अध्याय ३

माधवी

उर्वशी की वंश-परंपरा की नर्तकी, जिसके पहले नृत्य पर राजा ने पुरस्कार दिया — और जिसकी माला कोवलन ने 1,008 कलंजु में ख़रीद ली

एक शाप से जुड़ी वंश-परंपरा

माधवी एक वंश-परंपरागत नर्तकी थी। कथा के अनुसार उसका वंश एक शाप से जुड़ा है — ऋषि अगस्त्य ने इंद्र के पुत्र जयंत और अप्सरा उर्वशी को उनके अनुचित व्यवहार के कारण शाप दिया। जयंत को विंध्य की पहाड़ियों में बाँस के रूप में जन्म लेना पड़ा, और उर्वशी को पृथ्वी पर नर्तकी के रूप में; उर्वशी ने मंच पर अपनी कला दिखाकर उस शाप से मुक्ति पाई। माधवी उसी उर्वशी की वंश-परंपरा में जन्मी थी। पाँच वर्ष की आयु से उसे नृत्य और संगीत की शिक्षा दी गई, सात वर्षों तक, और बारह वर्ष की आयु में उसने राजदरबार में अपना पहला नृत्य प्रस्तुत किया।

उसका नृत्य इतना निर्दोष और शास्त्रसम्मत था कि राजा ने प्रसन्न होकर उसे हरे पत्तों की माला और 1,008 कलंजु स्वर्ण दिया — पहली बार मंच पर उतरने वाली उस नर्तकी को दिया जाने वाला प्रथागत पुरस्कार, जो हाथ में ताल-दंड (तलैक्कोल) लेकर नृत्य करती थी। इसके बाद माधवी ने एक माला अपनी एक सेविका को दी और उसे नगर की उस सड़क पर खड़ा किया जहाँ धनी नागरिक आते-जाते थे, और घोषणा करवाई कि इस माला का मूल्य उत्तम स्वर्ण के 1,008 कलंजु है, और जो इसे ख़रीदेगा, वही — दिक्षितार के शब्दों में — हमारी इस लता-सी कन्या का "पति" बनेगा, यानी उसका चुना हुआ साथी या संरक्षक; यह कन्नगी के वैदिक विवाह जैसा विवाह नहीं था। (दिक्षितार की टिप्पणी है कि माला स्वयं इतनी क़ीमती नहीं थी; वह माधवी का प्रतीक थी, जिसकी क़ीमत 1,008 कलंजु मानी गई।)

कोवलन का चुनाव

कोवलन ने वह माला ख़रीद ली और माधवी के कक्ष में प्रवेश किया। वह उसके आकर्षण में इतना बँध गया कि अपना घर और पत्नी दोनों भूल गया। इसके बाद वह अपना अधिकांश समय और धन माधवी के साथ बिताने लगा, कन्नगी को घर पर अकेला छोड़कर। कन्नगी ने न कोई शिकायत की, न विरोध — वह प्रतीक्षा करती रही, अपनी मर्यादा और धैर्य के साथ।

कोवलन के माता-पिता को भी कन्नगी की चुप्पी के पीछे छिपे दुःख का अनुमान था, पर उन्होंने भी उसे स्नेह और सम्मान के साथ रखा। माधवी के साथ बीते इन वर्षों में कोवलन और माधवी की एक बेटी भी हुई — मणिमेकलै — जिसकी अपनी कथा आगे तमिल साहित्य में अलग से मिलती है।

स्रोत: तमिल पंचकाव्य — सिलप्पदिकारम् (परंपरा से इलंगो अडिगल रचित), माधवी

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

माधवी किस तरह की स्त्री थी?

  • एक राजकुमारी
  • एक व्यापारी की बेटी
  • एक वंश-परंपरागत नर्तकी
  • एक तपस्विनी
पूरी कथा पढ़िए — वंश-परंपरागत नर्तकी

माधवी एक ऐसे वंश की नर्तकी थी जिसमें नृत्य कई पीढ़ियों से चला आ रहा था।

उसका वंश एक शाप से जुड़ा बताया जाता है।

किसने कहा?

माधवी की वंश-परंपरा जिस शाप से जुड़ी है, वह शाप किसने दिया था?

  • ऋषि अगस्त्य ने
  • ऋषि दुर्वासा ने
  • ऋषि विश्वामित्र ने
  • देवी सरस्वती ने
पूरी कथा पढ़िए — एक पौराणिक शाप

ऋषि अगस्त्य ने इंद्र के पुत्र जयंत और अप्सरा उर्वशी को शाप दिया।

जयंत बाँस बने, उर्वशी पृथ्वी पर नर्तकी के रूप में जन्मीं।

माधवी उर्वशी की वंश-परंपरा की मानी जाती है।

ऐसा क्यों?

माधवी के नृत्य के बाद राजा ने उसे क्या दिया?

