अध्याय ६

साथ चलने वाला मित्र

यम ने सावित्री को लौट जाने को कहा — उसने उत्तर दिया कि सात क़दम साथ चलने से ही मित्रता बन जाती है, और अपने तर्क से यम को दो वरदान देने पर मजबूर कर दिया

लौट जाने का आग्रह

कुछ दूर चलने के बाद यम ने सावित्री से कहा — "सावित्री, रुक जाओ! लौट जाओ, और अपने पति का अंतिम संस्कार करो। तुम अपने पति के प्रति सारे कर्तव्यों से मुक्त हो चुकी हो। तुम जहाँ तक आ सकती थीं, वहाँ तक आ गई।"

सावित्री ने उत्तर दिया — "मेरे पति जहाँ भी ले जाए जाएँ, या स्वयं जहाँ भी जाएँ, मैं वहीं जाऊँगी — यही सनातन नियम है। मेरी तपस्या के बल पर, अपने बड़ों के प्रति आदर के बल पर, अपने पति के प्रति प्रेम के बल पर, अपने व्रतों के पालन के बल पर, और आपकी ही कृपा से, मेरा मार्ग निर्बाध है। विद्वानों ने कहा है कि किसी के साथ केवल सात क़दम चलने से ही मित्रता बन जाती है। इसी मित्रता का स्मरण कर मैं आपसे कुछ कहना चाहती हूँ।"

पहला वर

सावित्री ने कहा — "जिनकी आत्मा वश में नहीं होती, वे चारों आश्रमों का पालन करके भी पुण्य नहीं पाते। जो धर्म कहलाता है, वह वास्तव में सच्चा ज्ञान है। विद्वानों ने इसी को सबसे बड़ा माना है, चार आश्रमों के क्रम को नहीं।" यह सुनकर यम ने कहा — "तुम्हारे ये शब्द मुझे प्रसन्न करते हैं, ये सही अक्षरों और अर्थों में गुंथे हैं। कोई वर माँगो — सत्यवान के जीवन के सिवा, जो चाहो, मैं दूँगा।"

सावित्री ने कहा — "मेरे श्वसुर राज्य और दृष्टि खोकर वन में रहते हैं। आपकी कृपा से उन्हें उनकी दृष्टि वापस मिले, और वे अग्नि और सूर्य के समान बलशाली हो जाएँ।" यम ने कहा — "यह वर मैं तुम्हें देता हूँ। पर तुम यात्रा से थकी हुई लगती हो — अब लौट जाओ, स्वयं को और मत थकाओ।"

दूसरा वर

सावित्री ने कहा — "अपने पति के पास होते हुए मुझे थकान का कुछ भान नहीं। मेरा मन तो और आगे जाने को दौड़ रहा है। सुनिए, मैं फिर कहती हूँ — संतों के साथ एक भेंट भी अमूल्य है, उनसे मित्रता उससे भी बढ़कर, और उनके साथ का संग कभी व्यर्थ नहीं जाता। इसीलिए सत्पुरुषों के संग में ही रहना चाहिए।" यम ने कहा — "तुम्हारे ये उपयोगी शब्द हृदय को आनंदित करते और ज्ञान बढ़ाते हैं। सत्यवान के जीवन के सिवा, दूसरा वर माँगो।"

सावित्री ने कहा — "मेरे श्वसुर का राज्य पहले छीन लिया गया था — वह उन्हें वापस मिले, और वे कभी अपने धर्म से विमुख न हों। यही दूसरा वर है।" यम ने कहा — "राजा शीघ्र ही अपना राज्य वापस पाएँगे, और अपने धर्म से कभी विचलित नहीं होंगे। अब तुम्हारी यह इच्छा भी पूरी हुई। लौट जाओ, आगे कष्ट मत उठाओ।"

सावित्री रुकी नहीं। "आप सब प्राणियों को अपने नियमों से नियंत्रित करते हैं, और उन्हीं नियमों के अनुसार उन्हें ले जाते हैं, अपनी इच्छा से नहीं — इसीलिए लोग आपको यम कहते हैं। सुनिए, मैं फिर कुछ कहती हूँ — सत्पुरुषों का यह धर्म है कि वे किसी भी प्राणी को मन, वचन, कर्म से हानि न पहुँचाएँ, बल्कि उन्हें प्रेम दें और उनका हक़ अदा करें। सत्पुरुष तो अपने शत्रु पर भी दया दिखाते हैं, जब वह शरण माँगे।" यम ने कहा — "प्यासे को जल के समान तुम्हारे ये शब्द मुझे तृप्त करते हैं। फिर से, सत्यवान के जीवन के सिवा, कोई वर माँगो।"

