चोर की मर्यादा, नाज़ुक रानियाँ — विक्रम और बेताल, चित्र

अध्याय ५

चोर की मर्यादा, नाज़ुक रानियाँ

आधी रात अकेली निकली एक नई ब्याहता को तीन आदमी मिले — पति, प्रेमी और चोर — और तीनों में से जिसके पास रोकने का सबसे कम कारण था, वही उसे छोड़ गया

चोर की मर्यादा, नाज़ुक रानियाँ — विक्रम और बेताल का अध्याय ५। स्रोत: बैताल पच्चीसी, कथा 9 और 10। इसमें २ दृश्य हैं — नौवीं कहानी: मदनसेना का वचन; दसवीं कहानी: तीन नाज़ुक रानियाँ — और अंत में १० सवाल।

नौवीं कहानी: मदनसेना का वचन

विक्रम ने बेताल को फिर पेड़ से उतारा और कंधे पर रखा तो बेताल बोला, 'राजन्, नौवीं कहानी सुन।'

मदनपुर नाम के नगर में बीरबर नाम का राजा था। उसी नगर में हिरण्यदत्त नाम का एक व्यापारी था, जिसकी बेटी का नाम मदनसेना था। एक दिन वसंत में वह अपनी सखियों के साथ बाग़ में घूमने गई। उससे कुछ पहले व्यापारी धर्मदत्त का बेटा सोमदत्त अपने एक मित्र के साथ उसी वन में घूमकर लौटते हुए उसी बाग़ में आ गया। उसने मदनसेना को देखा तो मोहित हो गया, और अपने मित्र से बोला, 'भाई, अगर यह मुझे मिल जाए तो मेरा जीना सफल है, वरना व्यर्थ।'

विरह की बेचैनी में सोमदत्त उसके पास जाकर बोला, 'अगर तुम मुझे प्रेम नहीं दोगी, तो मैं तुम्हारे ही लिए प्राण दे दूँगा।' मदनसेना ने कहा, 'ऐसा मत करो, यह पाप है।' सोमदत्त ने कहा, 'तुम्हारी नज़रों ने मेरा हृदय छेद दिया है, इस वक़्त मुझे सही-ग़लत का कुछ होश नहीं। पर अगर तुम मुझे अपना वचन दे दो, तो मुझमें नई जान आ जाएगी।' मदनसेना बोली, 'पाँच दिन बाद मेरा ब्याह है। मैं पहले तुम्हारे पास आऊँगी, फिर अपने पति के घर रहूँगी।' यह वचन और शपथ देकर वह अपने घर चली गई और सोमदत्त अपने घर।

पाँचवें दिन उसका ब्याह हुआ और पति उसे ब्याहकर घर ले आया। कुछ दिन बाद पति के बड़े-छोटे भाइयों की पत्नियों ने उसे रात को पति के कमरे में भेज दिया। वह कमरे में जाकर चुपचाप कोने में बैठ गई। पति ने उसे देखा, उसका हाथ पकड़ा और पलंग पर बिठाया। पर जैसे ही वह उसके पास आने लगा, मदनसेना ने उसका हाथ हटा दिया और उसे बताया कि उसने सोमदत्त को क्या वचन दिया है। यह सुनकर पति ने कहा, 'अगर तुम सचमुच उसके पास जाना चाहती हो तो जाओ।'

पति से आज्ञा पाकर वह सोमदत्त के घर की ओर चली। रास्ते में एक चोर ने उसे देखा, और ख़ुश होकर पास आया। उसने पूछा, 'इस आधी रात में, इतने अँधेरे में, ऐसे कपड़ों और गहनों में अकेली कहाँ जा रही हो?' उसने कहा, 'जहाँ मेरा प्रियतम रहता है।' चोर ने पूछा, 'तुम्हारा रखवाला यहाँ कौन है?' वह बोली, 'कामदेव, अपने धनुष-बाण के साथ।' यह कहकर उसने चोर को पूरी बात बताई और बोली, 'मेरे कपड़े-गहने मत बिगाड़ो। मैं वचन देती हूँ कि वहाँ से लौटकर अपने सब गहने तुम्हें दे दूँगी।' चोर ने सोचा कि जब यह वचन देकर जा रही है तो इसके कपड़े क्यों बिगाड़ूँ, और उसे जाने दिया। ख़ुद वहीं बैठ गया।

