
अध्याय ६
श्मशान का पहरेदार
अयोध्या का राजा अब काशी के श्मशान में शवों से कफ़न बटोरता है — और सपने में उसे अपने कई जन्मों की झलक मिलती है
घाट
चांडाल प्रवीर हरिश्चंद्र को काशी के श्मशान ले गया। देवी भागवत के अनुसार यह श्मशान काशी के दक्षिण में था।
मार्कंडेय पुराण उसे इस तरह बताता है: भयानक चीख़ों वाली जगह, सैकड़ों सियारों से भरी, चिताओं की उतरी मालाओं से पटी हुई। हवा में दुर्गंध और धुआँ।
अयोध्या का राजा, जो कभी चंदन और फूलों के बीच चलता था, अब वहाँ खड़ा था।
काम
चांडाल ने काम बताया। हरिश्चंद्र शवों से उतरे वस्त्र और कफ़न बटोरने वाले बने, और उस कमाई का एक हिस्सा उन्हें मालिक को देना पड़ता था। देवी भागवत में वे हर शव का दाम तौलते हैं: इतना राजा का, इतना चांडाल का, इतना मेरा। मार्कंडेय पुराण के एक अंग्रेज़ी अनुवाद में भी हिस्सों की बात है, पर उसका ठीक-ठीक बँटवारा अनुवाद में अस्पष्ट है।
हरिश्चंद्र ने काम किया। वे रोज़ धुएँ में उठते, रोज़ चिताओं के बीच घूमते, और रोज़ यही सोचते कि इस काम में भी सत्य नहीं छोड़ना है।
मार्कंडेय पुराण कहता है: इस तरह बारह महीने बीत गए, मानो सौ बरस हों।
सपना
एक रात, थके हुए हरिश्चंद्र को सपना आया। उन्होंने देखा कि वे कई जन्मों में भटक रहे हैं — कभी पुक्कस, कभी कुत्ता, गधा, हाथी, बंदर। नरक की झलक भी मिली। और फिर एक जन्म, जिसमें वे राजा थे, जुए में अपना राज हार बैठे थे।
सपने के अंत में यमदूत बोले: जब तुम वहाँ से निकलोगे, तब तुम्हें सुख मिलेगा।
यह सपना कथा को एक और अर्थ देता है: यह कष्ट अनंत नहीं, किसी हिसाब का हिस्सा है।
अपने आप से
देवी भागवत में वहीं हरिश्चंद्र ख़ुद से कहते हैं: धर्म के बिना मनुष्य को शुभ फल नहीं मिलता, इसलिए धर्म को सावधानी से कमाना चाहिए।
आज भी वाराणसी का एक घाट उनके नाम पर है, और वहाँ चिताएँ जलती हैं।
टिप्पणी: श्मशान का यह प्रसंग मार्कंडेय पुराण (अध्याय ८) और देवी भागवत (७.२४) में है। चांडाल का नाम मार्कंडेय (और देवी भागवत के तेईसवें अध्याय) में प्रवीर है; देवी भागवत के चौबीसवें अध्याय में उसे केवल "चांडाल" कहा गया है। हिस्सों का बँटवारा दोनों ग्रंथों में अलग ढंग से मिलता है। मार्कंडेय के एक अंग्रेज़ी अनुवाद में राजा के हिस्से का वाक्य अस्पष्ट है ("यह हिस्सा राजा को दिया जाए, और शव के लिए एक-छठा हिस्सा..."), इसलिए इस साइट ने कोई ठीक-ठीक अंश तय करने से परहेज़ किया है; मूल संस्कृत से जाँच बाक़ी है। सपने में जन्मों की सूची मार्कंडेय पुराण से है। इस चांडाल के रूप में स्वयं धर्म आया है, जो कथा के अंत में पता चलता है। श्मशान का वर्णन पाठ के अनुसार है, और कथा उसे कठोर ही रखती है; उसे सुंदर बनाया नहीं गया है। संवादों में दिए गए हिंदी वाक्य मूल संस्कृत के प्रवाहमय भावार्थ हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।
स्रोत: ऐतरेय ब्राह्मण, मार्कंडेय पुराण और देवी भागवत से, श्मशान का पहरेदार