अध्याय ७

राजसभा में कन्नगी

सूर्य ने साक्षी देकर कहा — "वह चोर नहीं था" — फिर कन्नगी ने राजसभा में अपनी दूसरी पायल तोड़कर सच्चाई सिद्ध कर दी

सूर्य साक्षी

कन्नगी को उसकी सखी ऐयै से समाचार मिला — "यह कहते हुए कि वह वह चोर था जिसने चुपचाप महल से चमकती पायल चुराई, चमकती पायल पहने रक्षकों ने उसे मार डाला।" यह सुनते ही कन्नगी काँप उठी, भूमि पर गिर पड़ी, फिर उठकर पुकारने लगी — "हे मेरे प्रिय पति, तुम कहाँ हो?" फिर उसने आकाश की ओर मुख करके पूछा — "हे सूर्यदेव, इस संसार के हर कर्म के साक्षी! बोलो — क्या मेरा पति चोर था?"

आकाश से एक स्वर गूँजा — "वह चोर नहीं है, हे कमल-नयनी। यह नगर धधकती अग्नि से भस्म होगा।" कन्नगी अपने पति के शव के पास पहुँची — रक्त में लथपथ। तभी कन्नगी को ऐसा लगा मानो कोवलन उठ खड़ा हुआ; उसने उसके आँसू पोंछे और उसे ठहरने को कहा — "ठहरो, यहीं ठहरो" — फिर देवताओं के साथ उसके नश्वर रूप से परे चला गया।

राजसभा में

अपने क्रोध को थामे, अपनी शेष पायल हाथ में लिए, कन्नगी सीधी राजसभा में गई। राजा नेडुंजेलियन ने कहा — "किसी चोर को मृत्युदंड देना अन्याय नहीं, यह राजधर्म है।" कन्नगी ने उत्तर दिया — "हे कोर्कै के स्वामी, तुम धर्म से भटक गए हो! मेरी पायल के भीतर रत्न हैं।" राजा ने कहा — "यह ठीक कहा — हमारी पायल के भीतर तो मोती हैं। इसे यहाँ लाओ।"

कन्नगी ने अपनी पायल तोड़ी — भीतर से माणिक्य निकलकर सीधे राजा के मुख पर जा टकराया। राजा ने तुरंत समझ लिया, और कहा — "क्या मैं राजा कहलाने योग्य हूँ, जिसने एक सुनार के शब्दों पर विश्वास कर लिया? चोर तो मैं ही हूँ। मुझे इस जीवन से जाने दो।" यह कहते ही राजा मूर्च्छित होकर गिरा और उसकी मृत्यु हो गई। रानी कोप्पेरुंदेवी भी उसी क्षण काँपते हुए गिरीं और बोलीं — "पति की हानि की भरपाई कोई स्त्री नहीं कर सकती" — और वे भी वहीं प्राण त्याग बैठीं।

स्रोत: तमिल पंचकाव्य — सिलप्पदिकारम् (परंपरा से इलंगो अडिगल रचित), राजसभा में कन्नगी

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

कन्नगी ने आकाश की ओर मुख करके सूर्य से क्या प्रश्न पूछा?

  • क्या उसका पति जीवित है
  • राजा को क्या दंड मिलेगा
  • क्या उसका पति चोर था
  • वह क्या करे
पूरी कथा पढ़िए — सूर्य को साक्षी बनाना

कन्नगी ने सूर्यदेव को इस संसार के हर कर्म का साक्षी मानते हुए प्रश्न पूछा।

आकाश से उत्तर मिला — "वह चोर नहीं है।"

किसने कहा?

"किसी चोर को मृत्युदंड देना अन्याय नहीं, यह राजधर्म है।" — यह किसने कहा?

  • राजा नेडुंजेलियन ने कन्नगी से
  • सुनार ने राजा से
  • रानी ने राजा से
  • मादलन ने कोवलन से
पूरी कथा पढ़िए — राजा का पहला उत्तर

राजसभा में जाकर कन्नगी ने राजा से न्याय माँगा।

राजा ने पहले यह कहकर अपना बचाव किया कि उसने केवल राजधर्म निभाया।

ऐसा क्यों?

राजा ने अपनी मृत्यु से पहले क्या कहा, और क्यों?

  • "मुझे पायल का मूल्य चुकाना होगा"
  • "यह पायल नक़ली है"
  • "यह मेरी रानी की ग़लती है"
  • "चोर तो मैं ही हूँ, मुझे इस जीवन से जाने दो"
पूरी कथा पढ़िए — स्वयं को दोषी मानना

जैसे ही राजा ने माणिक्य को देखा, उसने तुरंत अपनी ग़लती समझ ली।

उसने कहा कि चोर तो वह स्वयं है, क्योंकि उसने बिना जाँच सुनार के शब्दों पर विश्वास किया।

तथ्य

कन्नगी की पायल के भीतर क्या था?

