अध्याय ६

एक पायल

सुनार ने रानी की चुराई हुई पायल का दोष कोवलन पर मढ़ दिया — राजा ने बिना जाँच किए मृत्युदंड का आदेश दे दिया

सुनार

बाज़ार में कोवलन की भेंट राजकीय सुनार से हुई। सुनार ने पायल की बारीक साज-सज्जा देखी — भीतर जड़े माणिक्य और हीरे — और पहचान लिया कि यह पायल रानी कोप्पेरुंदेवी की चुराई हुई पायल जैसी ही है, जो असल में उसी सुनार ने चुराई थी। उसने कोवलन से कहा — "यह पायल केवल महारानी ही माँग सकती हैं। मैं राजा को सूचित करने जाता हूँ, तब तक मेरी छोटी कुटिया के पास प्रतीक्षा करें।"

सुनार सीधा राजा के पास गया और झूठा आरोप लगाया कि एक विदेशी, जो उसकी कुटिया के पास छिपा है, महल की पायल चुराकर लाया है। उस समय रानी, दरबार की नर्तकियों के कारण रूठकर, सिरदर्द के बहाने राजा को छोड़ गई थीं, और राजा उन्हें मनाने उनके कक्ष की ओर जा रहा था। इसी बीच सुनार पहुँचा, और राजा नेडुंजेलियन ने बिना कोई जाँच किए नगर-रक्षकों को आदेश दिया — "यदि तुम्हें मेरी पत्नी की खोई हुई पायल किसी चतुर चोर के पास मिले, तो उसे मार डालो, और पायल यहाँ ले आओ।"

निष्पादन

रक्षकों को पहली नज़र में लगा कि "इस व्यक्ति का रूप-रंग मृत्युदंड के योग्य नहीं दिखता।" पर सुनार ने उन्हें चोरों की आठ चालों पर लंबा भाषण देकर मना लिया। तब वहीं मौजूद एक अनपढ़ व्यक्ति ने, नशे और उतावलेपन में, अपनी चमकती तलवार कोवलन पर चला दी। कोवलन गिर पड़ा, रक्त बहने लगा — और इस अन्याय के कारण, कथा कहती है, पांड्य राज्य का सदा-सीधा राजदंड टेढ़ा हो गया।

सुनार का नाम कथा में कहीं नहीं दिया गया — वह केवल "राजकीय सुनार" या "छली सुनार" कहलाता है। यह बिना मुक़दमे और बिना जाँच के दिया गया राजकीय वध था; आदेश राजा का था, और आदेश के पालन के दौरान कोवलन वहीं मार गिराया गया।

स्रोत: तमिल पंचकाव्य — सिलप्पदिकारम् (परंपरा से इलंगो अडिगल रचित), एक पायल

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

सुनार ने कोवलन की पायल देखकर क्या पहचाना?

  • कि यह एक नकली पायल है
  • कि यह किसी और सुनार की बनाई हुई है
  • कि यह रानी कोप्पेरुंदेवी की चुराई हुई पायल जैसी ही है
  • कि यह एक पुरानी, टूटी हुई पायल है
पूरी कथा पढ़िए — एक ख़तरनाक पहचान

सुनार ने कोवलन की पायल को रानी की चुराई हुई पायल जैसा पहचाना।

असल में यह पायल उसी सुनार ने चुराई थी — उसने कोवलन पर दोष मढ़ने का निश्चय किया।

किसने कहा?

"यदि तुम्हें मेरी पत्नी की खोई हुई पायल किसी चतुर चोर के पास मिले, तो उसे मार डालो।" — यह किसने कहा?

  • राजा नेडुंजेलियन ने नगर-रक्षकों से
  • सुनार ने रक्षकों से
  • रानी कोप्पेरुंदेवी ने स्वयं
  • मंत्री ने राजा से
पूरी कथा पढ़िए — बिना जाँच का आदेश

राजा नेडुंजेलियन ने बिना कोई जाँच किए यह आदेश दिया।

उस समय राजा रूठी हुई रानी को मनाने जा रहा था, और सुनार के आरोप पर उसने तुरंत आदेश दे दिया।

ऐसा क्यों?

राजा ने किन परिस्थितियों में बिना जाँच किए आदेश दिया?

  • क्योंकि उसे कोवलन से पुरानी शत्रुता थी
  • क्योंकि सुनार राजा का रिश्तेदार था
  • क्योंकि नगर में चोरी की घटनाएँ बहुत बढ़ गई थीं
  • उस समय राजा रूठी हुई रानी को मनाने जा रहा था; तभी सुनार ने आरोप लगाया और राजा ने बिना जाँच तुरंत आदेश दे दिया
पूरी कथा पढ़िए — जिन परिस्थितियों में आदेश हुआ

रानी दरबार की नर्तकियों के कारण रूठकर राजा को छोड़ गई थीं।

राजा उन्हें मनाने जा रहा था, तभी सुनार पहुँचा और राजा ने बिना जाँच आदेश दे दिया। राजा के मन में ठीक क्या था, यह पाठ नहीं बताता।

तथ्य

कोवलन पर तलवार किसने चलाई?

