मनु और मछली — मत्स्य पुराण, चित्र

अध्याय १

मनु और मछली

हथेली में आई एक नन्ही मछली, जो बढ़ते-बढ़ते समुद्र भर गई — और जिसने कहा कि प्रलय आने वाली है

मनु और मछली — मत्स्य पुराण का अध्याय १। स्रोत: मत्स्य पुराण, अध्याय १–२। इसमें ६ दृश्य हैं — नैमिषारण्य का सवाल; मलय पर्वत पर तप; जल में गिरी एक मछली; मछली की चेतावनी; जो बचेगा; नाव और रस्सा — और अंत में १० सवाल।

नैमिषारण्य का सवाल

नैमिषारण्य में एक लंबा यज्ञ पूरा हुआ था। यज्ञ के बाद ऋषि बैठकर एक-दूसरे को पुराणों की कथाएँ सुना रहे थे। सूत भी वहीं थे, और शौनक आदि ऋषियों ने उनसे कहा कि जो अमृत जैसी कथाएँ आप पहले सुना चुके हैं, वही फिर सुनाइए। हम उन्हें सुनते नहीं थकते।

उन्होंने पूछा — ब्रह्मा ने यह संसार कैसे रचा? विष्णु ने मछली का रूप क्यों लिया? शिव ने हाथ में खोपड़ी का कटोरा क्यों लिया?

सूत ने कहा, सुनिए। मैं आपको वह मत्स्य पुराण सुनाता हूँ जो ख़ुद विष्णु ने मछली के रूप में कहा था। और कथा वहीं से शुरू होती है, जहाँ मछली पहली बार दिखाई दी।

मलय पर्वत पर तप

बहुत पुराने समय में एक राजा था, वैवस्वत मनु। सूर्य का बेटा, सूर्यवंश का पहला राजा। उसने अपना राज बेटे को सौंपा और मलय पर्वत की एक चोटी पर तप करने चला गया।

पुराण कहता है कि मनु ऐसा आदमी था जिसे दुख में दुख नहीं तोड़ता था, और सुख में सुख नहीं बहकाता था। वह हर हाल में एक-सा रहता था। उसने बहुत लंबा तप किया। पुराण के शब्दों में, दस लाख बरस बीत गए, तब ब्रह्मा प्रसन्न हुए और बोले — माँगो।

मनु ने प्रणाम किया और बस एक वर माँगा। उसने धन नहीं माँगा, स्वर्ग नहीं माँगा, कोई राज नहीं माँगा। उसने कहा — जब प्रलय का समय आए, तब मुझमें इतनी शक्ति हो कि मैं हर जीव की रक्षा कर सकूँ, चलने वाले की भी और न चलने वाले की भी।

ब्रह्मा ने कहा, ऐसा ही हो। और वे वहीं अंतर्धान हो गए। आकाश से देवताओं ने फूल बरसाए।

जल में गिरी एक मछली

कुछ समय बाद मनु अपने आश्रम में पितरों को तर्पण कर रहे थे। तभी अर्पित किए जा रहे जल के साथ उनकी हथेली में एक नन्ही मछली आ गिरी। पुराण उसे 'शफरी' कहता है, एक बहुत छोटी, चंचल मछली।

मनु को दया आई। उसने सोचा, इसे फिर नदी में छोड़ दूँ तो कोई बड़ी मछली खा जाएगी। उसने उसे अपने जल के पात्र में डाल दिया।

एक दिन और एक रात बीती, और मछली इतनी बड़ी हो गई कि सोलह अंगुल लंबी हो गई। फिर वह पात्र में तड़पने लगी। उसने पुकारा — मैं तुम्हारी शरण में हूँ, मुझे बचाओ।

मनु ने उसे निकालकर एक बड़े घड़े में रखा। एक रात में वह तीन हाथ लंबी हो गई। फिर वही पुकार आई — मुझे बचाओ, मैं तुम्हारी शरण में हूँ। मनु ने उसे निकालकर एक कुएँ में रखा। कुआँ भी उसके लिए छोटा पड़ गया, तो राजा ने उसे एक तालाब में रखा। तालाब में वह एक योजन लंबी हो गई, यानी लगभग आठ मील। और उसने फिर वही पुकार लगाई।

मनु ने उसे गंगा में छोड़ा। गंगा में भी वह बढ़ती गई। तब उसे समुद्र में रख दिया गया। और वह मछली समुद्र में भी इतनी बढ़ी कि लगभग पूरे समुद्र को भर बैठी।

