अध्याय १

यह कथा किसलिए

द्रौपदी के अपहरण के प्रयास के बाद युधिष्ठिर सबसे ज़्यादा उसी के लिए चिंतित थे — मार्कंडेय ने एक ऐसी स्त्री की कथा सुनाई, जिसने स्वयं यम से अपने पति को वापस माँग लिया

द्रौपदी के लिए एक चिंता

जयद्रथ द्रौपदी को बलपूर्वक वन से उठा ले गया था, हालाँकि बाद में उसे छुड़ा लिया गया। इस घटना ने युधिष्ठिर को गहरे सोच में डाल दिया।

युधिष्ठिर ने ऋषि मार्कंडेय से कहा — "मुझे अपने लिए, अपने भाइयों के लिए, या खोए हुए राज्य के लिए उतना दुःख नहीं होता, जितना द्रौपदी के लिए होता है। जब हम जुए में हारे थे, तब कृष्णा ही थी जिसने हमें उबारा। क्या आपने कभी ऐसी किसी सती और श्रेष्ठ स्त्री को देखा या सुना है, जो द्रौपदी के समान हो?"

मार्कंडेय ने कहा — "सुनो, राजन्, कैसे सावित्री नाम की एक राजकुमारी ने सती स्त्रियों का सारा पुण्य पूरी तरह पा लिया था।"

एक और कथा, उसी वन में

यह कथा भी उसी वनपर्व में आती है, जहाँ बृहदश्व नल की कथा सुना चुके हैं। पर इस बार कथाकार मार्कंडेय हैं, और सांत्वना का ढंग अलग है — यहाँ एक स्त्री स्वयं मृत्यु के देवता से अपने पति को वापस जीतकर लाती है।

मार्कंडेय ने कहना शुरू किया — "मद्र देश में एक राजा था, अश्वपति नाम का। वह धर्मात्मा और अत्यंत पवित्र था, ब्राह्मणों की सेवा करता, वचन का पक्का, इंद्रियों पर संयम रखने वाला, यज्ञप्रिय, दानी, और प्रजा दोनों — नगर और गाँव — का प्रिय था। पर संतान न होने से वह दुःखी था।"

टिप्पणी: यह कथा महाभारत के वनपर्व में पतिव्रता-माहात्म्य पर्व के नाम से आती है — गांगुली के अनुवाद में खंड २९१ से २९७ तक। यह ठीक उसी वनपर्व का हिस्सा है जहाँ नल-दमयंती की कथा भी आती है, पर सुनाने वाले ऋषि अलग हैं — नल की कथा बृहदश्व सुनाते हैं, सावित्री की कथा मार्कंडेय। दोनों कथाओं का उद्देश्य एक ही है — युधिष्ठिर को सांत्वना देना, दिखाना कि विपत्ति से लौटना संभव है। संवादों में दिए गए हिंदी वाक्य मूल संस्कृत श्लोकों के प्रवाहमय भावार्थ हैं, शब्दशः अनुवाद नहीं।

स्रोत: महाभारत, वनपर्व — पतिव्रता-माहात्म्य पर्व, यह कथा किसलिए

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

युधिष्ठिर को यह कथा किस घटना के बाद सुनाई गई?

  • अज्ञातवास के दौरान
  • कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद
  • जयद्रथ द्वारा द्रौपदी के अपहरण के प्रयास के बाद
  • राज्याभिषेक के समय
पूरी कथा पढ़िए — द्रौपदी के लिए एक चिंता

जयद्रथ द्रौपदी को वन से बलपूर्वक उठा ले गया था, हालाँकि बाद में छुड़ा लिया गया।

इस घटना ने युधिष्ठिर को गहरे सोच में डाल दिया।

उन्होंने मार्कंडेय से पूछा कि क्या उन्होंने द्रौपदी जैसी कोई सती स्त्री देखी है।

किसने कहा?

"सुनो, राजन्, कैसे सावित्री नाम की एक राजकुमारी ने सती स्त्रियों का सारा पुण्य पूरी तरह पा लिया था।" — यह किसने कहा?

  • मार्कंडेय ने युधिष्ठिर से
  • बृहदश्व ने युधिष्ठिर से
  • नारद ने अश्वपति से
  • वेदव्यास ने अर्जुन से
पूरी कथा पढ़िए — एक और कथाकार

युधिष्ठिर ने द्रौपदी के समान सती स्त्री के बारे में पूछा।

मार्कंडेय ने सावित्री की कथा से उत्तर दिया।

यह कथा भी उसी वनपर्व में आती है, जहाँ बृहदश्व नल की कथा सुना चुके हैं।

तथ्य

अश्वपति किस देश के राजा थे?

  • विदर्भ के
  • शाल्व के
  • निषध के
  • मद्र के
पूरी कथा पढ़िए — मद्र देश का राजा

अश्वपति मद्र देश के राजा थे।

वे धर्मात्मा, ब्राह्मणों की सेवा करने वाले, वचन के पक्के और संयमी थे।

नगर और गाँव, दोनों की प्रजा उन्हें प्रिय थी।

ऐसा क्यों?

