अध्याय ३

पाँच नल

चार देवता एक राजा का रूप धर लेते हैं, और एक राजकुमारी को अपने प्रेम की सच्चाई से असली को पहचानना पड़ता है

रास्ते में चार देवता

स्वयंवर की ओर जाते हुए नल के रास्ते में इंद्र, अग्नि, वरुण और यम मिल गए। चारों भी दमयंती को चाहते थे।

उन्होंने नल से कहा — "तुम हमारा दूत बनो। दमयंती के पास जाकर कहो कि हममें से किसी एक को चुन ले।"

नल ने कहा — "मैं ख़ुद दमयंती को चाहता हूँ। मैं यह काम कैसे करूँ?" पर देवताओं के सामने दिया वचन वापस नहीं लिया जा सकता था। नल ने हामी भर दी।

महल में, अदृश्य

देवताओं की शक्ति से नल पहरेदारों की नज़र से बचकर सीधे दमयंती के महल में पहुँच गए। उन्होंने इंद्र, अग्नि, वरुण और यम का संदेश सुनाया।

दमयंती ने सुना, और फिर कहा — "मैं तुम्हें चुन चुकी हूँ, नल। पर तुम कहते हो कि यह संदेश देवताओं का है, तो मैं स्वयंवर में सबके सामने ही चुनूँगी — तुम भी वहाँ रहना, और वे भी। जो होना है, सबके सामने हो।"

नल लौट गए और देवताओं को दमयंती का उत्तर बता दिया।

स्वयंवर में पाँच नल

स्वयंवर के दिन दमयंती जब माला लिए आगे बढ़ी, तो उसने देखा — एक जैसे पाँच नल बैठे हैं। चार देवताओं ने नल का ही रूप धर लिया था।

दमयंती ठिठक गई। उसने आँखें बंद कीं और प्रार्थना की — "जो मैंने हंस से सुनकर नल को मन-ही-मन चुना है, वह सच हो, तो देवता स्वयं मुझे असली नल दिखा दें।"

उसकी प्रार्थना ने काम किया। देवताओं के शरीर में जो लक्षण हैं — बिना पलक झपकाए आँखें, बिना पसीने के त्वचा, ज़मीन को न छूते पाँव, कभी न मुरझाने वाली माला — वे अचानक दिखने लगे। असली नल में पसीना था, धूल थी, परछाईं थी, पलकें झपकती थीं, माला थोड़ी मुरझाई हुई थी।

दमयंती ने असली नल के गले में माला डाल दी।

आठ वरदान

देवता प्रसन्न हुए। हारने पर भी उन्होंने क्रोध नहीं किया — उलटे नल को वरदान दिए।

इंद्र ने नल को वर दिया कि यज्ञों में वे उन्हें देख सकेंगे, और मृत्यु के बाद शुभ लोक पाएँगे। अग्नि ने कहा कि नल जब चाहेंगे, वे उनके सामने प्रकट होंगे, और अंत में अग्नि-जैसे तेजस्वी लोक पाएँगे। यम ने भोजन में अद्भुत स्वाद की क्षमता और धर्म में श्रेष्ठता का वर दिया। वरुण ने कहा कि नल जब चाहेंगे, वे उनके सामने प्रकट होंगे, और उन्हें दिव्य सुगंध वाली मालाएँ मिलेंगी।

आठ वरदान देकर चारों देवता स्वर्ग लौट गए।

टिप्पणी: यह प्रसंग नलोपाख्यान का एक प्रसिद्ध भाग है। देवताओं के दिव्य लक्षण — बिना पलक झपकाए आँखें, बिना पसीने के त्वचा, ज़मीन को न छूते पाँव, अमर माला — मूल कथा में दमयंती की पहचान की कसौटी हैं। वरदानों का ठीक-ठीक बँटवारा अलग-अलग अनुवादों में थोड़ा अलग मिलता है; यहाँ आम तौर पर मिलने वाला रूप लिया गया है। दमयंती के स्वयंवर के प्रसंग में चार प्रमुख देवता — इंद्र, अग्नि, वरुण और यम — सीधे वर के दावेदार बनकर आते हैं। कुछ विद्वानों ने इस वैदिक देव-समूह की प्रमुखता को कथा की प्राचीन परत का एक संकेत माना है। आगे कथा में वायु देव भी दमयंती की पवित्रता की गवाही देते हैं। संवादों में दिए गए हिंदी वाक्य मूल संस्कृत श्लोकों के प्रवाहमय भावार्थ हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।

स्रोत: महाभारत, वनपर्व — नलोपाख्यान, पाँच नल

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

स्वयंवर की ओर जाते हुए नल को रास्ते में कौन मिले?

  • चार ऋषि
  • कुबेर और अश्विनी कुमार
  • इंद्र, अग्नि, वरुण और यम
  • शिव और पार्वती
पूरी कथा पढ़िए — चार देवता, एक चाहत

रास्ते में इंद्र, अग्नि, वरुण और यम नल से मिले।

चारों भी दमयंती को चाहते थे।

उन्होंने नल को अपना दूत बनाकर भेजा।

ऐसा क्यों?

नल ने देवताओं का दूत बनना क्यों स्वीकार किया, जबकि वह ख़ुद दमयंती को चाहता था?

  • क्योंकि देवताओं के सामने दिया वचन वापस नहीं लिया जा सकता था
  • क्योंकि देवताओं ने उसे धमकाया था
  • क्योंकि उसे दमयंती की परवाह नहीं थी
  • क्योंकि वह देवताओं से इनाम चाहता था
पूरी कथा पढ़िए — एक मुश्किल वचन

नल ने देवताओं से कहा कि वह ख़ुद दमयंती को चाहता है।

पर देवताओं के सामने दिया वचन तोड़ा नहीं जा सकता था।

नल हामी भरकर महल की ओर चल पड़े।

क्या हुआ?

