अध्याय १

यह कथा किसलिए

जुए में सब कुछ हार चुके एक राजा को, वन में, यह कथा सुनाई जाती है — कि हार से लौटना नामुमकिन नहीं है

वन में एक प्रश्न

युधिष्ठिर द्यूत में सब कुछ हार चुके थे — राज्य, वैभव, और बारह साल का वनवास भी उन्हीं पासों की देन था। वे काम्यक वन में बैठे थे, हारे हुए, थके हुए।

तभी ऋषि बृहदश्व वहाँ आए। युधिष्ठिर ने उनसे पूछा — क्या मुझसे भी बड़ा कोई दुर्भाग्यशाली रहा है, जो जुए में इस तरह गिरा हो?

बृहदश्व मुस्कुराए। "एक राजा था," उन्होंने कहा, "जो तुम्हारी तरह जुए में सब कुछ हार बैठा — राज्य, धन, यहाँ तक कि अपनी पत्नी का साथ भी। पर वह लौटा। उसका नाम था नल।"

निषध का राजा

नल निषध देश के राजा थे, वीरसेन के पुत्र। वे घोड़ों की विद्या में अत्यंत निपुण थे, पासों के खेल के शौक़ीन थे और अनेक गुणों से संपन्न थे — आगे कथा उनकी अद्भुत रसोई-कुशलता भी दिखाती है। रूप ऐसा कि लोग उन्हें अश्विनी कुमारों से मिलाते थे।

उतनी ही दूर, विदर्भ देश में, राजा भीम की एक बेटी थी — दमयंती। भीम बरसों तक निःसंतान रहे, जब तक ऋषि दमन ने उन्हें तीन बेटे और यह एक बेटी का वरदान नहीं दिया। दमयंती का रूप ऐसा था कि उसकी चर्चा दूर-दूर के राज्यों तक पहुँचती थी।

दोनों ने एक-दूसरे को कभी नहीं देखा था। पर दोनों एक-दूसरे के बारे में सुनते रहते थे — दरबारियों से, यात्रियों से, हवा में तैरती बातों से — जब तक कि दोनों के मन में एक ही नाम नहीं बस गया।

एक हारे हुए राजा के लिए

बृहदश्व ने युधिष्ठिर से कहा — "नल ने भी राज्य और सुख खोए थे, राजन् — और अंत में उन्हें फिर पाया। उसकी कथा सुनो।"

यही वह कथा है — प्रेम की, एक हंस की, एक शाप की, और एक राजा के लौट आने की।

टिप्पणी: यह कथा महाभारत के वनपर्व में नलोपाख्यान के नाम से आती है — गांगुली के अनुवाद में खंड ५२ से ७९ तक। ऋषि बृहदश्व इसे युधिष्ठिर को उनके द्यूत में हारने और वनवास पर जाने के बाद सुनाते हैं। कथा के अंत में बृहदश्व युधिष्ठिर को पासे का रहस्य (अक्षहृदय) भी सिखाते हैं, ठीक वैसे ही जैसे नल को आगे चलकर ऋतुपर्ण से मिलता है। दमयंती के भाइयों के नाम — दम, दांत, दमन — कुछ अनुवादों में अलग-अलग मिलते हैं; ऋषि का नाम दमन दिया गया है। संवादों में दिए गए हिंदी वाक्य मूल संस्कृत श्लोकों के प्रवाहमय भावार्थ हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।

स्रोत: महाभारत, वनपर्व — नलोपाख्यान, यह कथा किसलिए

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

युधिष्ठिर को नल की कथा कब सुनाई गई?

  • राज्याभिषेक के समय
  • युद्ध शुरू होने से पहले
  • द्यूत में हारकर वनवास के दौरान
  • अज्ञातवास पूरा होने पर
पूरी कथा पढ़िए — हार के बाद एक कथा

युधिष्ठिर द्यूत में राज्य और वैभव हारकर वन में थे।

ऋषि बृहदश्व ने उन्हें सांत्वना देने के लिए नल की कथा सुनाई।

यह कथा महाभारत के वनपर्व में आती है।

किसने कहा?

नल की कथा युधिष्ठिर को किसने सुनाई?

  • ऋषि बृहदश्व ने
  • नारद ने
  • वेदव्यास ने
  • मार्कंडेय ने
पूरी कथा पढ़िए — सांत्वना देने वाला ऋषि

बृहदश्व वन में युधिष्ठिर के पास आए।

युधिष्ठिर ने पूछा कि क्या कोई उनसे भी बड़ा दुर्भाग्यशाली रहा है।

बृहदश्व ने नल की कथा सुनाकर उत्तर दिया।

तथ्य

नल किस देश के राजा थे?

  • विदर्भ के
  • कोसल के
  • चेदि के
  • निषध के
पूरी कथा पढ़िए — निषध का राजा

नल निषध देश के राजा थे, वीरसेन के पुत्र।

नल घोड़ों की विद्या में अत्यंत निपुण थे; पासों के खेल के शौक़ीन थे, और उनकी रसोई-कुशलता आगे बाहुक वाले प्रसंग में सामने आती है।

उनका रूप अश्विनी कुमारों से मिलाया जाता था।

किसका बेटा?

