देवी-चरित

देवी-चरित — १५ अध्याय, १५० सवाल। कई ग्रंथों से।

देवी की कथाएँ भी किसी एक ग्रंथ में पूरी नहीं मिलतीं। सबसे बड़ा स्रोत देवी माहात्म्य (दुर्गा सप्तशती) है, जो मार्कण्डेय पुराण के भीतर है — महिष, रक्तबीज, शुम्भ-निशुम्भ की कथाएँ वहीं से हैं। देवी भागवत पुराण, कालिका पुराण और ब्रह्माण्ड पुराण का ललितोपाख्यान अपने-अपने हिस्से जोड़ते हैं। सबसे पुरानी आवाज़ ऋग्वेद के देवी सूक्त (१०.१२५) की है। एक सवाल पूरी गाथा में चलता है: देवी एक हैं या अनेक? शाक्त परंपरा कहती है एक — दुर्गा, काली, पार्वती, लक्ष्मी, सरस्वती सब उन्हीं के रूप। वैष्णव और शैव ग्रंथ अक्सर उन्हें पत्नी या सहायक बताते हैं, सर्वोच्च नहीं — यह फ़र्क़ हर अध्याय में दर्ज है। मनसा, शीतला जैसी गाँव की देवियाँ एक अलग, जीवित धारा हैं। सती-दक्ष, शक्ति पीठ और कामदेव की राख की कथाएँ इस साइट पर शिव-महिमा में पहले से हैं — यहाँ उन्हें देवी की तरफ़ से देखा गया है, दोहराया नहीं।

देवी-चरित के बारे में सवाल

यहाँ देवी-चरित कैसे बँटा है?

देवी-चरित की इस कथा में १५ अध्याय हैं: वाक् — मैं ही हूँ, महामाया, दुर्गा — हार से बनी देवी, महिषासुर-मर्दिनी, काली — कौशिकी के क्रोध से, चामुंडा, काली और रक्तबीज, मैं अकेली हूँ, सप्त मातृका, दस महाविद्या, ललिता और भण्डासुर, शाकम्भरी और दुर्गम, लक्ष्मी और सरस्वती, मनसा, शीतला, षष्ठी, देवी गीता — आख़िरी मैं।

देवी-चरित किस बारे में है?

देवता उसे अपनी हार से बनाते हैं — और फिर वह लौटती नहीं।

इस कथा का स्रोत क्या है?

कई ग्रंथों से।

क्या देवी-चरित पर प्रश्नोत्तरी है?

हाँ। हर अध्याय के अंत में १० सवाल हैं, और हर सही उत्तर के पीछे एक छोटी कथा है जो उसे समझाती है। कुल १५० सवाल।