हनुमान-गाथा
हनुमान-गाथा — ९ अध्याय, ९० सवाल। कई ग्रंथों से।
हनुमान की जीवन-कथा किसी एक ग्रंथ में पूरी नहीं मिलती। जन्म और शक्ति वाल्मीकि रामायण के किष्किंधाकांड में हैं; लंका की कथा सुंदरकांड और युद्धकांड में रामायण के अपने नज़रिए से पहले ही आ चुकी है — यहाँ वही घटनाएँ हनुमान की तरफ़ से हैं। मोती की माला, अहिरावण और पाताल की कथाएँ वाल्मीकि में नहीं — बाद के ग्रंथों और परंपरा में मिलती हैं, और हर जगह बताया गया है कि कौन-सी कथा कहाँ से आती है।
- अंजना का बेटा — एक श्राप से जो बच्चा जन्मा, उसी को इंद्र ने पहले दिन घायल कर दिया
- राम से भेंट, और जांबवान — जासूसी के लिए भेजा गया आदमी लौटा तो किसी और का हो चुका था
- समुद्र — सौ योजन पानी, और तीन बार किसी ने रास्ता रोका — हर बार वजह अलग थी
- रात की लंका — पूरा शहर छान मारा, और सीता माँ कहीं नहीं मिलीं — यही इस रात का सबसे बड़ा पल है
- जान-बूझकर — वे पकड़े नहीं गए थे। उन्होंने पकड़े जाना चुना था
- संजीवनी — जड़ी पहचान में नहीं आई, इसलिए वे पूरा पहाड़ उठा लाए
- मोती की माला — उन्होंने एक-एक मोती तोड़कर फेंक दिया, और भरी सभा उन पर हँस पड़ी
- अहिरावण — विभीषण भीतर आए, सबको सुला गए — और वे विभीषण थे ही नहीं
- जो रह गया — सबसे बड़ा वरदान यह था कि वे रुक गए, जबकि बाक़ी सब चले गए