नल दमयंती के महल में किस तरह पहुँचे?

  • खुले दरवाज़े से चलकर
  • दमयंती के बुलावे पर
  • खिड़की से चढ़कर
  • देवताओं की शक्ति से पहरेदारों की नज़र से बचकर, अदृश्य होकर
पूरी कथा पढ़िए — अदृश्य दूत

नल स्वयंवर से पहले दमयंती से मिलने गए थे।

देवताओं की शक्ति से वे पहरेदारों की नज़र से बचकर सीधे महल में पहुँचे।

वहाँ उन्होंने चार देवताओं का संदेश सुनाया।

किसने कहा?

"मैं तुम्हें चुन चुकी हूँ, नल। पर मैं स्वयंवर में सबके सामने ही चुनूँगी।" — यह किसने कहा?

  • नल ने दमयंती से
  • दमयंती ने नल से
  • इंद्र ने नल से
  • भीम ने दमयंती से
पूरी कथा पढ़िए — एक सार्वजनिक निर्णय

दमयंती ने महल में ही नल को अपना निर्णय बता दिया था।

पर उसने कहा कि वह यह चुनाव सबके सामने, स्वयंवर में ही करेगी।

इसी वजह से आगे स्वयंवर में असली नल को पहचानने की परीक्षा आती है।

तथ्य

स्वयंवर में दमयंती ने क्या देखा?

  • एक जैसे पाँच नल बैठे हैं
  • नल अकेला बैठा है
  • नल स्वयंवर में आया ही नहीं
  • सभी दावेदार राजा नल जैसे कपड़े पहने हैं
पूरी कथा पढ़िए — पाँच एक जैसे चेहरे

स्वयंवर के दिन दमयंती माला लेकर आगे बढ़ी।

उसने देखा कि नल जैसे पाँच लोग बैठे हैं।

चार देवताओं ने नल का ही रूप धर लिया था।

तथ्य

दमयंती ने असली नल को किन लक्षणों से पहचाना?

  • देवताओं के मुकुट देखकर
  • नल की आवाज़ पहचानकर
  • नल के हाथ में धनुष देखकर
  • देवताओं के पाँव ज़मीन को नहीं छूते थे, पलकें नहीं झपकती थीं, पसीना और परछाईं नहीं थी, माला नहीं मुरझाई थी
पूरी कथा पढ़िए — देवता और मनुष्य का फ़र्क़

दमयंती की प्रार्थना पर देवताओं के दिव्य लक्षण दिखने लगे।

बिना पलक झपकाए आँखें, बिना पसीने के त्वचा, ज़मीन को न छूते पाँव, ताज़ी माला।

असली नल में पसीना, धूल, परछाईं और पलकों की झपक थी — यानी वह मनुष्य था।

क्या हुआ?

असली नल को पहचानने के बाद दमयंती ने क्या किया?

  • चारों देवताओं को प्रणाम किया और लौट गई
  • नल के गले में माला डाल दी
  • फिर से आँखें बंद कर लीं
  • स्वयंवर बीच में ही छोड़ दिया
पूरी कथा पढ़िए — माला असली गले में

देवताओं के लक्षण दिखने के बाद दमयंती को असली नल पहचानने में देर नहीं लगी।

उसने नल के गले में माला डाल दी।

स्वयंवर सबके सामने पूरा हुआ, जैसा दमयंती ने पहले ही कहा था।

ऐसा क्यों?

हारने के बाद देवताओं ने नल को दंड देने के बजाय वरदान क्यों दिए?

  • क्योंकि नल ने उनसे माफ़ी माँगी
  • क्योंकि दमयंती ने उनसे विनती की
  • कथा केवल इतना कहती है कि दमयंती के नल को चुनने के बाद देवता प्रसन्न हुए और उन्होंने वर दिए; इसका विस्तृत कारण कथा में नहीं बताया गया
  • क्योंकि नल ने उन्हें कोई भेंट दी
पूरी कथा पढ़िए — हार पर भी प्रसन्नता

देवता हार गए, पर क्रोधित नहीं हुए।

उन्होंने नल को वरदान दिए — कथा इसका विस्तृत कारण नहीं बताती।

यही आगे नल के जीवन में काम आने वाले वरदान बने।

तथ्य

यम ने नल को कौन-सा वरदान दिया?

  • दिव्य सुगंध वाली मालाएँ
  • यज्ञों में सहभागिता
  • जब चाहें प्रकट होने की क्षमता
  • भोजन में अद्भुत स्वाद, और धर्म में श्रेष्ठता
पूरी कथा पढ़िए — चार देवता, आठ वरदान

इंद्र ने यज्ञों में स्वयं को देखने की क्षमता और मृत्यु के बाद शुभ लोक दिए।

अग्नि ने जब चाहें प्रकट होने का वचन और तेजस्वी लोक दिए।

यम ने भोजन में स्वाद और धर्म में श्रेष्ठता दी; वरुण ने प्रकट होने का वचन और दिव्य सुगंध वाली मालाएँ दीं।

पहेली

हम चार हैं। हम एक राजा का रूप धरकर एक राजकुमारी के सामने बैठे, पर वह अपने सच्चे प्रेम से हमें पहचान गई। हम कौन हैं?

  • इंद्र, अग्नि, वरुण और यम
  • चार ऋषि
  • चार गंधर्व
  • चार असुर
पूरी कथा पढ़िए — हारे हुए देवता, प्रसन्न देवता

चारों देवताओं ने नल का रूप धरकर दमयंती की परीक्षा ली।

दमयंती की प्रार्थना पर उनके दिव्य लक्षण उजागर हो गए।

हारकर भी उन्होंने नल को आठ वरदान दिए।