मदनसेना वहाँ पहुँची जहाँ सोमदत्त सोया था, और उसने उसे अचानक जगा दिया। वह हड़बड़ाकर उठा और पूछने लगा, 'तुम किसी देवता, ऋषि या नाग की बेटी हो? सच बताओ, तुम कौन हो और मेरे पास कैसे आईं?' उसने कहा, 'मैं मनुष्य की बेटी हूँ, व्यापारी हिरण्यदत्त की बेटी मदनसेना। तुम्हें याद नहीं कि तुमने बाग़ में मुझसे वचन और शपथ ली थी कि मैं अपने पति को छोड़कर तुम्हारे पास आऊँगी? मैं आ गई हूँ।' उसने पूछा, 'क्या तुमने यह बात अपने पति से कही?' वह बोली, 'मैंने उन्हें सब बता दिया, और सब जानकर उन्होंने ही मुझे यहाँ आने दिया।'

सोमदत्त ने कहा, 'यह ऐसा है जैसे बिना कपड़े के गहने, या बिना घी का भोजन, या बेसुरा गाना। इसी तरह मैले कपड़े सुंदरता बिगाड़ते हैं, बुरा भोजन बल घटाता है, बुरी स्त्री जान लेती है और बुरा बेटा कुल बर्बाद करता है।' (यहाँ सोमदत्त की कही स्त्रियों के बारे में कुछ और बातें पाठ में हैं, जो उसी पात्र की निंदा-भरी राय हैं और जिन्हें यहाँ छोड़ दिया गया है।) फिर उसने कहा, 'मैं पराई स्त्री से कोई वास्ता नहीं रखूँगा।' यह सुनकर वह लौट पड़ी। रास्ते में फिर वही चोर मिला, उसने उसे पूरी बात बताई। चोर ने सुनकर उसकी बहुत प्रशंसा की और उसे जाने दिया। वह पति के पास आई और सब हाल बताया, पर पति ने उसके प्रति कोई स्नेह नहीं दिखाया और बोला, 'कोयल की सुंदरता उसकी बोली में है, स्त्री की सुंदरता पति के प्रति निष्ठा में, कुरूप की सुंदरता उसके ज्ञान में और संन्यासी की सुंदरता उसके सहने में।'

कहानी पूरी करके बेताल ने पूछा, 'राजन्, इन तीनों में सबसे ऊँचा गुण किसका है?' राजा विक्रम ने कहा, 'चोर का।' बेताल ने पूछा, 'कैसे?' राजा बोला, 'पति ने देखा कि पत्नी का मन किसी और में है, तब उसे छोड़ दिया। सोमदत्त ने राजा के डर से उसे छोड़ दिया। पर चोर के पास उसे छोड़ने का कोई कारण नहीं था, फिर भी उसने उसे बिना सताए जाने दिया। इसलिए चोर का गुण ऊँचा है।' यह सुनकर बेताल फिर पेड़ पर जा लटका। राजा ने उसे फिर उतारा, बाँधा और कंधे पर लादकर चल पड़ा।

दसवीं कहानी: तीन नाज़ुक रानियाँ

बेताल बोला, 'राजन्, अब दसवीं कहानी सुन।'

गौड़ देश के बर्दमान नगर में राजा धर्मध्वज राज करता था। (पाठ में पहले उसके पिता और मंत्री अभयचंद के धर्म-विवाद और मंत्री के अपमान का एक लंबा प्रसंग है, जिसे यहाँ छोड़ दिया गया है।) वसंत के दिन थे। राजा अपनी रानियों के साथ बाग़ में घूमने गया। वहाँ एक बड़ा तालाब था जिसमें कमल खिले थे। तालाब की सुंदरता देखकर राजा ने कपड़े उतारे और नहाने उतरा। एक फूल तोड़कर किनारे आया और एक रानी को देने लगा कि फूल उसके हाथ से छूटकर रानी के पैर पर गिरा, और उसकी चोट से रानी का पैर टूट गया। राजा घबरा गया, तुरंत तालाब से निकला और दवा-दारू करने लगा।

इसी बीच रात आ गई और चाँद निकल आया। चाँदनी पड़ते ही दूसरी रानी की देह पर फफोले उठ आए। उसी समय किसी गृहस्थ के घर से मूसल की आवाज़ आई, और वह तीसरी रानी के कानों में पड़ी तो उसके सिर में ऐसा तेज़ दर्द उठा कि वह बेहोश हो गई।