अब मनु घबरा गया। वह समझ गया कि यह कोई साधारण मछली नहीं है। उसने हाथ जोड़कर पूछा — क्या तुम असुरों के कोई राजा हो? या तुम स्वयं वासुदेव हो? कोई और इतना बड़ा रूप कैसे ले सकता है? हे केशव, मैंने तुम्हें पहचान लिया। तुम मछली का रूप लेकर मुझे उलझा रहे हो। हे हृषीकेश, हे जगन्नाथ, तुम्हें प्रणाम।

मछली की चेतावनी

मछली ने कहा — हे निष्पाप, तुमने मुझे ठीक पहचाना। अब कुछ ही दिनों में यह सारा संसार पानी में डूब जाएगा, पहाड़ और जंगल सब। देवताओं ने इस विपत्ति से जीवों को बचाने के लिए एक नाव बनाई है। उसमें पसीने से पैदा होने वाले, अंडे से पैदा होने वाले, धरती फोड़कर उगने वाले और गर्भ से जन्म लेने वाले, हर प्रकार के जीव रखे जाएँगे। राजा, तुम उस नाव के रक्षक बनो। जब हवा नाव को उड़ाने लगे, तब उसे मेरे सींग से बाँध देना।

मनु ने पूछा कि वह समय कब आएगा, और उसे कैसे बचाया जाएगा। और अंत में उसने यह भी पूछा कि वह भगवान को फिर कब देख पाएगा।

मछली ने बताया कि आज से सौ बरस तक वर्षा नहीं होगी, और भयंकर अकाल पड़ेगा। फिर सूर्य की सात किरणें सात गुना तप जाएँगी और सारे प्राणियों को जला देंगी। नीचे से शेषनाग अपने हज़ार मुँहों से आग उगलेगा, और शिव की तीसरी आँख से आग निकलेगी। तीनों लोक राख हो जाएँगे, और आकाश के तारे और ग्रह भी नहीं बचेंगे।

तब उस ताप से सात बादल उठेंगे — संवर्त, भीमनाद, द्रोण, चंड, बलाहक, विद्युत्पताक और शोण — और इतना बरसेंगे कि सातों समुद्र एक हो जाएँगे। पूरी धरती एक ही जल की चादर हो जाएगी।

तब तुम उस नाव में सृष्टि के बीज और वेद रखना, और मेरे दिए रस्से से नाव को मेरे सींग में बाँध देना। मेरी शक्ति से सब बच जाएगा।

जो बचेगा

मछली ने गिनाया कि जब सब कुछ नष्ट हो जाएगा, तब कौन बचेगा। तुम, चंद्रमा, सूर्य, मैं स्वयं, ब्रह्मा, पवित्र नर्मदा नदी, महर्षि मार्कंडेय, चारों वेद, पुराण, शिव और सारी विद्याएँ। चक्षुष मनु का राज इस आंशिक प्रलय के साथ ही समाप्त हो जाएगा।

और जब प्रलय के बाद नई सृष्टि होगी, तब मैं फिर से वेद-ज्ञान फैलाऊँगा।

इतना कहकर मछली अचानक अंतर्धान हो गई। मनु उस दिन तक योग में रमा रहा, जिस दिन के लिए उसे बताया गया था।

नाव और रस्सा

जब प्रलय शुरू हुआ, तब मछली फिर प्रकट हुई, इस बार सींग वाली। उसी समय शेषनाग रस्सी बनकर मनु के सामने आए। मनु ने अपनी योग-शक्ति से सारे जीवों को इकट्ठा किया और नाव में बिठाया। फिर रस्सी से नाव को मछली के सींग में बाँधा, भगवान को प्रणाम किया, और ख़ुद नाव पर चढ़ गया।

यहाँ मत्स्य पुराण मनु की यात्रा का ब्योरा नहीं देता। वह सीधे सूत की ओर लौट आता है। सूत ऋषियों से कहते हैं — अब सुनिए, वही सृष्टि का वृत्तांत, जो मछली ने मनु को बताया था।

मनु ने तब मछली से पूछा था: सृष्टि और प्रलय कैसे होते हैं, मनुष्यों की पीढ़ियाँ कैसे बनीं, मन्वंतर किसे कहते हैं, बड़े पुरुषों के जीवन कैसे थे, दान का मार्ग क्या है, श्राद्ध कैसे होता है, वर्ण और आश्रम कैसे बँटे। इन सबके उत्तर में जो कुछ कहा गया, वही मत्स्य पुराण है।

और इसीलिए पूरा पुराण एक छोटी-सी मछली के उस सवाल पर टिका है जो उसने मनु से अपनी हथेली में पड़े-पड़े पूछा था: क्या तुम मुझे बचाओगे?

