शिव-महिमा
शिव-महिमा — १५ अध्याय, १५० सवाल। कई ग्रंथों से।
शिव की कथाएँ किसी एक ग्रंथ में पूरी नहीं मिलतीं, और जो ग्रंथ उन्हें कहते हैं वे आपस में हमेशा सहमत नहीं। शिव पुराण सबसे बड़ा स्रोत है; लिंग पुराण, स्कंद पुराण और कूर्म पुराण अपने-अपने हिस्से जोड़ते हैं। किरात की कथा महाभारत के वन पर्व में है, कैलास उठाने की कथा रामायण में। लिंगोद्भव जैसी कुछ कथाएँ खुले तौर पर शैव दावे हैं — वैष्णव ग्रंथ उन्हें अलग तरह से कहते हैं या नहीं कहते। यह गाथा हर अध्याय में बताती है कि उसका प्रसंग किस ग्रंथ से आता है, कहाँ ग्रंथ भिड़ते हैं, और कहाँ बात सिर्फ़ परंपरा की है। तमिल शैव परंपरा — तेवारम, पेरिय पुराणम — एक बड़ी अलग धारा है; जहाँ कोई कथा वहाँ से आती है, वह अलग से कहा गया है। हलाहल-नीलकंठ, जटा में गंगा और परशुराम को कुल्हाड़ी देने की कथाएँ इस साइट पर विष्णु-पुराण में पहले से हैं — यहाँ उन्हें दोहराया नहीं, सिर्फ़ उनकी तरफ़ इशारा किया गया है।
- ज्योति का खंभा — दो देवता एक खंभे के दोनों सिरे ढूँढ़ने निकले, और एक फूल से झूठ बुलवाया गया
- दक्ष का यज्ञ — एक पिता ने अपनी बेटी के पति को यज्ञ में जगह नहीं दी, और बेटी ने उसी सभा में योगबल से अपनी देह त्याग दी
- वीरभद्र — शिव ने अपनी जटा से एक लट नोची, और उससे जो उठा उसने एक पूरा यज्ञ उखाड़ दिया
- शक्ति पीठ — शिव ने सती की देह कंधे पर उठा ली और छोड़ने से इनकार कर दिया — इसलिए विष्णु ने उसे चुपचाप काटना शुरू किया
- तीसरा नेत्र — देवताओं ने प्रेम के देवता को भेजा कि शिव के मन में इच्छा जगाए — और शिव ने आँख खोलकर उसे राख कर दिया
- पार्वती की तपस्या — कामदेव नाकाम रहा, तो पर्वत की बेटी ने गहने उतारे और ख़ुद उस चोटी पर तप करने चली गई
- गणेश — पार्वती ने अपने उबटन से एक बेटा बनाया, और उसी बेटे ने शिव को घर के दरवाज़े पर रोक दिया
- कार्तिकेय — जिस पुत्र के लिए कामदेव जला था, उसे न अग्नि सँभाल पाई, न गंगा — छह कृत्तिकाओं ने पाला
- त्रिपुरांतक — तीन उड़ते नगर, जिन्हें सिर्फ़ एक बाण मार सकता था — वह भी तभी जब तीनों एक सीध में आएँ
- भस्मासुर — शिव ने बिना सोचे वह वरदान दे दिया, और अगले ही पल वह वरदान उन्हीं के सिर की ओर बढ़ा
- मार्कण्डेय — एक बालक की उम्र सोलह बरस लिखी थी — और सोलहवें बरस उसने शिवलिंग को कसकर पकड़ लिया
- नटराज — एक जंगल के अहंकारी ऋषियों ने शिव पर बाघ, साँप और एक बौना छोड़ा — शिव ने तीनों को पहनकर नाच शुरू कर दिया
- रावण और कैलास — रावण ने वह पर्वत उठाना चाहा जिस पर शिव बैठे थे — और शिव ने बिना उठे, एक पैर के अँगूठे से उसे दबा दिया
- किरात — अर्जुन ने एक सूअर पर बाण चलाया, और उसी पल एक जंगली शिकारी ने भी — फिर दोनों इस बात पर भिड़ गए कि शिकार किसका
- अर्धनारीश्वर — जिस शिव ने कामदेव को जलाया था, वही एक देह में आधे पार्वती हैं — दाईं ओर तपस्वी, बाईं ओर देवी