कहानी पूरी करके बेताल ने पूछा, 'राजन्, इन तीनों में सबसे नाज़ुक कौन थी?' राजा ने कहा, 'जिसे मूसल की आवाज़ से सिर-दर्द हुआ और जो बेहोश हो गई, वही सबसे नाज़ुक थी।' यह सुनते ही बेताल कंधे से ग़ायब हो गया, और राजा उसे फिर ले आने चल पड़ा।

टिप्पणी: यह अध्याय बैताल पच्चीसी की लोकप्रिय हिंदी परंपरा (लल्लू लाल का पाठ, जॉन प्लैट्स का 1871 का अनुवाद) की कथा 9 और 10 से सीधे लिखा गया है। कथा 9 के आरंभ का वह प्रसंग, जहाँ सोमदत्त मदनसेना का हाथ पकड़ लेता है, और ब्याह के बाद की रात का ब्योरा संयत रखा गया है, उसके विस्तार नहीं दिए। सोमदत्त की स्त्रियों पर की गई निंदा और पति की कही 'सुंदरता' वाली बात उन्हीं पात्रों की राय है, इस वेबसाइट की नहीं। कथा 10 में पाठ का पहला हिस्सा, जिसमें एक जैन मंत्री और राजा के धर्म-बदलने और मंत्री के अपमान की कथा है, छोड़ दिया गया है, क्योंकि वह नाज़ुक रानियों की पहेली से अलग है और किसी धर्म का उपहास करता है। यह तीन नाज़ुक रानियों वाली पहेली कथासरित्सागर के अध्याय 9 में भी है (वहाँ राजा धर्मध्वज, रानियाँ इंदुलेखा, तारावली और मृगांकवती), पर यहाँ रानियाँ बे-नाम हैं।

स्रोत: बैताल पच्चीसी — लल्लू लाल की हिंदी बैताल पच्चीसी (1805), डंकन फ़ोर्ब्स के पाठ से, चोर की मर्यादा, नाज़ुक रानियाँ

अब बताइए — कितना याद रहा?

तथ्य

मदनसेना और सोमदत्त कौन थे?

  • दोनों राजा के बेटे-बेटी
  • दोनों साधु-साध्वी
  • मदनसेना व्यापारी हिरण्यदत्त की बेटी थी और सोमदत्त व्यापारी धर्मदत्त का बेटा
  • दोनों भाई-बहन
पूरी कथा पढ़िए — दो व्यापारी-परिवार

वे दोनों बाग़ में अचानक मिले थे।

पाँचवें दिन मदनसेना का ब्याह हुआ।

क्या हुआ?

ब्याह की पहली रात मदनसेना ने पति को क्या बताया, और पति ने क्या कहा?

  • उसने सोमदत्त को दिया वचन बताया, और पति ने कहा कि अगर तुम सचमुच उसके पास जाना चाहती हो तो जाओ
  • उसने कुछ नहीं कहा
  • उसने कहा कि उसे घर लौटना है, और पति ने मना कर दिया
  • उसने कहा कि वह कहीं नहीं जाएगी
पूरी कथा पढ़िए — पति की इजाज़त

पति ने उसका हाथ पकड़कर पलंग पर बिठाया था।

वह रात को ही सोमदत्त के घर चल पड़ी।

क्या हुआ?

रास्ते में मिले चोर ने मदनसेना को क्यों जाने दिया?

  • क्योंकि उसने चोर को पैसे दिए
  • क्योंकि चोर को पहरेदारों का डर था
  • क्योंकि चोर उसका रिश्तेदार था
  • क्योंकि उसने पूरी बात बताकर वचन दिया कि वहाँ से लौटकर अपने गहने उसे दे देगी
पूरी कथा पढ़िए — गहनों का वचन

उसने कहा था कि उसका रखवाला कामदेव है।

लौटते समय चोर ने उसकी बात सुनकर उसकी प्रशंसा की।

पहेली

बेताल ने तीनों में सबसे ऊँचा गुण किसका पूछा। विक्रम ने क्या कहा?

  • पति का
  • चोर का
  • मदनसेना का
  • सोमदत्त का
पूरी कथा पढ़िए — तीन में एक

तीन थे: पति, सोमदत्त और चोर।

जवाब सुनते ही बेताल पेड़ पर लौट गया।

ऐसा क्यों?

विक्रम ने चोर का गुण सबसे ऊँचा क्यों माना?