टिप्पणी: यह प्रसंग गांगुली के अनुवाद में विस्तार से है — सावित्री और यम के बीच का यह संवाद संस्कृत साहित्य के सबसे प्रसिद्ध तर्क-वितर्कों में से एक माना जाता है। "सात क़दम की मित्रता" का सिद्धांत, और सावित्री के धर्म-विषयक भाषण, दोनों मूल पाठ में ज्यों-के-त्यों हैं। विद्वान इस बात पर ज़ोर देते हैं कि सावित्री यम को बल से नहीं, बल्कि वाणी और तर्क से जीतती है। संवादों में दिए गए हिंदी वाक्य मूल संस्कृत श्लोकों के प्रवाहमय भावार्थ हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।

स्रोत: महाभारत, वनपर्व — पतिव्रता-माहात्म्य पर्व, साथ चलने वाला मित्र

अब बताइए — कितना याद रहा?

क्या हुआ?

यम ने कुछ दूर चलने के बाद सावित्री से क्या कहा?

  • कि वह उनका दूत बन जाए
  • कि वह अपने पिता के पास लौट जाए
  • कि वह रुक जाए और लौटकर अपने पति का अंतिम संस्कार करे
  • कि वह भी उनके साथ चले
पूरी कथा पढ़िए — लौटने का आग्रह

यम ने सावित्री को रोकने की कोशिश की।

उन्होंने कहा कि वह अपने कर्तव्यों से मुक्त हो चुकी है और जितना आ सकती थी, आ चुकी है।

सावित्री ने साथ चलने का अपना निश्चय बताया।

किसने कहा?

"मेरे पति जहाँ भी ले जाए जाएँ, या स्वयं जहाँ भी जाएँ, मैं वहीं जाऊँगी — यही सनातन नियम है।" — यह किसने कहा?

  • सावित्री ने यम से
  • यम ने सावित्री से
  • सत्यवान ने सावित्री से
  • नारद ने सावित्री से
पूरी कथा पढ़िए — एक अटल संकल्प

यम ने सावित्री को लौट जाने को कहा।

सावित्री ने कहा कि पति के साथ जाना उसका सनातन कर्तव्य है।

उसने सात क़दम साथ चलने से बनी मित्रता का स्मरण कराया।

क्या हुआ?

सावित्री ने यम के साथ चलने का अधिकार किस बात का हवाला देकर जताया?

  • राजकुमारी होने के अधिकार का
  • यह कि यम ने स्वयं उसे बुलाया था
  • यह कि वह भी एक देवी है
  • यह कि विद्वानों के अनुसार, किसी के साथ केवल सात क़दम चलने से ही मित्रता बन जाती है
पूरी कथा पढ़िए — सात क़दम की मित्रता

सावित्री ने कहा कि उसका मार्ग तप, आदर, प्रेम, व्रत और यम की ही कृपा से निर्बाध है।

उसने विद्वानों के इस कथन का स्मरण कराया कि सात क़दम साथ चलने से मित्रता बनती है।

इसी मित्रता के आधार पर उसने यम से बात करना शुरू किया।

तथ्य

सावित्री का पहला वर क्या था?

  • सौ पुत्रों का वरदान
  • उसके श्वसुर द्युमत्सेन को दृष्टि और बल वापस मिले
  • सत्यवान का जीवन
  • द्युमत्सेन का राज्य वापस मिले
पूरी कथा पढ़िए — पहला वर — दृष्टि

यम ने सावित्री के धर्म संबंधी शब्दों से प्रसन्न होकर वर माँगने को कहा।

सावित्री ने अपने श्वसुर की दृष्टि और बल वापस माँगे।

यम ने यह वर तुरंत दे दिया।

किसने कहा?

"तुम्हारे ये उपयोगी शब्द हृदय को आनंदित करते और ज्ञान बढ़ाते हैं। दूसरा वर माँगो।" — यह किसने कहा?

