सावित्री-सत्यवान

सावित्री-सत्यवान — ८ अध्याय, ८० सवाल। महाभारत, वनपर्व — पतिव्रता-माहात्म्य पर्व।

यह कथा महाभारत के वनपर्व में आती है — पतिव्रता-माहात्म्य पर्व, गांगुली के अनुवाद में खंड २९१ से २९७ तक। ऋषि मार्कंडेय इसे युधिष्ठिर को सुनाते हैं, जयद्रथ द्वारा द्रौपदी के अपहरण के प्रयास के बाद। यह कथा पूरे गांगुली अनुवाद को सीधे पढ़कर लिखी गई है, किसी सारांश या पुनर्कथन से नहीं। संवादों में दिए गए हिंदी वाक्य मूल संस्कृत श्लोकों के प्रवाहमय भावार्थ हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।