  • स्वयं राजा नेडुंजेलियन ने
  • वहाँ मौजूद एक अनपढ़ व्यक्ति ने, जो नशे की हालत में था
  • सुनार ने स्वयं
  • राजा ने स्वयं
पूरी कथा पढ़िए — एक अव्यवस्थित वध

यह बिना मुक़दमे और बिना जाँच के दिया गया राजकीय वध था; आदेश राजा का था।

वहाँ मौजूद एक अनपढ़ व्यक्ति ने, नशे की हालत में, तलवार चला दी।

पाठ उसे कोई पद नहीं देता; अनुवादों में उसका वर्णन अलग-अलग मिलता है।

तथ्य

रक्षकों की पहली प्रतिक्रिया क्या थी जब उन्होंने कोवलन को देखा?

  • उन्हें लगा कि उसका रूप-रंग मृत्युदंड के योग्य नहीं दिखता
  • उन्होंने तुरंत उसे मार डालने की माँग की
  • उन्होंने उसे तुरंत पहचान लिया
  • उन्होंने सुनार पर ही संदेह किया
पूरी कथा पढ़िए — पहली झिझक

रक्षकों को पहली नज़र में लगा कि कोवलन का रूप-रंग मृत्युदंड के योग्य नहीं दिखता।

सुनार ने उन्हें चोरों की आठ चालों पर भाषण देकर मना लिया।

क्या हुआ?

राजदंड को कथा में क्या हुआ बताया गया है?

  • वह टूट गया
  • वह और मज़बूत हो गया
  • इसका कोई उल्लेख नहीं है
  • इस अन्याय के कारण वह टेढ़ा हो गया
पूरी कथा पढ़िए — एक प्रतीकात्मक टेढ़ापन

कथा कहती है कि इस अन्याय के कारण पांड्य राज्य का सदा-सीधा राजदंड टेढ़ा हो गया।

यह टेढ़ापन आगे राजा की मृत्यु से ही सीधा होता है।

तथ्य

सुनार का नाम कथा में क्या दिया गया है?

  • सुभद्र
  • कथा में उसका कोई नाम नहीं दिया गया, केवल "राजकीय सुनार" या "छली सुनार" कहा गया है
  • रत्नकार
  • वज्र
पूरी कथा पढ़िए — एक अनाम खलनायक

सुनार का कोई नाम कथा में नहीं दिया गया।

उसे केवल "राजकीय सुनार" या "छली सुनार" कहा गया है।

ऐसा क्यों?

सुनार ने कोवलन के पास राजा को सूचित करने का बहाना क्यों बनाया?

  • ताकि पायल की सही क़ीमत तय हो सके
  • क्योंकि राजा की अनुमति के बिना कोई व्यापार नहीं हो सकता था
  • ताकि वह असली अपराध छिपा सके
  • क्योंकि वह कोवलन को ठगना चाहता था, हत्या नहीं
पूरी कथा पढ़िए — अपना अपराध छिपाना

सुनार ने अपनी ख़ुद की चोरी उजागर होने से पहले कोवलन को दोषी घोषित करने का निश्चय किया।

वह सीधा राजा के पास गया और झूठा आरोप लगाया।

तथ्य

कोवलन पर तलवार चलाने वाले को कथा में कैसा बताया गया है?

  • राजा का सेनापति
  • सुनार का सहायक
  • नगर का मुख्य रक्षक
  • एक अनपढ़ व्यक्ति, जो नशे की हालत में था
पूरी कथा पढ़िए — आदेश राजा का, हाथ नशे में

दिक्षितार के शब्द हैं — "नशे की हालत में एक अनपढ़ व्यक्ति"।

सैनिक, रक्षक या जल्लाद जैसा कोई पद पाठ में तय नहीं है; अनुवादों में यह अलग-अलग मिलता है।

तथ्य

यह अन्याय किस राज्य की राजधानी में हुआ?

  • मदुरै, पांड्य राज्य की राजधानी
  • पुहार, चोल राज्य की राजधानी
  • वंजि, चेर राज्य की राजधानी
  • कोई राजधानी नहीं, बल्कि एक छोटा गाँव
पूरी कथा पढ़िए — मदुरै की घटना

यह अन्याय मदुरै में हुआ, जो पांड्य राज्य की राजधानी थी।

यहीं से कथा का दूसरा खंड — मदुरै-खंड — अपने चरम पर पहुँचता है।