अध्याय २

हंस का संदेश

एक सुनहरे हंस ने एक राजा की बात एक राजकुमारी तक पहुँचाई — और उसने लौटकर राजा को बताया कि जवाब क्या था

बाग़ में एक हंस

एक दिन नल अपने बाग़ में टहल रहे थे। वहाँ सोने के पंखों वाले हंसों का एक झुंड उतरा। नल ने खेल-खेल में एक हंस पकड़ लिया।

हंस ने कहा — "मुझे छोड़ दो, राजन्। बदले में मैं विदर्भ जाकर दमयंती से तुम्हारी इतनी प्रशंसा करूँगा कि वह किसी और के बारे में सोच ही न सके।"

नल ने उसे छोड़ दिया। हंस उड़ गया — सीधे विदर्भ की ओर।

जो हंस ने कहा

दमयंती अपनी सखियों के साथ बाग़ में थी, जब वह सुनहरा हंस उतरा। उसने कहा — "देवी, संसार में एक राजा है जिसका नाम नल है। रूप में अश्विनी कुमारों जैसा, गुण में बेजोड़। यदि तुम उसकी पत्नी बनो, तो यह जन्म सफल होगा।"

दमयंती ने सुना, और कुछ देर चुप रही। फिर उसने कहा — "जाओ, नल से भी यही बात कह देना।"

हंस उड़कर निषध लौटा और नल को दमयंती का संदेश सुनाया।

जो पीछे रह गया

उस दिन के बाद से दमयंती को न भोजन में मन लगता, न नींद आती। वह खिड़की के पास बैठी रहती, सखियों से बात करना भूल जाती, कहीं खोई रहती।

उसकी सखियों ने यह हाल राजा भीम को बताया। भीम ने देखा कि उनकी बेटी अब उस उम्र की है, जब विवाह की बात सोची जानी चाहिए। उन्होंने दमयंती के स्वयंवर की घोषणा करवा दी।

दूर-दूर के राज्यों में संदेश भेजे गए। दमयंती के स्वयंवर की ख़बर देवताओं तक भी पहुँची।

टिप्पणी: यह प्रसंग नलोपाख्यान के आरंभिक खंडों में है। हंस के ज़रिए संदेश भेजना इस कथा का एक प्रसिद्ध प्रसंग है — राजा रवि वर्मा का "हंस-दमयंती" (१८९९) इसी दृश्य पर बना एक जाना-पहचाना चित्र है। दमयंती के स्वयंवर की घोषणा के बाद कथा सीधे उस दिन पर जाती है जब नल स्वयं विदर्भ की ओर चल पड़ते हैं — अगले अध्याय में। संवादों में दिए गए हिंदी वाक्य मूल संस्कृत श्लोकों के प्रवाहमय भावार्थ हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।

स्रोत: महाभारत, वनपर्व — नलोपाख्यान, हंस का संदेश

अब बताइए — कितना याद रहा?

क्या हुआ?

नल ने बाग़ में क्या पकड़ा?

  • एक सुनहरा मोर
  • एक तोता
  • सोने के पंखों वाला एक हंस
  • एक हिरण
पूरी कथा पढ़िए — बाग़ में एक हंस

नल के बाग़ में सोने के पंखों वाले हंसों का झुंड उतरा।

नल ने खेल-खेल में एक हंस पकड़ लिया।

हंस ने छोड़े जाने पर दमयंती तक संदेश पहुँचाने का वचन दिया।

किसने कहा?

"मुझे छोड़ दो, राजन्। बदले में मैं विदर्भ जाकर दमयंती से तुम्हारी इतनी प्रशंसा करूँगा।" — यह किसने कहा?

  • हंस ने नल से
  • नल ने दमयंती से
  • दमयंती ने अपनी सखी से
  • भीम ने नल से
पूरी कथा पढ़िए — एक शर्त, एक वचन

नल ने हंस को पकड़ लिया था।

हंस ने अपनी आज़ादी के बदले दमयंती तक संदेश पहुँचाने की पेशकश की।

नल ने उसे छोड़ दिया, और हंस विदर्भ की ओर उड़ गया।

क्या हुआ?

हंस ने दमयंती से क्या कहा?

  • कि नल का विवाह हो चुका है
  • कि नल एक साधारण राजा है
  • कि नल स्वयं दमयंती से मिलने आ रहा है
  • कि नल रूप और गुण में बेजोड़ है, और उससे विवाह करना जन्म सफल करेगा
पूरी कथा पढ़िए — हंस की प्रशंसा

हंस ने नल की तुलना अश्विनी कुमारों से की।

उसने कहा कि नल से विवाह करना दमयंती का जन्म सफल कर देगा।

दमयंती ने चुप रहकर सुना, फिर हंस को नल के पास वही संदेश ले जाने को कहा।

क्या हुआ?

