अध्याय ७

वह रात

एक साँप, एक बच्चा, और श्मशान की एक रात — जब एक स्त्री अपने मृत बेटे को गोद में लेकर उसी घाट पर पहुँची जहाँ उसका पति कफ़न बटोर रहा था

बेटा

रोहिताश्व उस बूढ़े ब्राह्मण के घर बड़ा हो रहा था जिसने उसे और उसकी माँ को ख़रीदा था। एक दिन वह बाहर गया, और एक विषैले साँप ने उसे डस लिया। बच्चा मर गया। देवी भागवत में यह साँप विश्वामित्र के ही आदेश पर आया बताया गया है — और कथा के अंत में धर्म यह भी कहते हैं कि वह साँप भी वे स्वयं थे।

देवी भागवत में शैव्या जब रोई, तो ब्राह्मण ने उसे डाँटा कि शाम के समय रोना अशुभ है। बहुत कहने पर उसने बेटे के अंतिम संस्कार की इजाज़त दी।

श्मशान में एक औरत

आधी रात को शैव्या बेटे की लाश लेकर काशी के उसी श्मशान में पहुँची। वह दुबली थी, धूल में सनी, चिथड़ों में।

वह रोती जा रही थी। उसने कहा: मेरा बेटा खेलने गया था, और एक क्रूर विषैले साँप ने उसे डस लिया।

मार्कंडेय पुराण में हरिश्चंद्र वहीं थे। शुरू में दोनों एक-दूसरे को पहचान नहीं सके — सूखे चेहरे, चिथड़े, चिता की राख। फिर राजा ने बच्चे का चेहरा देखा; उसके लक्षण उन्हें अपने बेटे के लगे, और शैव्या ने पति की आवाज़ पहचानी।

देवी भागवत में उसने सिसकते हुए कहा कि आप यहाँ इस रूप में — और मुझे उठा भी नहीं रहे?

देवी भागवत में एक और मोड़

देवी भागवत इस रात में, पहचान से पहले, एक और मोड़ जोड़ता है, जो मार्कंडेय में नहीं है। शहर के पहरेदारों ने आधी रात को एक अकेली रोती स्त्री को देखा। उन्हें लगा कि यह कोई बच्चे खाने वाली राक्षसी है, जो स्त्री के वेश में है।

वे उसे चांडाल के पास ले गए। चांडाल ने हरिश्चंद्र से कहा: इसे मार डालो। यह स्वभाव से ही दुष्ट है।

हरिश्चंद्र ने बार-बार मना किया। उन्होंने कहा कि स्त्रियों की रक्षा होनी चाहिए, उनका वध नहीं; मैंने जीवन भर यही व्रत रखा है। चांडाल क्रोधित हुआ, और आदेश दिया कि तलवार उठाओ। राजा ने तलवार उठाई।

शैव्या ने उसी घड़ी बस इतना माँगा: मुझे बेटे का अंतिम संस्कार कर लेने दीजिए।

अंतिम संस्कार की अनुमति मिलने के बाद वह बेटे का शव लेकर लौटती है; तब हरिश्चंद्र बच्चे के राजलक्षणों से रोहिताश्व को पहचानते हैं, और शैव्या पति की आवाज़ और रूप से हरिश्चंद्र को पहचानती है।

चिता

मार्कंडेय पुराण में दोनों ने वहीं तय किया। शैव्या ने कहा: दुख का यह बोझ मुझसे नहीं उठता। मैं भी आपके साथ इस धधकती आग में उतर जाऊँगी।

हरिश्चंद्र ने पत्नी से कहा कि तुम उस ब्राह्मण की सेवा करो, जिसने तुम्हें ख़रीदा है, और मैं बेटे के साथ आग में उतरता हूँ। शायद हम दूसरे लोक में फिर मिलें।

देवी भागवत में हरिश्चंद्र यही कहते हैं: मैं अपने बेटे के शव के साथ जलती आग में कूद जाऊँगा।

दोनों आग के पास खड़े थे — पति-पत्नी, और उनके बीच एक मरा हुआ बेटा।

जो पाठ में नहीं मिला

शव-दाह के कर वाला दृश्य लोकप्रिय रूपों में बहुत मशहूर है। हमें वह इन दोनों ग्रंथों के हरिश्चंद्र-प्रसंगों में नहीं मिला। यह बाद के रूपों का दृश्य है, इसलिए यहाँ कथा में नहीं रखा गया।

