महाभारत
महाभारत — १८ पर्व, १७२ सवाल। महाभारत (परंपरा में वेदव्यास से संबद्ध)।
जहाँ आवश्यक हो, आलोचनात्मक संस्करण और बाद की पाठ-परंपराओं का अंतर अलग से बताया गया है।
- आदि पर्व — एक यज्ञ, जिसमें साँप जल रहे थे — और वहीं यह कथा पहली बार सुनाई गई
- सभा पर्व — एक हँसी, और एक खेल — और उसके बाद कुछ भी पहले जैसा नहीं रहा
- वन पर्व — बारह वर्ष, और उनमें सुनाई गई इतनी कथाएँ कि पर्व सबसे लंबा हो गया
- विराट पर्व — तेरहवाँ वर्ष — पाँच योद्धा, पाँच नए नाम
- उद्योग पर्व — शांति की बात चलती रही। युद्ध भी।
- भीष्म पर्व — दस दिन एक बूढ़े आदमी ने युद्ध रोके रखा, और फिर अपने गिरने का तरीक़ा ख़ुद बता दिया
- द्रोण पर्व — इसी पर्व में हर नियम टूटा, और तोड़ने वाले दोनों पक्ष थे
- कर्ण पर्व — दो दिन का सेनापति, जिसे उसके अपने ही सारथी ने पूरे रास्ते तोड़ा
- शल्य पर्व — अठारहवाँ दिन, और एक राजा जो अपनी सेना के बचे हुए हिस्से से भागकर पानी में जा छिपा
- सौप्तिक पर्व — युद्ध ख़त्म हो चुका था। सबसे बुरा काम उसके बाद हुआ।
- स्त्री पर्व — इस पर्व में कोई नहीं लड़ता। सब गिनने आते हैं कि कौन-कौन नहीं रहा।
- शांति पर्व — जीत के बाद युधिष्ठिर ने राज लेने से मना कर दिया। पर्व वहीं से खुलता है, और वही सवाल राजधर्म से मोक्षधर्म तक फैल जाता है।
- अनुशासन पर्व — उपदेश चलता रहा, और फिर सूरज उत्तर की ओर मुड़ा।
- आश्वमेधिक पर्व — एक घोड़ा छोड़ा गया, और अंत में एक नेवले ने पूरे यज्ञ को छोटा बता दिया।
- आश्रमवासिक पर्व — पंद्रह साल बाद बूढ़े लोग जंगल चले गए, और एक रात मरे हुए लौट आए।
- मौसल पर्व — छत्तीस साल बाद गांधारी का शाप आया, और यादव आपस में लड़कर ख़त्म हो गए।
- महाप्रस्थानिक पर्व — छह लोग उत्तर की ओर चले, और एक कुत्ता पीछे-पीछे चलता रहा।
- स्वर्गारोहण पर्व — स्वर्ग में सबसे पहले दुर्योधन दिखा। युधिष्ठिर ने कहा कि ऐसा स्वर्ग नहीं चाहिए।