  • क्योंकि पति और सोमदत्त के पास छोड़ने के कारण थे, पर चोर के पास कोई कारण नहीं था, फिर भी उसने उसे बिना सताए जाने दिया
  • क्योंकि चोर ने गहने ले लिए
  • क्योंकि चोर को राजा का डर था
  • क्योंकि चोर ग़रीब था
पूरी कथा पढ़िए — बिना कारण का संयम

सोमदत्त ने राजा के डर से उसे छोड़ा।

पति ने देखा कि पत्नी का मन किसी और में है।

तथ्य

तीन रानियों की पहेली में राजा का नाम और नगर क्या थे?

  • राजा गुणशेखर, नगर कौशांबी
  • राजा रूपसेन, नगर बर्दवान
  • राजा महाबल, नगर उज्जैन
  • राजा धर्मध्वज, नगर बर्दमान, गौड़ देश में
पूरी कथा पढ़िए — गौड़ देश का राजा

वह वसंत में रानियों के साथ बाग़ गया।

तालाब में कमल खिले थे।

क्या हुआ?

पहली रानी को चोट कैसे लगी?

  • मूसल की आवाज़ से
  • राजा के हाथ से छूटे फूल के उसके पैर पर गिरने से, जिससे उसका पैर टूट गया
  • साँप के काटने से
  • चाँदनी से
पूरी कथा पढ़िए — फूल की चोट

राजा तालाब से फूल तोड़कर रानी को देने आ रहा था।

राजा घबराकर दवा-दारू करने लगा।

पहेली

विक्रम ने तीनों रानियों में सबसे नाज़ुक किसे बताया?

  • पहली, जिसका पैर टूटा
  • दूसरी, जिसकी देह पर चाँदनी से फफोले उठे
  • तीसरी, जिसे मूसल की आवाज़ से सिर-दर्द हुआ और जो बेहोश हो गई
  • तीनों बराबर
पूरी कथा पढ़िए — आवाज़ भी चोट

तीसरी रानी को किसी ने छुआ नहीं था।

जवाब सुनते ही बेताल फिर पेड़ पर लौटा।

ऐसा क्यों?

तीसरी रानी को सबसे नाज़ुक क्यों माना जाता है?

  • क्योंकि वह सबसे छोटी थी
  • क्योंकि उसे सबसे गहरा घाव लगा
  • क्योंकि उसने सबसे ज़्यादा आँसू बहाए
  • क्योंकि बाक़ी दोनों को स्पर्श से चोट लगी, पर इसे केवल दूर से आई आवाज़ से सिर-दर्द हुआ
पूरी कथा पढ़िए — स्पर्श और आवाज़

फूल का पैर पर गिरना और चाँदनी का पड़ना स्पर्श थे।

मूसल की आवाज़ किसी गृहस्थ के घर से आई थी।

व्याख्या

इन दोनों पहेलियों में 'ऊँचा गुण' या 'नाज़ुकपन' पहचानने की कसौटी क्या है, हमारे पठन में?

  • पहली में उस पक्ष का गुण ऊँचा माना गया जिसके पास कोई बाध्यता नहीं थी, दूसरी में उसे जिसके कष्ट के पीछे सबसे कम कारण था
  • पहली में केवल उम्र, दूसरी में केवल सुंदरता
  • दोनों में केवल राजा का फ़ैसला
  • दोनों में केवल देवता की इच्छा
पूरी कथा पढ़िए — एक पठन

दोनों में कसौटी 'बिना कारण' या 'सबसे कम स्पर्श' जैसी कोई बात है।

यह आज के पाठक का पठन है, पाठ का स्वयं का दावा नहीं।

चोर की मर्यादा, नाज़ुक रानियाँ के बारे में सवाल

चोर की मर्यादा, नाज़ुक रानियाँ (विक्रम और बेताल) में क्या होता है?

आधी रात अकेली निकली एक नई ब्याहता को तीन आदमी मिले — पति, प्रेमी और चोर — और तीनों में से जिसके पास रोकने का सबसे कम कारण था, वही उसे छोड़ गया। कथा इन पड़ावों से गुज़रती है: नौवीं कहानी: मदनसेना का वचन; दसवीं कहानी: तीन नाज़ुक रानियाँ।

विक्रम और बेताल में चोर की मर्यादा, नाज़ुक रानियाँ के बाद क्या आता है?

आगे मंत्री की चिंता, साँप का ज़हर: समुद्र से निकले सोने के पेड़ पर बैठी एक गायिका, और राजा जो उसे पाकर राज भूल गया — तब मंत्री क्यों मर गया? और दूध की खीर में ज़हर किसने डाला?

चोर की मर्यादा, नाज़ुक रानियाँ का स्रोत क्या है?

बैताल पच्चीसी, कथा 9 और 10।