नल-दमयंती

नल-दमयंती — ९ अध्याय, ९० सवाल। महाभारत, वनपर्व — नलोपाख्यान।

यह कथा महाभारत के वनपर्व में आती है — नलोपाख्यान, जिसे ऋषि बृहदश्व द्यूत में हारकर वनवास पर गए युधिष्ठिर को सुनाते हैं। यह कथा मुख्यतः गांगुली के अंग्रेज़ी अनुवाद और कुछ भरोसेमंद पुनर्कथनों के आधार पर तैयार की गई है; शुरुआती ड्राफ़्ट में मूल संस्कृत ग्रंथ सीधे उपलब्ध नहीं हो सका था, पर बाद में इसे पूरे गांगुली अनुवाद से जाँचकर ठीक किया गया। जहाँ अलग-अलग पुनर्कथनों में तथ्य अलग मिले — बच्चों के नाम, दूसरे जुए में पुष्कर का भाग्य — वहाँ सबसे प्रचलित रूप लिया गया है। संवादों में दिए गए हिंदी वाक्य मूल संस्कृत श्लोकों के प्रवाहमय भावार्थ हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।