लिए और गिड़गिड़ाकर कहा कि भूल हो गई है; जो आप कहें, मैं दूँगा।

विश्वामित्र ने माँगा: राज्य, कोष, सेना, पूरी पृथ्वी — सब कुछ, बस पत्नी, बेटे और अपने धर्म को छोड़कर।

राजा ने बिना झिझके कहा: दिया।

देवी भागवत की शुरुआत

देवी भागवत यही आरंभ दूसरी तरह कहता है। वहाँ हरिश्चंद्र को एक रोती हुई स्त्री मिलती है, जो अपना नाम सिद्धरूपिणी बताती है और कहती है कि विश्वामित्र उसे प्राप्त करने के लिए घोर तप कर रहे हैं। राजा ऋषि से कहते हैं कि मेरे राज्य में ऐसा भयंकर तप नहीं होना चाहिए जो प्रजा को कष्ट दे।

विश्वामित्र भड़क उठते हैं। वसिष्ठ से अपनी पुरानी होड़ याद करके वे बदला लेने की ठानते हैं, और एक विशाल सूअर रचकर हरिश्चंद्र के वनों को उजाड़ने भेज देते हैं। बाद में एक तीर्थ के घाट पर वे माया से एक ब्राह्मण-युवक का ब्याह रचते हैं, और राजा से उसकी दक्षिणा में पूरा राज्य माँग लेते हैं।

दोनों ग्रंथ एक ही जगह पहुँचते हैं: एक तपस्वी के सामने राज्य दे चुका राजा।

टिप्पणी: यह प्रसंग मार्कंडेय पुराण (अध्याय ७) में और देवी भागवत (७.१८–१९) में आता है, और दोनों इसे अलग-अलग ढंग से कहते हैं। मार्कंडेय में राजा शिकार में स्त्रियों की पुकार सुनकर दौड़ते हैं, और "विघ्नराज" नाम की रौद्र बाधा उनमें समा जाती है, जिससे वे विश्वामित्र पर बरस पड़ते हैं। देवी भागवत में एक रोती हुई स्त्री अपना नाम सिद्धरूपिणी (सफलता का रूप) बताती है और कहती है कि विश्वामित्र उसे पाने के लिए तप कर रहे हैं; राजा तप का विरोध करते हैं, ऋषि सूअर रचकर बदला लेते हैं, और बाद में माया से रचे गए एक ब्याह के बहाने राजा से राज्य माँग लेते हैं। इस साइट ने दोनों रूप रखे हैं और किसी को दूसरे से "ठीक" नहीं कहा। विघ्नराज को पाठ में केवल इसी नाम से कहा गया है; यहाँ उसके बारे में इससे आगे कुछ नहीं जोड़ा गया। संवादों में दिए गए हिंदी वाक्य मूल संस्कृत के प्रवाहमय भावार्थ हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।

स्रोत: ऐतरेय ब्राह्मण, मार्कंडेय पुराण और देवी भागवत से, जंगल में एक पुकार

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

मार्कंडेय पुराण में हरिश्चंद्र के राज्य के बारे में क्या कहा गया है?

  • वहाँ हर साल अकाल पड़ता था
  • वहाँ राजा के डर से कोई कुछ नहीं कहता था
  • वहाँ न अकाल था, न रोग, न असमय मृत्यु
  • वहाँ राजा ने यज्ञ बंद करा दिए थे
पूरी कथा पढ़िए — एक आदर्श राज

मार्कंडेय पुराण हरिश्चंद्र को त्रेता का राजर्षि कहता है।

उनके राज में न अकाल पड़ता था, न रोग, न असमय मृत्यु।

इसी शांत राज पर आगे की परीक्षा टूटती है।

क्या हुआ?

जंगल में शिकार करते हुए हरिश्चंद्र ने क्या सुना?

  • स्त्रियों की पुकार
  • सिंह की दहाड़
  • नारद की वीणा
  • वरुण की आवाज़
पूरी कथा पढ़िए — हिरण का पीछा, और एक पुकार

राजा हिरण के पीछे भागते हुए जंगल में बहुत भीतर आ गए।

तभी स्त्रियों की पुकार सुनाई दी, और वे उसी ओर दौड़े।

उस पुकार का संबंध पास ही तप कर रहे विश्वामित्र की साधना से था।

ग्रंथ असहमत

मार्कंडेय पुराण और देवी भागवत हरिश्चंद्र के झगड़े की शुरुआत कैसे बताते हैं?

  • दोनों बिल्कुल एक जैसे बताते हैं
  • मार्कंडेय में सूअर है, देवी भागवत में विघ्नराज
  • किसी में झगड़ा है ही नहीं
  • मार्कंडेय में विघ्नराज राजा में समा जाता है; देवी भागवत में राजा तप का विरोध करता है और ऋषि सूअर भेजते हैं
पूरी कथा पढ़िए — एक शुरुआत, दो रूप

मार्कंडेय पुराण में विघ्नराज नाम की रौद्र बाधा राजा में समा जाती है।

देवी भागवत में राजा ख़ुद तप का विरोध करता है, और विश्वामित्र सूअर रचकर बदला लेते हैं।

दोनों जगह अंत एक ही है: राज्य ऋषि के हाथ में।

कौन हूँ मैं?