  • यम ने सावित्री से
  • सावित्री ने यम से
  • नारद ने सावित्री से
  • द्युमत्सेन ने सावित्री से
पूरी कथा पढ़िए — दूसरे वर का प्रस्ताव

सावित्री ने संतों के संग के महत्व पर बात की।

यम प्रसन्न हुए और दूसरा वर माँगने को कहा।

सावित्री ने द्युमत्सेन का खोया राज्य वापस माँगा।

तथ्य

सावित्री का दूसरा वर क्या था?

  • सत्यवान की दीर्घायु
  • अश्वपति के लिए सौ पुत्र
  • स्वयं सावित्री के लिए सौ पुत्र
  • द्युमत्सेन को उनका खोया राज्य वापस मिले, और वे कभी धर्म से विमुख न हों
पूरी कथा पढ़िए — दूसरा वर — राज्य

सावित्री ने द्युमत्सेन के खोए राज्य को वापस माँगा।

साथ ही यह भी माँगा कि वे कभी अपने धर्म से विचलित न हों।

यम ने यह वर भी स्वीकार कर लिया।

ऐसा क्यों?

प्रजा यम को "यम" (नियंता) क्यों कहती है — सावित्री के अपने शब्दों में?

  • क्योंकि वे सबसे शक्तिशाली देवता हैं
  • क्योंकि वे सब प्राणियों को अपने नियमों से नियंत्रित करते और उन्हीं नियमों के अनुसार ले जाते हैं, अपनी इच्छा से नहीं
  • क्योंकि वे कभी किसी को वर नहीं देते
  • क्योंकि वे स्वर्ग के राजा हैं
पूरी कथा पढ़िए — नाम का अर्थ

सावित्री ने यम की प्रशंसा में कहा कि वे नियमों से नियंत्रित होकर, अपनी इच्छा से नहीं, प्राणियों को ले जाते हैं।

इसी कारण उन्हें यम — नियंता — कहा जाता है।

यह सुनकर यम फिर प्रसन्न हुए और तीसरा वर माँगने को कहा।

क्या हुआ?

हर वर के बाद यम सावित्री से क्या कहते रहे?

  • कि वह अपना पति वापस ले जाए
  • कि वह चुप रहे
  • कि वह थक गई है, अब लौट जाए और आगे कष्ट न उठाए
  • कि वह यम के साथ ही रह जाए
पूरी कथा पढ़िए — बार-बार लौटने का आग्रह

हर वर देने के बाद यम सावित्री से लौट जाने को कहते।

पर सावित्री हर बार एक नई बात कहकर बातचीत आगे बढ़ाती रही।

इसी तरह वह धीरे-धीरे यम को और वर देने पर राज़ी करती गई।

क्या हुआ?

सावित्री के शब्दों पर यम की प्रतिक्रिया कैसी रही, हर बार?

  • वे क्रोधित होते रहे
  • वे मौन रहते
  • वे उसे वापस भेजने के लिए बल का प्रयोग करते
  • वे बार-बार उसके शब्दों की प्रशंसा करते और प्रसन्न होकर एक और वर देने की पेशकश करते
पूरी कथा पढ़िए — प्रशंसा और वर

सावित्री हर बार धर्म और सत्पुरुषों के संग पर बात करती।

यम हर बार उसके शब्दों से प्रसन्न होकर एक और वर देने की पेशकश करते।

इसी क्रम में उसने पहले दो वर पा लिए।

पहेली

मैं वह नियम हूँ जिसके अनुसार किसी के साथ केवल सात क़दम चलने से ही मित्रता बन जाती है। सावित्री ने मुझे यम के सामने क्यों याद दिलाया?

  • यह जताने के लिए कि सात क़दम साथ चलने से बनी मित्रता का हवाला देकर वह यम से अपनी बात आगे रख सकती है
  • यह दिखाने के लिए कि वह थक चुकी है
  • यह पूछने के लिए कि यम कहाँ जा रहे हैं
  • केवल एक शास्त्र-वचन के रूप में, बिना किसी उद्देश्य के
पूरी कथा पढ़िए — मित्रता का हवाला

सावित्री ने यम के साथ चलते हुए यह नियम याद दिलाया।

इसी मित्रता का हवाला देकर उसने यम से बातचीत जारी रखी।

यही बातचीत आगे और वरों तक जा पहुँचती है।