टिप्पणी: यह रात मार्कंडेय पुराण (अध्याय ८) और देवी भागवत (७.२५–२६) में आती है, और दोनों इसे अलग-अलग ढंग से कहते हैं। मार्कंडेय में शैव्या बेटे की लाश लेकर आती है, दोनों एक-दूसरे को पहचानते हैं, और दोनों चिता में उतरने का निश्चय करते हैं। देवी भागवत में एक बीच का मोड़ है — पहरेदार शैव्या को बच्चे खाने वाली राक्षसी समझ लेते हैं और चांडाल हरिश्चंद्र को उसे मारने का आदेश देता है। पत्नी का नाम मार्कंडेय में शैव्या है; कुछ कथाओं और क्षेत्रीय कथनों में तारामती या चंद्रमती। शव-दाह के "कर" की माँग वाला दृश्य, जो लोकप्रिय नाटकों और फ़िल्मों में बहुत जाना जाता है, इस साइट की जाँच में इन दोनों ग्रंथों के हरिश्चंद्र-प्रसंगों (मार्कंडेय के अध्याय ७–८ और देवी भागवत ७.२५–२६) में नहीं मिला, और इसीलिए कथा में नहीं रखा गया। देवी भागवत ७.२५ में साँप विश्वामित्र के आदेश पर आता है; ७.२७ में धर्म बताते हैं कि वही विषैला साँप भी उनका रूप था। संवादों में दिए गए हिंदी वाक्य मूल संस्कृत के प्रवाहमय भावार्थ हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।

स्रोत: ऐतरेय ब्राह्मण, मार्कंडेय पुराण और देवी भागवत से, वह रात

अब बताइए — कितना याद रहा?

क्या हुआ?

रोहिताश्व की मृत्यु कैसे हुई?

  • वह बीमार पड़ा
  • वह नदी में डूब गया
  • एक विषैले साँप ने उसे डस लिया
  • वह एक युद्ध में मारा गया
पूरी कथा पढ़िए — साँप का दंश

रोहिताश्व बूढ़े ब्राह्मण के घर बड़ा हो रहा था।

एक दिन बाहर गया, और एक विषैले साँप ने उसे डस लिया।

माँ ने उसे श्मशान में लाकर अंतिम संस्कार करने का निश्चय किया।

तथ्य

शैव्या अपने मृत बेटे को लेकर कहाँ पहुँची?

  • काशी के उसी श्मशान में, जहाँ हरिश्चंद्र काम करते थे
  • अयोध्या
  • गंगा के किनारे किसी मंदिर में
  • ब्राह्मण के आँगन में
पूरी कथा पढ़िए — श्मशान की ओर

शैव्या आधी रात को बेटे की लाश लेकर पहुँची।

वह उसी श्मशान में आई, जहाँ उसका पति एक चांडाल का सेवक था।

उसे यह पता नहीं था कि वह पति से मिलने वाली है।

किसने कहा?

"मेरा बेटा खेलने गया था, और एक क्रूर विषैले साँप ने उसे डस लिया।" — यह किसने कहा?

  • हरिश्चंद्र ने
  • चांडाल ने
  • बूढ़े ब्राह्मण ने
  • शैव्या ने
पूरी कथा पढ़िए — माँ की बात

देवी भागवत में शैव्या श्मशान पहुँचकर यही शब्द कहती है।

उसके पास बेटे की देह थी और कहने को इतना ही।

इसके बाद हरिश्चंद्र बच्चे को ध्यान से देखते हैं और उसके राजलक्षणों से उसे अपना रोहिताश्व पहचानते हैं।

क्या हुआ?

दोनों ने एक-दूसरे को कैसे पहचाना?

  • राजा ने रानी की चूड़ी देखकर पहचाना
  • राजा ने बच्चे का चेहरा देखकर, रानी ने पति की आवाज़ और रूप से पहचाना
  • चांडाल ने बताया
  • वे एक-दूसरे को पहचान ही नहीं सके
पूरी कथा पढ़िए — बदली हुई सूरतें

हरिश्चंद्र और शैव्या पहले एक-दूसरे को पहचान नहीं सके।

राजा ने बच्चे के चेहरे में अपने बेटे के लक्षण देखे।

फिर शैव्या ने पति की आवाज़ पहचानी।

ग्रंथ असहमत

पहरेदारों के हाथों शैव्या के पकड़े जाने और तलवार उठाने का प्रसंग किस ग्रंथ में है?

