विक्रम और बेताल
विक्रम और बेताल — १२ अध्याय, १२० सवाल। बैताल पच्चीसी — लल्लू लाल की हिंदी बैताल पच्चीसी (1805), डंकन फ़ोर्ब्स के पाठ से।
विक्रम और बेताल की कथाएँ 'बैताल पच्चीसी' (संस्कृत 'वेतालपंचविंशति') की सबसे जानी-पहचानी हिंदी रूप हैं: राजा विक्रम श्मशान से एक शव में बसे बेताल को कंधे पर लाद लाता है, और रास्ते भर बेताल पच्चीस कहानियाँ सुनाता है, हर एक के अंत में एक पहेली के साथ। यह रूप सोमदेव के कथासरित्सागर से अलग है, जहाँ राजा का नाम त्रिविक्रमसेन है और कथाओं का क्रम भी अलग है। यह कथा लल्लू लाल की हिंदी बैताल पच्चीसी के जॉन प्लैट्स द्वारा किए 1871 के पूरे अंग्रेज़ी अनुवाद के मूल पाठ को सीधे पढ़कर लिखी गई है, उसकी टिप्पणियों से नहीं।
- अमर फल — एक फल राजा से रानी, रानी से कोतवाल, और कोतवाल से वापस राजा तक लौट आया — और उसी से एक राजा संन्यासी हुआ, और दूसरा श्मशान की ओर चला
- कमल के इशारे, राख का बिस्तर — एक राजकुमारी ने बिना बोले कमल से अपना पता बता दिया — और तीन ब्राह्मण-युवक एक ही कन्या पर ऐसे झगड़े कि बेताल ने राजा से पूछा, वह किसकी पत्नी हो?
- सेवक का सौदा, राक्षस का पहाड़ — रोज़ हज़ार तोला सोना माँगने वाला एक सेवक, और एक रात श्मशान में रोती हुई 'राजलक्ष्मी' — फिर एक कन्या, तीन वर, और विंध्य के पहाड़ पर बैठा राक्षस
- बदले हुए सिर, राजा का सेवक — देवी के सामने किया वचन तोड़ने से तीन जानें गईं और जब देवी ने जिलाया तो जल्दबाज़ी में सिर आपस में बदल गए — और एक राजा ने अपनी भूखी रात का क़र्ज़ अनोखे ढंग से चुकाया
- चोर की मर्यादा, नाज़ुक रानियाँ — आधी रात अकेली निकली एक नई ब्याहता को तीन आदमी मिले — पति, प्रेमी और चोर — और तीनों में से जिसके पास रोकने का सबसे कम कारण था, वही उसे छोड़ गया
- मंत्री की चिंता, साँप का ज़हर — समुद्र से निकले सोने के पेड़ पर बैठी एक गायिका, और राजा जो उसे पाकर राज भूल गया — तब मंत्री क्यों मर गया? और दूध की खीर में ज़हर किसने डाला?
- सूली से पहले हँसी — जिस चोर को राजा ने रात में पकड़ा था, वह सूली के पास पहुँचकर पहले ज़ोर से हँसा, फिर फूट-फूटकर रोया — बेताल ने पूछा, ऐसा क्यों?
- जीमूतवाहन और साँप — एक राजकुमार दूसरे के बदले गरुड़ का भोजन बनने चला, और जिसका भोजन बनना था वह भी लौट आया — बेताल ने पूछा, सबसे बड़ा त्याग किसका?
- अधूरा मंत्र, तीन हाथ — एक जुआरी ब्राह्मण-पुत्र जो अपने मंत्र में सफल नहीं हुआ, और एक राजा जिसके पिंडदान पर गया की नदी से तीन हाथ उठे — बेताल ने पूछा, ऐसा क्यों, और पिंड किसे?
- सबसे गहरा प्रेम, बाघ में प्राण — तीन लोग एक ही चिता के पास पहुँचे और बेताल ने पूछा कि सबसे गहरा प्रेम किसका; फिर चार विद्वान भाइयों ने हड्डियों से बाघ खड़ा किया — सबसे बड़ा मूर्ख कौन?
- नया शरीर, तीन नाज़ुक ब्राह्मण — एक बूढ़े ब्राह्मण ने जवान शरीर में घुसने से पहले रोकर, फिर हँसकर, सबको चौंकाया; और तीन भाइयों ने राजा के सामने अपने-अपने नख़रों की परीक्षा दी — बेताल ने पूछा, सबसे नाज़ुक कौन?
- अनुत्तरित पहेली, साधु का अंत — आख़िरी कहानी की पहेली का जवाब विक्रम को नहीं सूझा, और तभी बेताल ने उसे साधु शांतशील की असली चाल बता दी — श्मशान की रात कैसे ख़त्म हुई?
विक्रम और बेताल के बारे में सवाल
यहाँ विक्रम और बेताल कैसे बँटा है?
विक्रम और बेताल की इस कथा में १२ अध्याय हैं: अमर फल, कमल के इशारे, राख का बिस्तर, सेवक का सौदा, राक्षस का पहाड़, बदले हुए सिर, राजा का सेवक, चोर की मर्यादा, नाज़ुक रानियाँ, मंत्री की चिंता, साँप का ज़हर, सूली से पहले हँसी, जीमूतवाहन और साँप, अधूरा मंत्र, तीन हाथ, सबसे गहरा प्रेम, बाघ में प्राण, नया शरीर, तीन नाज़ुक ब्राह्मण, अनुत्तरित पहेली, साधु का अंत।
विक्रम और बेताल किस बारे में है?
एक राजा, एक शव, एक बेताल — और हर कहानी के अंत में ऐसा सवाल जिसका जवाब देते ही वह फिर पेड़ पर लौट जाता है।
इस कथा का स्रोत क्या है?
बैताल पच्चीसी — लल्लू लाल की हिंदी बैताल पच्चीसी (1805), डंकन फ़ोर्ब्स के पाठ से।
क्या विक्रम और बेताल पर प्रश्नोत्तरी है?
हाँ। हर अध्याय के अंत में १० सवाल हैं, और हर सही उत्तर के पीछे एक छोटी कथा है जो उसे समझाती है। कुल १२० सवाल।