अध्याय १

यह कथा किसलिए

एक पायल की कथा — जिसमें एक राजा की मृत्यु होती है, एक नगर जलता है, और एक स्त्री देवी बन जाती है

तीन सचाइयाँ

सिलप्पदिकारम् की भूमिका में इसकी रचना करने वाला तीन बातें घोषित करता है, जिन्हें यह पूरी कथा सिद्ध करके दिखाती है — पहली, कि जो राजा धर्म के मार्ग से हट जाता है, उसके लिए धर्म स्वयं मृत्यु का देवता बन जाता है। दूसरी, कि बड़े-बड़े लोग भी एक सच्चरित्र, पतिव्रता स्त्री की पूजा करते हैं। तीसरी, कि भाग्य अपना फल देकर ही रहता है, कोई उससे बच नहीं सकता।

यह कथा इन तीनों सचाइयों को एक साथ जोड़ती है — एक राजा, जिसका न्याय बिना जाँच के दिया गया फ़ैसला था; एक स्त्री, जो पूरे नगर के आगे देवी बनकर उभरती है; और एक पूर्वजन्म का ऋण, जो एक निर्दोष व्यक्ति की मृत्यु के रूप में लौट आता है।

परंपरा के अनुसार रचयिता

परंपरा कहती है कि इस काव्य के रचयिता इलंगो अडिगल थे — चेर राजा चेंगुट्टुवन के छोटे भाई, जो एक ज्योतिषी की भविष्यवाणी सुनकर कि वे ही राजा बनेंगे, संन्यास ले बैठे, ताकि यह भविष्यवाणी कभी सच न हो। पर विद्वानों में इस पर भी मतभेद है — भूमिका का यह भाग काव्य के बाक़ी हिस्से से बाद में जोड़ा गया लग सकता है, और किसी समकालीन संगम-साहित्य में इलंगो अडिगल का कोई उल्लेख नहीं मिलता। उनका धर्म भी स्पष्ट नहीं — आम तौर पर उन्हें जैन कहा जाता है, पर काव्य में वे एक वैदिक यज्ञ में भी सम्मिलित होते दिखते हैं। यह कथा इन विवादों को छिपाती नहीं, बल्कि खुलकर बताती है।

रचनाकाल भी निश्चित नहीं — प्रस्तावित तिथियाँ बहुत अलग-अलग हैं। प्रारंभिक तिथि का एक आधार है गजबाहु-तुल्यकालिकता — काव्य के अंत में श्रीलंका के राजा गजबाहु का उल्लेख, जिनका समय इतिहास से कुछ हद तक जाना जाता है; जबकि कई आधुनिक विद्वान काव्य को पाँचवीं–छठी शताब्दी के आसपास रखते हैं। इस विवाद को आगे के अध्यायों में विस्तार से देखा जाएगा।

तीन मुकुट, एक पायल

काव्य तीन खंडों में बँटा है, और हर खंड का नाम उस समय के तीन बड़े तमिल राज्यों की राजधानी पर है — पुहार (चोल राज्य की राजधानी), मदुरै (पांड्य राज्य की राजधानी), और वंजि (चेर राज्य की राजधानी)। दिक्षितार के अनुवाद में यह काव्य कुल तीस अध्यायों (कांड) में बँटा है — पुहार-खंड में दस, मदुरै-खंड में तेरह, वंजि-खंड में सात।

और इस पूरी कथा के केंद्र में एक बहुत छोटी वस्तु है — एक स्त्री की पायल। यही पायल एक टूटे दांपत्य को नई शुरुआत की पूँजी देती है, एक व्यापार-यात्रा का कारण बनती है, एक झूठे आरोप की जड़ बनती है, एक राजा की मृत्यु का कारण बनती है, और अंत में निर्दोषता के प्रमाण के रूप में टूटती है। इसीलिए इस काव्य का नाम है सिलप्पदिकारम् — "पायल की कथा।"

स्रोत: तमिल पंचकाव्य — सिलप्पदिकारम् (परंपरा से इलंगो अडिगल रचित), यह कथा किसलिए

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

सिलप्पदिकारम् किस भाषा का काव्य है?

  • संस्कृत का
  • कन्नड़ का
  • तमिल का
  • तेलुगु का
पूरी कथा पढ़िए — तमिल का महाकाव्य

सिलप्पदिकारम् एक तमिल साहित्यिक महाकाव्य है, पुराण नहीं।

यह तमिल के पाँच महाकाव्यों में गिना जाता है।

किसने कहा?

परंपरा के अनुसार इस काव्य की रचना किसने की?

  • इलंगो अडिगल, चेर राजकुमार, जो संन्यासी बन गए
  • वेदव्यास ने
  • वाल्मीकि ने
  • राजा चेंगुट्टुवन ने स्वयं
पूरी कथा पढ़िए — एक राजकुमार-संन्यासी

परंपरा कहती है कि रचयिता इलंगो अडिगल थे, राजा चेंगुट्टुवन के छोटे भाई।

एक ज्योतिषी की भविष्यवाणी सुनकर कि वे राजा बनेंगे, उन्होंने संन्यास ले लिया।

पर यह परंपरा भी विद्वानों में विवादित है।

ग्रंथ असहमत

दिक्षितार के अनुवाद के अनुसार इस काव्य में कुल कितने अध्याय (कांड) हैं?

