सिलप्पदिकारम्
सिलप्पदिकारम् — १० अध्याय, १०० सवाल। तमिल पंचकाव्य — सिलप्पदिकारम् (परंपरा से इलंगो अडिगल रचित)।
सिलप्पदिकारम् एक तमिल साहित्यिक महाकाव्य है, पुराण नहीं — तमिल के पाँच महाकाव्यों में से एक। यह कथा वी. आर. रामचंद्र दिक्षितार के 1939 के अंग्रेज़ी अनुवाद (ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस) को सीधे पढ़कर लिखी गई है, किसी सारांश से नहीं। रचनाकाल पर विद्वानों में बड़ा मतभेद है — दूसरी शताब्दी से लेकर पाँचवीं–छठी शताब्दी तक के प्रस्ताव हैं, कोई एक निश्चित तिथि नहीं दी जा सकती। परंपरा के अनुसार इसके रचयिता चेर राजकुमार इलंगो अडिगल हैं, पर यह भी विवादित है; उनका धर्म भी निश्चित नहीं — जैन, शैव और बौद्ध, तीनों तरफ़ के संकेत कथा में मिलते हैं। यह कथा देवी कन्नगी/पत्तिनी के माध्यम से हिंदू परंपरा में प्रवेश करती है।
- यह कथा किसलिए — एक पायल की कथा — जिसमें एक राजा की मृत्यु होती है, एक नगर जलता है, और एक स्त्री देवी बन जाती है
- पुहार में विवाह — कावेरी के मुहाने पर बसा बंदरगाह-नगर पुहार — जहाँ एक बारह वर्ष की व्यापारी-पुत्री का विवाह एक सोलह वर्ष के व्यापारी-पुत्र से हुआ
- माधवी — उर्वशी की वंश-परंपरा की नर्तकी, जिसके पहले नृत्य पर राजा ने पुरस्कार दिया — और जिसकी माला कोवलन ने 1,008 कलंजु में ख़रीद ली
- गीत जो चुभ गए — समुद्र-तट पर एक गीत-प्रतियोगिता में कोवलन ने ख़ुद गाया, माधवी ने उत्तर में गाया — और कोवलन ने अपने ही संदेह में उसे छोड़ दिया
- मदुरै की राह — कन्नगी के पास लौटकर, निर्धन हो चुके कोवलन ने उसे क्षमा माँगी — कन्नगी ने बिना उलाहना दिए उसे स्वीकार किया, और दोनों मदुरै की ओर निकल पड़े
- एक पायल — सुनार ने रानी की चुराई हुई पायल का दोष कोवलन पर मढ़ दिया — राजा ने बिना जाँच किए मृत्युदंड का आदेश दे दिया
- राजसभा में कन्नगी — सूर्य ने साक्षी देकर कहा — "वह चोर नहीं था" — फिर कन्नगी ने राजसभा में अपनी दूसरी पायल तोड़कर सच्चाई सिद्ध कर दी
- मदुरै जलती है — कन्नगी ने अपना बायाँ स्तन उखाड़कर नगर को शाप दिया — देवी मदुरापति ने प्रकट होकर बताया कि यह मृत्यु एक पूर्वजन्म के ऋण का फल थी
- हिमालय का पत्थर — पहाड़ी कन्याओं ने पहली बार कन्नगी को देवी माना — फिर राजा चेंगुट्टुवन उत्तर की ओर चला, हिमालय से पत्थर लाकर उसकी मूर्ति गढ़ने के लिए
- पत्तिनी — आज भी केरल और श्रीलंका में पत्तिनी की पूजा होती है — एक तमिल काव्य से निकली देवी, जो सदियों बाद भी लोगों को जोड़े हुए है