  • केवल एक प्रशंसा-पत्र
  • एक महल
  • राज्य का एक गाँव
  • हरे पत्तों की माला और 1,008 कलंजु स्वर्ण, जो पहली बार मंच पर उतरने वाली ताल-दंडधारी नर्तकी को दिया जाने वाला प्रथागत पुरस्कार था
पूरी कथा पढ़िए — राजा का पुरस्कार

नृत्य निर्दोष और शास्त्रसम्मत था, इसलिए राजा ने उसे हरे पत्तों की माला और 1,008 कलंजु स्वर्ण दिया।

यह पहली बार मंच पर उतरने वाली ताल-दंडधारी नर्तकी को दिया जाने वाला प्रथागत पुरस्कार था।

तथ्य

माधवी की माला के लिए सड़क पर कितने मूल्य की घोषणा करवाई गई?

  • 108 कलंजु स्वर्ण
  • 1,008 कलंजु उत्तम स्वर्ण
  • 10,008 कलंजु स्वर्ण
  • कोई मूल्य घोषित नहीं हुआ था
पूरी कथा पढ़िए — माला की घोषणा

माधवी ने माला अपनी सेविका को देकर सड़क पर उसका मूल्य 1,008 कलंजु उत्तम स्वर्ण घोषित करवाया।

जो इसे ख़रीदता, वह उसका पति बनता — कोवलन ने माला ख़रीदी।

तथ्य

माधवी को कितनी आयु से नृत्य-शिक्षा दी गई, और कितने वर्षों तक?

  • पाँच वर्ष की आयु से, सात वर्षों तक
  • दस वर्ष की आयु से, तीन वर्षों तक
  • जन्म से ही, बीस वर्षों तक
  • पंद्रह वर्ष की आयु से
पूरी कथा पढ़िए — लंबी तैयारी

माधवी को पाँच वर्ष की आयु से सात वर्षों तक नृत्य और संगीत की शिक्षा दी गई।

बारह वर्ष की आयु में उसने राजदरबार में अपना पहला नृत्य प्रस्तुत किया।

क्या हुआ?

कोवलन का चुनाव क्या था?

  • उसने माला ख़रीदने से इनकार किया
  • उसने कन्नगी को साथ लेकर माधवी का नृत्य देखा
  • उसने माधवी को अपने घर में बसाया
  • उसने 1,008 कलंजु में माधवी की माला ख़रीदी और उसके कक्ष में चला गया
पूरी कथा पढ़िए — एक बड़ा निर्णय

कोवलन ने 1,008 कलंजु स्वर्ण में माधवी की माला ख़रीदी।

इसके बाद वह अपना घर और पत्नी भूल गया, और अपना अधिकांश समय और धन माधवी के साथ बिताने लगा।

तथ्य

कन्नगी ने कोवलन के इस चुनाव पर क्या प्रतिक्रिया दी?

  • उसने अपने पिता के घर जाना चुना
  • कोई शिकायत या विरोध नहीं किया, चुपचाप प्रतीक्षा करती रही
  • उसने कोवलन से तलाक़ माँगा
  • उसने माधवी से मिलने की कोशिश की
पूरी कथा पढ़िए — मौन प्रतीक्षा

कन्नगी ने न कोई शिकायत की, न विरोध।

वह अपनी मर्यादा और धैर्य के साथ प्रतीक्षा करती रही।

ऐसा क्यों?

कोवलन के माता-पिता ने कन्नगी को कैसे रखा, और क्यों?

  • उसे घर से निकाल दिया
  • उन्होंने उसे कोवलन के विरुद्ध भड़काया
  • उन्हें उसकी चुप्पी के पीछे छिपे दुःख का अनुमान था, फिर भी उन्होंने उसे स्नेह और सम्मान से रखा
  • उन्होंने इस पूरे विषय की उपेक्षा की
पूरी कथा पढ़िए — सास-ससुर का स्नेह

कोवलन के माता-पिता को कन्नगी की चुप्पी के पीछे छिपे दुःख का अनुमान था।

फिर भी उन्होंने उसे स्नेह और सम्मान के साथ रखा।

तथ्य

कोवलन और माधवी की बेटी का नाम क्या था?

  • कन्नगी
  • देवंतिकै
  • सीता
  • मणिमेकलै
पूरी कथा पढ़िए — एक बेटी, एक अलग कथा

कोवलन और माधवी की बेटी का नाम मणिमेकलै था।

उसकी अपनी कथा तमिल साहित्य में सिलप्पदिकारम् के बाद अलग से मिलती है।

तथ्य

माधवी की वंश-परंपरा किससे जुड़ी बताई जाती है?

  • अप्सरा उर्वशी से, जो अगस्त्य के शाप से पृथ्वी पर नर्तकी बनीं
  • किसी ऋषि की तपस्या-भंग की घटना से
  • किसी राजा के श्राप से
  • कथा में इसका कोई मूल नहीं बताया गया
पूरी कथा पढ़िए — उर्वशी की वंश-परंपरा

माधवी की वंश-परंपरा उर्वशी से जुड़ी बताई जाती है, जो अगस्त्य के शाप से पृथ्वी पर नर्तकी बनीं।

उसी शाप में जयंत बाँस बने — इस बाँस का संबंध नर्तकी के पवित्र ताल-दंड से जोड़ा जाता है।