नल-दमयंती
नल-दमयंती — ९ अध्याय, ९० सवाल। महाभारत, वनपर्व — नलोपाख्यान।
यह कथा महाभारत के वनपर्व में आती है — नलोपाख्यान, जिसे ऋषि बृहदश्व द्यूत में हारकर वनवास पर गए युधिष्ठिर को सुनाते हैं। यह कथा मुख्यतः गांगुली के अंग्रेज़ी अनुवाद और कुछ भरोसेमंद पुनर्कथनों के आधार पर तैयार की गई है; शुरुआती ड्राफ़्ट में मूल संस्कृत ग्रंथ सीधे उपलब्ध नहीं हो सका था, पर बाद में इसे पूरे गांगुली अनुवाद से जाँचकर ठीक किया गया। जहाँ अलग-अलग पुनर्कथनों में तथ्य अलग मिले — बच्चों के नाम, दूसरे जुए में पुष्कर का भाग्य — वहाँ सबसे प्रचलित रूप लिया गया है। संवादों में दिए गए हिंदी वाक्य मूल संस्कृत श्लोकों के प्रवाहमय भावार्थ हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।
- यह कथा किसलिए — जुए में सब कुछ हार चुके एक राजा को, वन में, यह कथा सुनाई जाती है — कि हार से लौटना नामुमकिन नहीं है
- हंस का संदेश — एक सुनहरे हंस ने एक राजा की बात एक राजकुमारी तक पहुँचाई — और उसने लौटकर राजा को बताया कि जवाब क्या था
- पाँच नल — चार देवता एक राजा का रूप धर लेते हैं, और एक राजकुमारी को अपने प्रेम की सच्चाई से असली को पहचानना पड़ता है
- कलि की प्रतीक्षा — स्वयंवर से लौटते एक देवता ने कलि से कहा — दमयंती ने एक मनुष्य को चुना है — और कलि ने बारह साल इंतज़ार किया, एक भूल के लिए
- आधा वस्त्र — भूख से बेसुध एक राजा ने सुनहरे पंछियों को पकड़ने के लिए अपना आख़िरी वस्त्र फेंका — और वे उसे लेकर उड़ गए, क्योंकि वे पंछी नहीं, वही पासे थे
- जंगल में दमयंती — अकेली जागी एक रानी को एक अजगर ने जकड़ लिया, एक शिकारी ने बचाया और फिर सताया, और एक शाप ने उसी क्षण उसकी रक्षा कर दी
- कर्कोटक का डंक — एक जलते जंगल में फँसे नाग ने नल को डस लिया — और उसी डंक ने राजा का रूप बदल दिया, और भीतर बैठे कलि को जला दिया
- एक दिन में कुंडिन — दमयंती ने एक झूठे स्वयंवर की घोषणा करवाई, यह जानते हुए कि पूरी पृथ्वी पर सिर्फ़ एक सारथी एक दिन में इतनी दूर पहुँच सकता है
- पहचान — रथ की आहट से एक रानी को यक़ीन हो गया, पर यक़ीन काफ़ी नहीं था — उसे परखना पड़ा, कि साँवला बाहुक सचमुच वही राजा है जिसे उसने खोया था