मत्स्य पुराण

मत्स्य पुराण — १२ अध्याय, १२० सवाल। मत्स्य पुराण — एक तालुकदार (अवध) का अंग्रेज़ी अनुवाद, सेक्रेड बुक्स ऑफ़ द हिंदूज़, खंड १७ (१९१६–१७)।

मत्स्य पुराण अठारह महापुराणों में से एक है। इसका नाम उस मछली से है जो विष्णु ने मनु को बचाने के लिए बनकर आई, और पुराण उसी मछली के मुँह से कहा गया है। इसमें सृष्टि, वंश, तीर्थ और व्रतों के साथ-साथ बहुत सी कथाएँ हैं: ययाति और देवयानी, हरिकेश यक्ष, त्रिपुर का दहन, पुरूरवा। यहाँ केवल कथाएँ ली गई हैं, व्रत-विधि और वास्तु-शास्त्र के अध्याय नहीं। कथा अनुवाद को सीधे पढ़कर, अपने शब्दों में कही गई है।

मत्स्य पुराण के बारे में सवाल

यहाँ मत्स्य पुराण कैसे बँटा है?

मत्स्य पुराण की इस कथा में १२ अध्याय हैं: मनु और मछली, नृसिंह और हिरण्यकशिपु, कच और देवयानी, देवयानी: कुएँ से राजमहल तक, पुरु का यौवन-दान, ययाति का पतन और अष्टक, हरिकेश यक्ष, त्रिपुर: तीन नगर और एक बाण, सूर्य, संज्ञा और छाया, वामन और बलि, समुद्र-मंथन, दैव और पुरुषार्थ।

मत्स्य पुराण किस बारे में है?

एक छोटी मछली से शुरू हुआ पुराण — जिसमें प्रलय की नाव है, ययाति का बुढ़ापा है, एक यक्ष का तप है, और तीन नगरों की राख।

इस कथा का स्रोत क्या है?

मत्स्य पुराण — एक तालुकदार (अवध) का अंग्रेज़ी अनुवाद, सेक्रेड बुक्स ऑफ़ द हिंदूज़, खंड १७ (१९१६–१७)।

क्या मत्स्य पुराण पर प्रश्नोत्तरी है?

हाँ। हर अध्याय के अंत में १० सवाल हैं, और हर सही उत्तर के पीछे एक छोटी कथा है जो उसे समझाती है। कुल १२० सवाल।