हंस की बात सुनने के बाद दमयंती को क्या हुआ?

  • वह ख़ुश होकर नाचने लगी
  • उसे न भोजन में मन लगता, न नींद आती
  • वह हंस पर क्रोधित हुई
  • वह तुरंत निषध की ओर चल पड़ी
पूरी कथा पढ़िए — प्रेम की पहली झलक

दमयंती हंस की बात सुनने के बाद बदल गई।

न भोजन में मन लगता, न नींद आती।

यही हाल उसकी सखियों ने राजा भीम को बताया।

ऐसा क्यों?

राजा भीम ने दमयंती के स्वयंवर की घोषणा क्यों करवाई?

  • क्योंकि उन्होंने देखा कि उनकी बेटी विवाह की उम्र की हो चुकी है, और उसका मन कहीं लगा हुआ है
  • क्योंकि नल ने विवाह का प्रस्ताव भेजा था
  • क्योंकि किसी ऋषि ने ऐसा करने को कहा
  • क्योंकि पड़ोसी राज्यों ने माँग की थी
पूरी कथा पढ़िए — पिता का निर्णय

सखियों ने दमयंती का हाल राजा भीम को बताया।

भीम ने देखा कि उनकी बेटी विवाह की उम्र की है।

उन्होंने स्वयंवर की घोषणा करवा दी, और दूर-दूर तक संदेश भेजे गए।

तथ्य

दमयंती के स्वयंवर का संदेश कहाँ तक पहुँचा?

  • केवल पड़ोसी राज्यों तक
  • केवल निषध तक
  • केवल ऋषियों तक
  • दूर-दूर के राज्यों तक, और देवताओं तक भी
पूरी कथा पढ़िए — स्वयंवर की ख़बर

भीम ने दूर-दूर के राज्यों में संदेश भेजा।

यह ख़बर देवताओं तक भी पहुँची।

यहीं से अगली कथा शुरू होती है।

क्या हुआ?

हंस दमयंती का संदेश लेकर कहाँ लौटा?

  • विदर्भ में ही रुक गया
  • निषध, नल के पास
  • किसी और राज्य में चला गया
  • स्वर्ग चला गया
पूरी कथा पढ़िए — संदेश वापस

हंस ने दमयंती का संदेश सुना।

वह उड़कर निषध लौटा।

उसने नल को दमयंती का जवाब सुनाया।

किसका बेटा?

नल किसके पुत्र थे — याद कीजिए (पिछले अध्याय से)?

  • राजा भीम के
  • ऋषि दमन के
  • वीरसेन के
  • राजा ऋतुपर्ण के
पूरी कथा पढ़िए — वीरसेन का पुत्र

नल वीरसेन के पुत्र और निषध के राजा थे।

पिछले अध्याय में यह बात बताई गई थी।

यह अध्याय दिखाता है कि नल और दमयंती एक-दूसरे तक कैसे पहुँचे — बिना मिले।

ऐसा क्यों?

दमयंती ने हंस से यह क्यों कहा कि वही बात नल तक भी पहुँचा दे?

  • क्योंकि वह हंस से डर गई थी
  • क्योंकि उसके पिता ने ऐसा आदेश दिया था
  • क्योंकि वह हंस को जल्दी विदा करना चाहती थी
  • क्योंकि हंस की बात सुनकर वह भी नल के प्रति वैसा ही आकर्षित हो चुकी थी
पूरी कथा पढ़िए — दोनों तरफ़ एक ही भाव

हंस ने नल की प्रशंसा की, और दमयंती चुप होकर सुनती रही।

उसका मन भी नल की ओर मुड़ चुका था।

इसीलिए उसने हंस से कहा कि वह नल तक भी यही बात पहुँचा दे।

पहेली

मैं सोने के पंखों वाला हूँ। एक राजा ने मुझे पकड़ा, और मैंने उसके बदले एक राजकुमारी तक उसकी प्रशंसा पहुँचाई। मैं क्या हूँ?

  • हंस
  • मोर
  • तोता
  • कबूतर
पूरी कथा पढ़िए — प्रेम का पहला दूत

नल ने बाग़ में एक सुनहरे हंस को पकड़ा।

हंस ने आज़ादी के बदले दमयंती तक नल की प्रशंसा पहुँचाई, और वापस भी लौटा।

इसी हंस से नल और दमयंती की कथा शुरू होती है, जो आगे स्वयंवर तक जाती है।