मणिमेखलै

मणिमेखलै — १२ अध्याय, १२० सवाल। तमिल पंचकाव्य — मणिमेखलै (परंपरा से सीतलै सात्तनार रचित)।

मणिमेखलै एक तमिल बौद्ध महाकाव्य है, पुराण नहीं — तमिल के पाँच महाकाव्यों में से एक, और सिलप्पदिकारम् की अगली कड़ी। यह कथा कौसल्या हार्ट के पूरे अंग्रेज़ी अनुवाद के सीधे पाठ से लिखी गई है। इसके कवि की परंपरागत पहचान कूलवाणिकन् सीतलै सात्तनार है; रचना-काल दूसरी से नौवीं सदी के बीच विवादित है, और छठी सदी के आसपास का मत सबसे ठोस माना जाता है। यह हिंदू नहीं, बौद्ध ग्रंथ है — जिसमें वैदिक, शैव, वैष्णव, आजीविक और जैन परंपराएँ भी बोलती हैं।

मणिमेखलै के बारे में सवाल

यहाँ मणिमेखलै कैसे बँटा है?

मणिमेखलै की इस कथा में १२ अध्याय हैं: यह कथा किसलिए, इंद्र-उत्सव के दिन, संगमरमर का मंडप, मणिपल्लवम्, अमृतसुरभि, आपुत्रन्, पहली भिक्षा, नानी की क़सम, काञ्चनन् की तलवार, राजा का न्याय, रानी की चालें, जिस नगर को सागर निगल गया, वंजि से काँची।

मणिमेखलै किस बारे में है?

एक कटोरा जो कभी ख़ाली नहीं होता — और एक गणिका की बेटी जिसने भूख को सबसे बड़ा रोग माना।

इस कथा का स्रोत क्या है?

तमिल पंचकाव्य — मणिमेखलै (परंपरा से सीतलै सात्तनार रचित)।

क्या मणिमेखलै पर प्रश्नोत्तरी है?

हाँ। हर अध्याय के अंत में १० सवाल हैं, और हर सही उत्तर के पीछे एक छोटी कथा है जो उसे समझाती है। कुल १२० सवाल।