सिलप्पदिकारम्

सिलप्पदिकारम् — १० अध्याय, १०० सवाल। तमिल पंचकाव्य — सिलप्पदिकारम् (परंपरा से इलंगो अडिगल रचित)।

सिलप्पदिकारम् एक तमिल साहित्यिक महाकाव्य है, पुराण नहीं — तमिल के पाँच महाकाव्यों में से एक। यह कथा वी. आर. रामचंद्र दिक्षितार के 1939 के अंग्रेज़ी अनुवाद (ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस) को सीधे पढ़कर लिखी गई है, किसी सारांश से नहीं। रचनाकाल पर विद्वानों में बड़ा मतभेद है — दूसरी शताब्दी से लेकर पाँचवीं–छठी शताब्दी तक के प्रस्ताव हैं, कोई एक निश्चित तिथि नहीं दी जा सकती। परंपरा के अनुसार इसके रचयिता चेर राजकुमार इलंगो अडिगल हैं, पर यह भी विवादित है; उनका धर्म भी निश्चित नहीं — जैन, शैव और बौद्ध, तीनों तरफ़ के संकेत कथा में मिलते हैं। यह कथा देवी कन्नगी/पत्तिनी के माध्यम से हिंदू परंपरा में प्रवेश करती है।