टिप्पणी: यह अध्याय मत्स्य पुराण के अध्याय १ और २ पर है। मनु की नाव की यात्रा का ब्योरा इस पुराण में नहीं है; वह भागवत और शतपथ ब्राह्मण जैसी दूसरी परंपराओं में अलग-अलग मिलता है। यहाँ केवल वही है जो इस अनुवाद में आता है।

स्रोत: मत्स्य पुराण — एक तालुकदार (अवध) का अंग्रेज़ी अनुवाद, सेक्रेड बुक्स ऑफ़ द हिंदूज़, खंड १७ (१९१६–१७), मनु और मछली

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

ब्रह्मा से वर पाते समय मनु ने क्या माँगा?

  • अपने बेटे के लिए अमर राज
  • अमरता, ताकि वह प्रलय से बच सके
  • प्रलय के समय सब चल-अचल जीवों की रक्षा करने की शक्ति
  • सारे वेद और पुराणों का ज्ञान
पूरी कथा पढ़िए — एक ही वर

मनु ने अपने तप के बदले सबसे कठिन चीज़ माँगी, दूसरों की रक्षा का भार।

ब्रह्मा ने बस इतना कहा, ऐसा ही हो, और देवताओं ने फूल बरसाए।

पुराण कहता है कि मनु सुख-दुख में एक-सा रहने वाला पुरुष था, इसलिए उसने ऐसा वर माँगा।

क्या हुआ?

मछली पहली बार मनु के पास कैसे आई?

  • तर्पण के जल के साथ उसके हाथ में आ गिरी
  • वह नदी किनारे तड़पती मिली
  • वह मनु के जाल में फँस गई
  • देवताओं ने उसे मनु को सौंपा
पूरी कथा पढ़िए — अचानक हाथ में

पुराण इस मछली को 'शफरी' कहता है, यानी छोटी, चंचल मछली।

मनु ने डर से नहीं, दया से उसे बचाया।

मनु तब मलय पर्वत के अपने आश्रम में था।

ऐसा क्यों?

मनु मछली को एक के बाद एक बड़े स्थान पर क्यों रखता गया?

  • क्योंकि मनु उसे परखना चाहता था
  • क्योंकि वह भाग जाना चाहती थी
  • क्योंकि देवताओं ने ऐसा आदेश दिया था
  • क्योंकि हर जगह वह इतनी बढ़ जाती कि छोटी पड़ने लगती, और वह मनु से शरण माँगती
पूरी कथा पढ़िए — शरण की पुकार

हर बार मनु ने उसी पुकार पर उसे निकालकर बड़ी जगह में रखा।

अंत में पूरा समुद्र उसके लिए भर गया, और तब जाकर मनु ने सोचा कि यह कौन है।

दया की यह आदत ही मनु को उस नाव तक ले गई।

कौन हूँ मैं?

मैं पाताल से निकलता हूँ, मेरे हज़ार मुँह हैं, और प्रलय के दिन मैं मनु के सामने रस्सी बन गया। मैं कौन हूँ?

  • वासुकि
  • शेषनाग
  • तक्षक
  • नर्मदा
पूरी कथा पढ़िए — पाताल का नाग

शेषनाग हज़ार फनों वाला नाग है, जिसके सिर पर पुराणों के अनुसार धरती टिकी है।

प्रलय की आग में भी शेष की भूमिका है, और रस्सी बनकर भी।

मछली ने मनु को जो रस्सा दिया, वही शेष का रूप निकला।

सही क्रम

मछली को किन-किन जगहों पर रखा गया? सही क्रम चुनिए।

  • जल का पात्र → बड़ा घड़ा → कुआँ → तालाब → गंगा → समुद्र
  • कुआँ → घड़ा → जल का पात्र → तालाब → गंगा → समुद्र
  • जल का पात्र → घड़ा → कुआँ → गंगा → तालाब → समुद्र
  • जल का पात्र → तालाब → कुआँ → बड़ा घड़ा → समुद्र → गंगा
पूरी कथा पढ़िए — छोटे से बड़े तक

पात्र में वह सोलह अंगुल बढ़ी, घड़े में तीन हाथ, तालाब में एक योजन।

गंगा के बाद उसे समुद्र में रखा गया, जहाँ वह लगभग पूरे समुद्र जितनी हो गई।

यह क्रम दिखाता है कि मछली का रूप कितनी तेज़ी से बढ़ा।

किसने कहा?