दमयंती किसकी बेटी थी?

  • राजा नल की
  • विदर्भ के राजा भीम की
  • राजा दशरथ की
  • राजा द्रुपद की
पूरी कथा पढ़िए — विदर्भ की राजकुमारी

दमयंती राजा भीम की बेटी थी।

भीम बरसों निःसंतान रहे, जब तक ऋषि दमन ने वरदान नहीं दिया।

उसी वरदान से तीन बेटे और दमयंती का जन्म हुआ।

ऐसा क्यों?

नल और दमयंती एक-दूसरे से प्रेम करने लगे, हालाँकि उन्होंने एक-दूसरे को कभी देखा नहीं था — ऐसा क्यों हुआ?

  • क्योंकि दोनों के बारे में एक-दूसरे के राज्य में लगातार चर्चा होती रहती थी
  • क्योंकि दोनों के माता-पिता ने विवाह तय कर दिया था
  • क्योंकि दोनों एक ही सपने में मिले
  • क्योंकि एक ऋषि ने भविष्यवाणी की थी
पूरी कथा पढ़िए — बिना देखे हुआ प्रेम

नल और दमयंती दूर-दूर के राज्यों में रहते थे और मिले नहीं थे।

पर दोनों के गुण-रूप की चर्चा यात्रियों और दरबारियों के ज़रिए एक-दूसरे तक पहुँचती रहती थी।

इसी से दोनों के मन में एक-दूसरे का नाम बस गया।

किसने कहा?

"एक राजा था, जो तुम्हारी तरह जुए में सब कुछ हार बैठा — राज्य, धन, यहाँ तक कि अपनी पत्नी का साथ भी। पर वह लौटा।" — यह किसने कहा?

  • युधिष्ठिर ने भीम से
  • नल ने दमयंती से
  • व्यास ने अर्जुन से
  • बृहदश्व ने युधिष्ठिर से
पूरी कथा पढ़िए — हार से लौटने की कथा

बृहदश्व ने युधिष्ठिर को नल की कथा का सार पहले ही बता दिया।

नल ने भी राज्य, धन और पत्नी का साथ खोया था।

फिर भी वे लौट आए — यही युधिष्ठिर के लिए सांत्वना थी।

क्या हुआ?

राजा भीम को दमयंती और उसके भाई किस तरह मिले?

  • युद्ध जीतकर
  • ऋषि दमन के वरदान से
  • तप से स्वयं
  • किसी देवता के अवतार के रूप में
पूरी कथा पढ़िए — एक ऋषि का वरदान

राजा भीम बरसों निःसंतान रहे।

ऋषि दमन ने उन्हें तीन बेटों और एक बेटी का वरदान दिया।

वही बेटी दमयंती थी।

तथ्य

नल की शुरुआती पहचान कथा में किस विद्या से सबसे ज़्यादा जुड़ी है?

  • युद्ध और कुश्ती से
  • संगीत और नृत्य से
  • घोड़ों की विद्या से; पासों के वे शौक़ीन थे, और रसोई-कुशलता आगे कथा में सामने आती है
  • ज्योतिष और वैद्यक से
पूरी कथा पढ़िए — एक राजा, कई गुण

नल घोड़ों की विद्या में अत्यंत निपुण थे।

पासों के वे शौक़ीन थे — पासों की असली विद्या उन्हें आगे चलकर ऋतुपर्ण से मिलती है।

उनकी रसोई-कुशलता आगे बाहुक वाले प्रसंग में सामने आती है।

ऐसा क्यों?

बृहदश्व नल की कथा युधिष्ठिर को क्यों सुनाते हैं?

  • केवल मनोरंजन के लिए
  • क्योंकि युधिष्ठिर ने पासे के बारे में पूछा था
  • क्योंकि द्रौपदी ने यह कथा सुनने की इच्छा जताई
  • यह दिखाने के लिए कि जुए में सब कुछ हारने के बाद भी लौटना संभव है
पूरी कथा पढ़िए — हार, फिर वापसी

युधिष्ठिर पूछते हैं कि क्या कोई उनसे भी बड़ा दुर्भाग्यशाली रहा है।

बृहदश्व नल की कथा से जवाब देते हैं — एक राजा जो सब कुछ हारकर भी लौटा।

यही इस पूरी कथा का ढाँचा तय करता है।

पहेली

मैं वह वन हूँ जहाँ एक हारा हुआ राजा बैठा था, जब एक ऋषि ने उसे एक दूसरे राजा की कथा सुनाई। मैं कौन हूँ?

  • काम्यक वन
  • नैमिषारण्य
  • दंडकारण्य
  • चित्रकूट
पूरी कथा पढ़िए — जहाँ कथा शुरू हुई

युधिष्ठिर द्यूत में हारकर काम्यक वन में थे।

वहीं बृहदश्व ने उन्हें नल की कथा सुनाई।

यही कथा अब आगे के अध्यायों में खुलती है।