भागवत भक्त
भागवत भक्त — १० अध्याय, १०० सवाल। भागवत पुराण से।
भागवत पुराण के चौथे से नौवें स्कंध में बिखरे भक्तों की दस कहानियाँ — एक ठुकराया बच्चा (ध्रुव), एक क्रूर राजा की देह से निकला बेहतर राजा (पृथु), एक गिरा हुआ ब्राह्मण जिसने अनजाने में नाम ले लिया (अजामिल), एक शोक-भरा पिता (चित्रकेतु), एक राक्षस का अपना बेटा (प्रह्लाद), जबड़ों में फँसा एक हाथी (गजेंद्र), सब कुछ देकर परखा गया एक राजा (बलि), एक फ़ौन से जुड़कर हिरन बना एक राजा (जड़ भरत), और एक उपवास जिसे उसी के विरुद्ध इस्तेमाल किया गया (अंबरीष)। हर कथा किस स्कंध और अध्याय की है, यह बताया गया है; जहाँ ग्रंथ आपस में भिड़ते हैं — वृत्र, तीन डग, निषाद का जन्म, होलिका — वहाँ दोनों पक्ष रखे गए हैं, और कहीं निर्णय नहीं दिया गया।
- ध्रुव — जो गोद उसे नहीं मिली — पाँच बरस के एक बच्चे को पिता की गोद नहीं मिली, और वह ऐसी जगह ढूँढने निकल पड़ा जहाँ से कोई उसे हटा न सके
- पृथु — जिसने धरती को दुहा — जिस राजा ने कहा "भोग मैं ही हूँ", उसे मारकर ऋषियों ने उसी की देह से एक बेहतर राजा निकाला
- अजामिल — एक नाम से बचा हुआ — मृत्यु की देहरी पर, बिगड़ी हुई पूरी ज़िंदगी के बाद, उसके मुँह से अनजाने में भगवान का नाम निकला
- चित्रकेतु — जिसका बेटा चला गया — एक हँसी की क़ीमत एक राजा ने राक्षस-जन्म से चुकाई — और उसे इससे कोई शिकायत नहीं थी
- प्रह्लाद — जो रुका नहीं — पिता ने हर तरीक़े से बेटे को मारना चाहा। बेटा हर बार लौटकर वही नाम लेता रहा
- नरसिंह — खंभा फटा — खंभे से जो निकला वह न आदमी था न शेर — और उसका ग़ुस्सा वध के बाद भी नहीं उतरा
- गजेंद्र — जबड़ों में हाथी — हज़ार साल एक मगर की पकड़ में रहने के बाद हाथी ने वह किया जो उसने पहले कभी नहीं किया — उसने हार मान ली
- वामन और बलि — तीन क़दम — एक बौने ब्राह्मण ने तीन क़दम ज़मीन माँगी, और तीसरा क़दम रखने की जगह सिर्फ़ राजा के सिर पर बची
- जड़ भरत — जो हिरन बन गया — एक राजा एक हिरन के बच्चे से इतना जुड़ गया कि अगला जन्म उसे हिरन का मिला
- अंबरीष और दुर्वासा — वह चक्र जिसने ऋषि को दौड़ाया — भगवान ने ख़ुद कहा — "मैं आज़ाद नहीं हूँ, मैं अपने भक्तों के वश में हूँ" — और एक ऋषि को साल भर यह बात दौड़ाती रही