मैं बाधाओं का रौद्र स्वामी हूँ। जब हरिश्चंद्र पुकार की ओर दौड़े, तब मैं उनके भीतर समा गया, और उनका क्रोध एक तपस्वी पर टूटा। मैं कौन हूँ?

  • यम
  • विघ्नराज
  • वरुण
  • सिद्धरूपिणी
पूरी कथा पढ़िए — भीतर समा जाने वाली बाधा

मार्कंडेय पुराण में विघ्नराज नाम की एक रौद्र बाधा राजा के भीतर समा जाती है।

उसी के असर में राजा विश्वामित्र पर क्रोध बरसाते हैं।

कथा इसे राजा का सामान्य स्वभाव नहीं, एक क्षण की भूल की तरह दिखाती है।

किसने कहा?

"राज्य, कोष, सेना, पूरी पृथ्वी — सब दे दो, बस अपनी पत्नी, बेटे और अपने धर्म को छोड़कर।" — यह किसने किससे कहा?

  • विश्वामित्र ने हरिश्चंद्र से
  • हरिश्चंद्र ने विश्वामित्र से
  • वसिष्ठ ने हरिश्चंद्र से
  • नारद ने हरिश्चंद्र से
पूरी कथा पढ़िए — जो माँगा गया, और जो छोड़ा गया

विश्वामित्र ने राज्य, कोष, सेना और पूरी भूमि माँगी।

केवल तीन चीज़ें छोड़ी गईं: पत्नी, बेटा और हरिश्चंद्र का अपना धर्म।

आगे की कथा इन्हीं तीन के गिर्द चलती है।

तथ्य

विश्वामित्र ने राज्य माँगते समय हरिश्चंद्र के पास क्या छोड़ दिया?

  • कोष
  • सेना
  • मुकुट और सिंहासन
  • पत्नी, बेटा और अपना धर्म
पूरी कथा पढ़िए — तीन बचे हुए

माँग में सब कुछ आया, पर तीन बातें बच गईं: पत्नी शैव्या, बेटा रोहिताश्व और राजा का अपना धर्म।

इसी से आगे की कथा में राजा कहते हैं कि वे तीनों के सिवा सब दे चुके हैं।

पर आगे वे तीनों भी दाँव पर लग जाते हैं।

ऐसा क्यों?

हरिश्चंद्र ने राज्य बिना झिझके क्यों दे दिया?

  • क्योंकि उन्हें राज्य की परवाह नहीं थी
  • क्योंकि उन्होंने ऋषि के पैर पकड़कर कह दिया था कि जो कहेंगे, दूँगा
  • क्योंकि विश्वामित्र ने उन्हें डराया था
  • क्योंकि नारद ने ऐसा कहा था
पूरी कथा पढ़िए — वचन पहले

राजा ने ग़लती मानकर कह दिया था: जो आप कहें, दूँगा।

ऋषि ने पूरा राज्य माँगा, और राजा ने अपने वचन से पीछे हटने की जगह राज्य दे दिया।

यही कथा की सबसे पहली परीक्षा है।

ग्रंथ असहमत

ऐतरेय ब्राह्मण के रोहित और मार्कंडेय पुराण के रोहिताश्व में क्या फ़र्क़ है?

  • कोई फ़र्क़ नहीं
  • रोहिताश्व शैव्या का बेटा नहीं है
  • ऐतरेय का रोहित बड़ा होकर जंगल भागता है; पुराण का रोहिताश्व एक छोटा बच्चा है
  • रोहित आगे चलकर राजा बनता है, रोहिताश्व नहीं
पूरी कथा पढ़िए — दो बेटे, एक नाम

ऐतरेय का रोहित बड़ा होकर पिता से इनकार करता है और भाग जाता है।

पुराण का रोहिताश्व एक बच्चा है, जो माँ का साथ नहीं छोड़ता।

दोनों कथाएँ अलग हैं, इसलिए दोनों बेटे भी अलग समझे जाएँ।

क्या हुआ?

देवी भागवत के अनुसार विश्वामित्र ने बदला लेने के लिए हरिश्चंद्र के राज्य में क्या भेजा?

  • एक अकाल
  • एक महामारी
  • एक राक्षसी सेना
  • एक विशाल सूअर, जो वनों और उद्यानों को उजाड़ दे
पूरी कथा पढ़िए — बदले का सूअर

देवी भागवत में जब राजा ने तप का विरोध किया, तब विश्वामित्र ने वसिष्ठ से अपनी होड़ याद की।

उन्होंने एक विशाल सूअर रचकर हरिश्चंद्र के राज्य में भेज दिया।

यह मार्कंडेय की कथा में नहीं है।

पहेली

मैं शिकार के बीच सुनाई देती हूँ। मेरे पीछे दौड़ने पर एक न्यायप्रिय राजा अपने जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा में घिर जाता है। मैं क्या हूँ?

  • जंगल में स्त्रियों की पुकार
  • एक हिरण की चाल
  • बाघ की दहाड़
  • शंख की ध्वनि
पूरी कथा पढ़िए — एक पुकार, एक भूल

हिरण का पीछा राजा को जंगल के भीतर ले गया।

वहाँ की पुकार पर राजा दौड़े, और उनकी एक क्षण की भूल ने पूरा राज्य दाँव पर लगा दिया।

पूरी कथा की शुरुआत इसी छोटी घटना से होती है।