
अध्याय २
पुहार में विवाह
कावेरी के मुहाने पर बसा बंदरगाह-नगर पुहार — जहाँ एक बारह वर्ष की व्यापारी-पुत्री का विवाह एक सोलह वर्ष के व्यापारी-पुत्र से हुआ
पुहार नगर
पुहार — जिसे कावेरीपट्टिनम भी कहा जाता है — कावेरी नदी के समुद्र में मिलने के मुहाने पर बसा चोल राज्य की राजधानी था, अपने समृद्ध बंदरगाह के लिए विख्यात।
कन्नगी समुद्री व्यापार से जुड़े धनी व्यापारी माणायकन् की पुत्री थी, लगभग बारह वर्ष की। कोवलन समृद्ध व्यापारी मासात्तुवन् का पुत्र था, जिसका व्यापार स्थल-मार्गों से भी जुड़ा था — कोवलन लगभग सोलह वर्ष का था। दोनों परिवार धनी और सम्मानित थे, और दोनों बच्चों का विवाह पूरे वैदिक अग्नि-संस्कार के साथ संपन्न हुआ।
विवाह के बाद के वर्ष
विवाह के बाद के वर्षों में कोवलन और कन्नगी सुख से रहे। कोवलन अपनी पत्नी के प्रति प्रेम में कविता भी रचता — उसकी सुंदरता, उसकी मर्यादा, उसकी मौन गरिमा की प्रशंसा करते हुए। कन्नगी एक आदर्श गृहिणी थी — मितभाषी, संयमी, अपने पति के प्रति समर्पित।
यह दांपत्य जीवन साधारण और सुखी दिखता था। पर पुहार नगर में एक और संसार भी था — नृत्य और संगीत का संसार, जिसमें एक नर्तकी रहती थी जिसका नाम माधवी था। अगले अध्याय में उसी की कथा आती है, और वहीं से कोवलन और कन्नगी के जीवन में पहला मोड़ आता है।
स्रोत: तमिल पंचकाव्य — सिलप्पदिकारम् (परंपरा से इलंगो अडिगल रचित), पुहार में विवाह