विष्णु-पुराण
विष्णु-पुराण — १६ अध्याय, १६० सवाल। कई ग्रंथों से।
यह गाथा विष्णु पुराण की रीढ़ पर खड़ी है, पर सिर्फ़ उसी पर नहीं। दस अवतारों की सूची विष्णु पुराण, भागवत पुराण, गरुड़ पुराण और मत्स्य पुराण में मिलती है — और ये सूचियाँ आपस में पूरी तरह सहमत नहीं हैं। ध्रुव, भरत और ययाति जैसी कथाएँ विष्णु पुराण की अपनी हैं; भागीरथ की कथा रामायण और महाभारत में भी है। कृष्ण-अवतार यहाँ सिर्फ़ एक अध्याय है, क्योंकि उनकी पूरी कथा कृष्ण-लीला में अलग से है। हर अध्याय बताता है कि उसका प्रसंग किस ग्रंथ से आता है, और कहाँ ग्रंथ आपस में भिड़ते हैं।
- मत्स्य — एक राजा की अंजुली में इतनी छोटी मछली आई कि वह उसे देख भी मुश्किल से पा रहा था
- कूर्म — देवता और असुर एक ही रस्सी के दो सिरों पर खड़े थे, और नीचे पहाड़ डूब रहा था
- वराह — धरती को पानी में खींच लिया गया था, और उसे ढूँढ़ने कोई अँगूठे जितना बड़ा गया
- नरसिंह — वरदान में कोई छेद नहीं था — इसीलिए वह पूरा का पूरा एक छेद था
- वामन — माँगने वाला सबसे छोटा था, और उसने सबसे छोटी चीज़ माँगी
- परशुराम — पिता ने कहा माँ को मार दो, और बेटे ने कुल्हाड़ी उठा ली
- राम — वह अवतार जिसे अपनी पूरी कथा में यह पता ही नहीं था कि वह अवतार है
- कृष्ण — यह अवतार जानता था कि वह कौन है — और यही सबसे बड़ा फ़र्क़ है
- बुद्ध — यह अध्याय एक दावे के बारे में है, और दावा करने वाले के बारे में — दोनों को अलग रखकर
- कल्कि — इकलौता अवतार जिसकी कोई कथा नहीं है — सिर्फ़ एक वर्णन है
- ध्रुव — एक बच्चा गोद से उतार दिया गया, और वहीं से चलकर आकाश में जा टिका
- भागीरथ — साठ हज़ार लोग राख हो चुके थे, और उन्हें बचाने के लिए एक नदी को आसमान से उतारना था
- पुरूरवा और उर्वशी — साथ रहने की तीन शर्तें थीं — एक रात उनमें से दो टूटीं, और इतना ही काफ़ी था
- जड़ भरत — एक राजा ने सब छोड़ दिया, और आख़िर में एक हिरण के बच्चे से हार गया
- ययाति — उसने अपने बेटे से जवानी माँगी, और हज़ार साल बाद वही लौटाने आया
- कलियुग — यह अध्याय किसी कथा का नहीं, एक समय का वर्णन है — और वह समय पहचाना हुआ लगता है