  • देवी भागवत में, जो इस रात में एक और मोड़ जोड़ता है
  • मार्कंडेय पुराण में, अध्याय ८ में
  • ऐतरेय ब्राह्मण में
  • दोनों में
पूरी कथा पढ़िए — तलवार वाला मोड़

देवी भागवत में पहरेदार शैव्या को बच्चे खाने वाली राक्षसी समझ लेते हैं।

चांडाल हरिश्चंद्र को उसे मारने का आदेश देता है, और राजा तलवार उठाते हैं।

मार्कंडेय पुराण में यह प्रसंग नहीं है।

क्या हुआ?

देवी भागवत में जब चांडाल ने हरिश्चंद्र से शैव्या को मारने को कहा, तब राजा ने क्या किया?

  • तुरंत तलवार उठा ली
  • भाग खड़े हुए
  • चांडाल से मारने का कारण पूछा
  • बार-बार मना किया, यह कहकर कि स्त्रियों की रक्षा होनी चाहिए
पूरी कथा पढ़िए — राजा का इनकार

हरिश्चंद्र ने कहा कि स्त्रियों की रक्षा होनी चाहिए, वध नहीं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन भर यही व्रत रखा है।

चांडाल के क्रोध पर ही उन्होंने तलवार उठाई।

क्या हुआ?

शैव्या ने तलवार के सामने क्या माँगा?

  • अपने प्राण की रक्षा
  • बेटे का अंतिम संस्कार कर लेने का समय
  • हरिश्चंद्र की मुक्ति
  • अयोध्या लौटने की अनुमति
पूरी कथा पढ़िए — एक माँ की माँग

शैव्या को अपने प्राणों की चिंता नहीं थी।

उसने बस इतना माँगा कि बेटे का अंतिम संस्कार हो जाने दिया जाए।

इसी माँग से रात आगे बढ़ती है, और चिता तैयार होती है।

बाद की परंपरा

लोकप्रिय कथन में श्मशान की रात का एक और दृश्य मशहूर है — शव-दाह के "कर" की माँग का। यह दृश्य कहाँ मिलता है?

  • मार्कंडेय पुराण के अध्याय ८ में
  • देवी भागवत के अध्याय २६ में
  • इन दोनों ग्रंथों के हरिश्चंद्र-प्रसंगों में यह दृश्य नहीं मिला; यह बाद के लोकप्रिय रूपों में मशहूर है
  • वाल्मीकि रामायण में
पूरी कथा पढ़िए — जो पाठ में नहीं मिला

कथा के लोकप्रिय रूपों में शैव्या से शव-दाह का कर माँगने का दृश्य बहुत जाना-पहचाना है।

मार्कंडेय पुराण के हरिश्चंद्र-प्रसंग और देवी भागवत ७.२५–२६ में हमें यह दृश्य नहीं मिला।

इसलिए यहाँ इसे कथा के भीतर नहीं रखा गया है; यह बाद की परंपरा की देन है।

क्या हुआ?

चिता के पास दोनों ने क्या तय किया?

  • अयोध्या लौटने का
  • विश्वामित्र से क्षमा माँगने का
  • चांडाल से छुड़ाने की गुहार का
  • बेटे के साथ जलती आग में उतर जाने का
पूरी कथा पढ़िए — आग में उतरना

मार्कंडेय पुराण में शैव्या कहती है कि वह भी उसी आग में उतरेगी।

हरिश्चंद्र भी बेटे के साथ आग में उतरने का निश्चय करते हैं।

देवी भागवत में भी वे यही कहते हैं कि मैं बेटे के शव के साथ जलती आग में कूद जाऊँगा।

पहेली

मैं आधी रात के श्मशान में आई। मेरे हाथों में मेरे बेटे की लाश थी, और आगे मेरा पति खड़ा था, जिसे मैं पहले पहचान नहीं सकी। मैं कौन हूँ?

  • शैव्या
  • द्रौपदी
  • सीता
  • सावित्री
पूरी कथा पढ़िए — रात की माँ

शैव्या हरिश्चंद्र की पत्नी है, जिसे कुछ कथाओं में तारामती या चंद्रमती भी कहा जाता है।

वह बेटे की लाश लेकर उसी घाट पर पहुँची।

कथा शैव्या को भी लगातार दुःख, दासता और अपने बेटे की मृत्यु के बीच धैर्य बनाए रखते दिखाती है।