कृष्ण-लीला
कृष्ण-लीला — १८ कांड, १८० सवाल। कई ग्रंथों से।
रामायण और महाभारत की तरह यहाँ एक आलोचनात्मक संस्करण नहीं है। कृष्ण की कथा भागवत पुराण, हरिवंश और विष्णु पुराण में बँटी है — और ये आपस में सहमत नहीं हैं। इसलिए हर प्रसंग के साथ बताया गया है कि वह किस ग्रंथ में मिलता है, और कहाँ ग्रंथ आपस में भिड़ते हैं।
- कंस और आकाशवाणी — एक आदमी को उसकी मौत की तारीख़ नहीं, शर्त बता दी गई थी
- आधी रात, और एक नदी — जिस रात सबसे ज़्यादा पहरा था, उसी रात कोई बाहर निकल गया
- पूतना — गोकुल में एक सुंदर औरत आई, और गोद में बच्चा माँग बैठी
- माखन और मुँह में ब्रह्मांड — गोकुल की हर गोपी के पास एक ही शिकायत थी, और एक ही मुजरिम
- कालिया — यमुना के एक मोड़ पर पक्षी नहीं उड़ते थे, पशु पानी नहीं पीते थे — और एक दिन एक गेंद वहीं जा गिरी
- वन की आग — यह कांड बड़े भाई का है — पर आग किसी और ने निगली
- गोवर्धन — एक किशोर ने पूरे गाँव से कहा — इंद्र की पूजा बंद करो। फिर आसमान फट पड़ा
- रास — एक रात का नाच, जो सदियों में जाकर पूरा धर्मशास्त्र बन गया
- अक्रूर का रथ — न्योता भेजने वाला जानता था कि यह न्योता नहीं है
- मथुरा — शहर में घुसते ही तीन लोग मिले, और तीनों के साथ अलग बर्ताव हुआ
- कंस-वध — मामा ने भतीजों को कुश्ती देखने बुलाया — यह जानते हुए कि यही बुलावा उसकी मौत बनेगा
- संदीपनि — गुरु ने फ़ीस में वह माँगा जो कोई नहीं दे सकता था
- उद्धव का संदेश (भ्रमर गीत) — कृष्ण ने समझाने को एक दार्शनिक भेजा। गोपियों ने उसे ताने मारकर वापस भेज दिया
- जरासंध और रणछोड़ — वे मैदान छोड़कर भागे, और उसी भागने पर उनका एक नाम पड़ गया
- द्वारका — समुद्र ने ज़मीन दी थी, और एक दिन उसने वापस भी ले ली
- रुक्मिणी — सबने इसे हरण कहा, पर योजना उसी की थी जिसे ले जाया गया
- स्यमंतक मणि — एक रत्न ग़ायब हुआ, एक आदमी मरा, और उँगली उठी कृष्ण की तरफ़
- नरकासुर और सोलह हज़ार — एक असुर के महल में हज़ारों स्त्रियाँ बंद थीं। कृष्ण उन्हें आज़ाद करने ही नहीं, उनकी गरिमा लौटाने गए थे