  • मोती
  • माणिक्य (रत्न)
  • सोने के सिक्के
  • कुछ भी नहीं, वह ख़ाली थी
पूरी कथा पढ़िए — पायल के भीतर का प्रमाण

कन्नगी की पायल के भीतर माणिक्य थे, रानी की पायल के भीतर मोती।

यही अंतर कन्नगी के दावे का निर्णायक प्रमाण बना।

तथ्य

राजा और रानी की मृत्यु किस क्रम में हुई?

  • लगभग एक साथ
  • रानी पहले, फिर कई दिनों बाद राजा
  • केवल राजा की मृत्यु हुई, रानी जीवित रहीं
  • केवल रानी की मृत्यु हुई
पूरी कथा पढ़िए — लगभग एक साथ मृत्यु

राजा की मृत्यु शोक और पश्चाताप से हुई, कोई हिंसा नहीं।

रानी भी लगभग उसी क्षण गिरकर प्राण त्याग बैठीं।

क्या हुआ?

कोवलन के शव के पास पहुँचकर कन्नगी को क्या दिखा?

  • कुछ नहीं, वह केवल चुप रही
  • उसका पति स्थायी रूप से जीवित हो उठा
  • उसने अपने पति का शव जला दिया
  • उसे ऐसा लगा मानो कोवलन उठ खड़ा हुआ, उसके आँसू पोंछे और ठहरने को कहा, फिर देवताओं के साथ नश्वर रूप से परे चला गया
पूरी कथा पढ़िए — एक दर्शन-जैसा क्षण

कन्नगी को ऐसा लगा मानो कोवलन उठ खड़ा हुआ और उसके आँसू पोंछे।

उसने ठहरने को कहा, फिर वह देवताओं के साथ नश्वर रूप से परे चला गया — यह शारीरिक पुनर्जीवन के रूप में नहीं कहा गया है।

तथ्य

कन्नगी को कोवलन की मृत्यु का समाचार किसने दिया?

  • मादरी ने
  • उसकी सखी ऐयै ने
  • राजा ने स्वयं
  • कावुंदी अडिगल ने
पूरी कथा पढ़िए — समाचार लाने वाली सखी

कन्नगी को कोवलन की मृत्यु का समाचार उसकी सखी ऐयै से मिला।

यह समाचार गोपालक-स्त्रियों के नृत्य-उत्सव के बीच आया।

तथ्य

माणिक्य को देखते ही राजा ने क्या किया?

  • कन्नगी को बंदी बनाने का आदेश दिया
  • सुनार को बुलवाकर उससे सफ़ाई माँगी
  • "चोर तो मैं ही हूँ" कहकर सारा दोष अपने ऊपर लिया, और मूर्च्छित होकर गिर पड़ा
  • कन्नगी से क्षमा माँगकर सिंहासन छोड़ दिया
पूरी कथा पढ़िए — राजा का अंत

राजा अपनी भूल समझते ही पूरा दोष स्वयं स्वीकार करता है और उसी क्षण गिरकर मर जाता है।

इसे राजधर्म-भंग के तत्काल नैतिक परिणाम के रूप में पढ़ा जा सकता है; "राजदंड केवल पश्चात्ताप से सीधा होता है" पाठ का शब्दशः कथन नहीं है।

तथ्य

कन्नगी राजसभा में किस चीज़ को हाथ में लेकर गई?

  • कोवलन का शव
  • एक तलवार
  • सुनार को बाँधने की रस्सी
  • अपनी शेष बची हुई पायल
पूरी कथा पढ़िए — अंतिम प्रमाण

कन्नगी अपनी शेष बची हुई पायल हाथ में लेकर राजसभा में गई।

यही पायल आगे टूटकर सत्य का प्रमाण बनी।

तथ्य

रानी कोप्पेरुंदेवी ने मरते समय क्या कहा?

  • "पति की हानि की भरपाई कोई स्त्री नहीं कर सकती"
  • "यह सब कन्नगी की ग़लती है"
  • "मुझे क्षमा करो"
  • उन्होंने कुछ नहीं कहा
पूरी कथा पढ़िए — रानी के अंतिम शब्द

रानी ने कहा कि पति की हानि की भरपाई कोई स्त्री नहीं कर सकती।

यह कहकर वे राजा के चरणों में गिरकर प्राण त्याग बैठीं।