अश्वपति दुःखी क्यों थे?

  • राज्य छोटा होने से
  • उनकी कोई संतान नहीं थी
  • शत्रुओं से घिरे होने से
  • प्रजा उनसे नाराज़ थी
पूरी कथा पढ़िए — एक अधूरी इच्छा

अश्वपति हर गुण से संपन्न राजा थे।

पर उनकी कोई संतान नहीं थी, और इससे वे दुःखी रहते थे।

यही दुःख आगे की कथा की शुरुआत बनता है।

किसने कहा?

"मुझे अपने लिए, अपने भाइयों के लिए, या खोए हुए राज्य के लिए उतना दुःख नहीं होता, जितना द्रौपदी के लिए होता है।" — यह किसने कहा?

  • युधिष्ठिर ने मार्कंडेय से
  • भीम ने युधिष्ठिर से
  • अर्जुन ने कृष्ण से
  • नकुल ने सहदेव से
पूरी कथा पढ़िए — सबसे गहरी चिंता

जयद्रथ की घटना के बाद युधिष्ठिर बहुत चिंतित थे।

उन्होंने कहा कि उन्हें अपने राज्य से भी ज़्यादा द्रौपदी की चिंता है।

मार्कंडेय ने इसी के उत्तर में सावित्री की कथा सुनाई।

क्या हुआ?

जुए में हारने के समय द्रौपदी ने पांडवों के लिए क्या किया था — याद कीजिए युधिष्ठिर के अपने शब्दों से?

  • उसने राजा दुर्योधन से युद्ध किया
  • वह चुपचाप महल छोड़कर चली गई
  • उसने पांडवों को जुआ खेलने से रोका
  • युधिष्ठिर के अनुसार, वही थी जिसने उन्हें उस विपत्ति से उबारा
पूरी कथा पढ़िए — पहले भी एक उद्धार

युधिष्ठिर ने याद किया कि जुए में हारने पर द्रौपदी ने ही उन्हें उबारा था।

यही याद द्रौपदी के प्रति उनकी गहरी चिंता की जड़ है।

मार्कंडेय की कथा इसी चिंता का उत्तर बनकर आती है।

तथ्य

अश्वपति के कौन-से गुण कथा में गिनाए गए हैं — याद कीजिए?

  • केवल युद्ध-कौशल
  • धर्मात्मा, ब्राह्मणों के सेवक, वचन के पक्के, संयमी, दानी, प्रजा-प्रिय
  • केवल धन-संपत्ति
  • केवल सुंदरता
पूरी कथा पढ़िए — एक गुणी राजा

मार्कंडेय ने अश्वपति का परिचय कई गुणों के साथ दिया।

धर्मात्मा, वचन के पक्के, इंद्रियों पर संयम रखने वाले, दानी।

नगर और गाँव दोनों की प्रजा उन्हें प्रिय थी।

ऐसा क्यों?

मार्कंडेय ने युधिष्ठिर को सावित्री की कथा सुनाने का फ़ैसला क्यों किया?

  • क्योंकि युधिष्ठिर ने पासों के बारे में पूछा था
  • क्योंकि द्रौपदी ने यह कथा सुनने की इच्छा जताई
  • युधिष्ठिर के द्रौपदी जैसी सती स्त्री के बारे में पूछने के उत्तर में
  • क्योंकि यह ऋतु का पर्व था
पूरी कथा पढ़िए — एक सवाल, एक कथा

युधिष्ठिर ने पूछा कि क्या द्रौपदी जैसी कोई सती स्त्री हुई है।

मार्कंडेय ने सावित्री की कथा से उत्तर दिया।

यही कथा अब आगे के अध्यायों में खुलती है।

तथ्य

यह कथा महाभारत के किस पर्व में, किस नाम से आती है?

  • शांति पर्व में, नल पर्व के नाम से
  • सभा पर्व में, द्रौपदी पर्व के नाम से
  • उद्योग पर्व में
  • वनपर्व में, पतिव्रता-माहात्म्य पर्व के नाम से
पूरी कथा पढ़िए — कथा का स्थान

यह कथा महाभारत के वनपर्व में आती है।

इसका नाम है — पतिव्रता-माहात्म्य पर्व।

यह नल-दमयंती कथा के बाद, उसी वनपर्व के आगे के हिस्से में आती है।

पहेली

मैं वह ऋषि हूँ जो युधिष्ठिर को यह कथा सुनाता हूँ — नल की कथा सुनाने वाले ऋषि से अलग। मैं कौन हूँ?

  • मार्कंडेय
  • बृहदश्व
  • वेदव्यास
  • नारद
पूरी कथा पढ़िए — कथा सुनाने वाला ऋषि

मार्कंडेय ने युधिष्ठिर को सावित्री की कथा सुनाई।

यह द्रौपदी के प्रति उनकी चिंता के उत्तर में हुआ।

आगे यह कथा अश्वपति और उनकी पुत्री सावित्री से शुरू होती है।