  • बीस
  • पच्चीस
  • दस
  • तीस
पूरी कथा पढ़िए — गिनती पर मतभेद

कुछ स्रोत पच्चीस अध्याय बताते हैं, पर दिक्षितार के अनुवाद में कुल तीस अध्याय हैं।

तीन खंड — पुहार-खंड (दस), मदुरै-खंड (तेरह), वंजि-खंड (सात)।

यह कथा दिक्षितार के अनुवाद पर आधारित है, इसलिए तीस की गिनती अपनाई गई है।

तथ्य

कथा के तीन खंडों के नाम किन तीन नगरों पर हैं?

  • मथुरा, अयोध्या, द्वारका
  • पुहार, मदुरै, वंजि
  • काशी, प्रयाग, हरिद्वार
  • इंद्रप्रस्थ, हस्तिनापुर, पाटलिपुत्र
पूरी कथा पढ़िए — तीन राजधानियाँ

काव्य के तीन खंड तीन तमिल राज्यों की राजधानियों के नाम पर हैं।

पुहार चोल राज्य की, मदुरै पांड्य राज्य की, वंजि चेर राज्य की राजधानी थी।

तथ्य

भूमिका में घोषित तीन सचाइयों में से एक क्या है?

  • जो राजा धर्म से हटता है, धर्म ही उसके लिए मृत्यु बन जाता है
  • सभी राजा अंततः न्यायप्रिय सिद्ध होते हैं
  • स्त्रियों का कोई विशेष गुण नहीं होता
  • भाग्य को बदला जा सकता है
पूरी कथा पढ़िए — तीन घोषित सचाइयाँ

अन्यायी राजा के लिए धर्म स्वयं मृत्यु बन जाता है।

बड़े लोग एक सच्चरित्र स्त्री की पूजा करते हैं।

भाग्य अपना फल देकर ही रहता है।

ऐसा क्यों?

इलंगो अडिगल का धर्म विवादित क्यों माना जाता है?

  • क्योंकि उनका कोई उल्लेख कहीं नहीं मिलता
  • क्योंकि वे स्वयं राजा बन गए थे
  • क्योंकि उन्होंने कभी संन्यास नहीं लिया
  • क्योंकि परंपरा उन्हें जैन कहती है, पर काव्य में वे एक वैदिक यज्ञ में भी सम्मिलित होते हैं
पूरी कथा पढ़िए — धर्म पर अनिश्चय

परंपरा के अनुसार इलंगो अडिगल जैन संन्यासी थे।

पर काव्य में वे एक वैदिक यज्ञ में भी भाग लेते दिखते हैं।

इसलिए उनका वास्तविक धर्म निश्चित नहीं कहा जा सकता।

पहेली

इस पूरी कथा के केंद्र में कौन-सी छोटी वस्तु है, जो यात्रा से लेकर आरोप, मृत्यु और प्रमाण तक — हर मोड़ पर लौटकर आती है?

  • एक तलवार
  • एक पायल
  • एक अंगूठी
  • एक मुकुट
पूरी कथा पढ़िए — पायल की कथा

काव्य का नाम सिलप्पदिकारम् का अर्थ ही है "पायल की कथा।"

यही पायल यात्रा, आरोप, मृत्यु और अंततः निर्दोषता के प्रमाण — सबकी कड़ी बनती है।

तथ्य

इस काव्य के रचनाकाल के बारे में कौन-सा कथन सही है?

  • पहली शताब्दी ईसा पूर्व
  • दसवीं शताब्दी ईस्वी
  • विद्वानों में मतभेद है
  • सोलहवीं शताब्दी ईस्वी
पूरी कथा पढ़िए — अनिश्चित रचनाकाल

प्रस्तावित तिथियाँ बहुत अलग-अलग हैं — दूसरी शताब्दी से लेकर पाँचवीं–छठी शताब्दी तक।

एक आधार है गजबाहु-तुल्यकालिकता — काव्य के अंत में श्रीलंका के राजा गजबाहु का उल्लेख।

क्या हुआ?

इलंगो अडिगल ने संन्यास क्यों लिया, ऐसा परंपरा बताती है?

  • उन्हें युद्ध में हार का सामना करना पड़ा था
  • वे किसी स्त्री के प्रेम में असफल रहे
  • उनके माता-पिता ने उन्हें विवश किया
  • एक ज्योतिषी ने भविष्यवाणी की कि वे राजा बनेंगे, और उन्होंने यह भविष्यवाणी सच न होने देने के लिए संन्यास लिया
पूरी कथा पढ़िए — एक भविष्यवाणी से बचना

ज्योतिषी ने कहा कि इलंगो अडिगल ही राजा बनेंगे, अपने बड़े भाई से पहले।

भाई के प्रति स्नेह और इस भविष्यवाणी को टालने के लिए उन्होंने संन्यास ले लिया।

तथ्य

गजबाहु-तुल्यकालिकता का क्या अर्थ है?

  • काव्य के अंत में श्रीलंका के राजा गजबाहु की उपस्थिति का उल्लेख, जिसका उपयोग रचनाकाल का अनुमान लगाने के प्रयासों में किया गया है
  • गजबाहु इस काव्य के रचयिता थे
  • गजबाहु कोवलन के मित्र थे
  • गजबाहु ने इस काव्य पर प्रतिबंध लगाया था
पूरी कथा पढ़िए — एक ऐतिहासिक कड़ी

काव्य के अंत में श्रीलंका के राजा गजबाहु की उपस्थिति का उल्लेख आता है।

चूँकि गजबाहु का समय इतिहास से कुछ हद तक जाना जाता है, विद्वान इससे काव्य का रचनाकाल आँकने का प्रयास करते हैं।

इसे आगे अध्याय 9 में विस्तार से देखा जाएगा।