'मैं तुम्हारी शरण में हूँ, मुझे बचाओ' — किसने कहा?

  • मनु ने ब्रह्मा से
  • शेषनाग ने मनु से
  • सूत ने ऋषियों से
  • मछली ने मनु से
पूरी कथा पढ़िए — वही पुकार

मछली ने यही बात पात्र में, घड़े में, कुएँ में और तालाब में दोहराई।

पुराण में इसका स्वर करुण है, पर मछली का असली रूप विष्णु का है।

जिस पुकार पर मनु बार-बार पिघलता रहा, वही उसकी परीक्षा भी थी।

तथ्य

जल के पात्र में एक दिन और एक रात के भीतर मछली कितनी लंबी हो गई थी?

  • एक हाथ
  • सोलह अंगुल
  • एक योजन
  • सात योजन
पूरी कथा पढ़िए — अंगुल, हाथ, योजन

घड़े में वह तीन हाथ की हुई, यानी रात भर में फिर बहुत बड़ी।

तालाब में एक योजन, जो लगभग आठ मील है।

आगे समुद्र में वह लगभग पूरा समुद्र भर देती है।

व्याख्या

इस कथा से कौन-सा अर्थ निकलता है? (यह हमारा पाठ है, श्लोक का सीधा अर्थ नहीं।)

  • कि मछली को हमेशा नदी में छोड़ देना चाहिए
  • कि प्रलय से कोई नहीं बचता
  • किसी छोटे और असहाय जीव की रक्षा भी एक बड़े धर्म का हिस्सा हो सकती है
  • कि देवता हमेशा जानवरों के रूप में आते हैं
पूरी कथा पढ़िए — छोटी दया, बड़ी रक्षा

कथा में मनु को पता नहीं था कि वह भगवान को पाल रहा है।

पहले उसने मछली को बचाया, तब जाकर मछली ने उससे सबको बचाने को कहा।

इस पाठ को हमारी एक पढ़त की तरह लीजिए; पुराण यह सीख नाम लेकर नहीं देता।

क्या हुआ?

मछली ने मनु से नाव में क्या रखने को कहा?

  • केवल मनु का परिवार और राजसी ख़ज़ाना
  • केवल वेद
  • केवल चार प्रकार के जीव
  • चार प्रकार के जीव, सृष्टि का बीज और वेद
पूरी कथा पढ़िए — नाव का सामान

चार प्रकार के जीव हैं: पसीने से जन्मे, अंडे से जन्मे, धरती फोड़कर उगे और गर्भ से जन्मे।

मछली ने यह भी कहा कि रस्सी से नाव को मेरे सींग में बाँध देना।

इसी के बाद मनु ने भगवान को प्रणाम किया और नाव पर चढ़ा।

पहेली

मैं सूर्य का बेटा हूँ और सूर्यवंश का पहला राजा। मैंने तप किया, वर माँगा, एक मछली को पाला, और प्रलय में नाव का रक्षक बना। मैं कौन हूँ?

  • वैवस्वत मनु
  • चक्षुष मनु
  • ब्रह्मा
  • सूत
पूरी कथा पढ़िए — वैवस्वत मनु

'वैवस्वत' का मतलब है विवस्वान यानी सूर्य का बेटा।

पुराण में वही सूर्यवंश का आदि राजा है।

आगे के अध्यायों में पुराण दूसरी कथाओं की ओर बढ़ता है, जिनमें इसी वंश के ययाति की कथा भी है।

मनु और मछली के बारे में सवाल

मनु और मछली (मत्स्य पुराण) में क्या होता है?

हथेली में आई एक नन्ही मछली, जो बढ़ते-बढ़ते समुद्र भर गई — और जिसने कहा कि प्रलय आने वाली है। कथा इन पड़ावों से गुज़रती है: नैमिषारण्य का सवाल; मलय पर्वत पर तप; जल में गिरी एक मछली; मछली की चेतावनी; जो बचेगा; नाव और रस्सा।

मत्स्य पुराण में मनु और मछली के बाद क्या आता है?

आगे नृसिंह और हिरण्यकशिपु: जिसने वर माँगा कि न दिन में मरूँ, न रात में, न किसी हथियार से — और जिसकी सभा में एक सिंह चला आया।

मनु और मछली का स्रोत क्या है?

मत्स्य पुराण, अध्याय १–२।