मणिमेखलै
मणिमेखलै — १२ अध्याय, १२० सवाल। तमिल पंचकाव्य — मणिमेखलै (परंपरा से सीतलै सात्तनार रचित)।
मणिमेखलै एक तमिल बौद्ध महाकाव्य है, पुराण नहीं — तमिल के पाँच महाकाव्यों में से एक, और सिलप्पदिकारम् की अगली कड़ी। यह कथा कौसल्या हार्ट के पूरे अंग्रेज़ी अनुवाद के सीधे पाठ से लिखी गई है। इसके कवि की परंपरागत पहचान कूलवाणिकन् सीतलै सात्तनार है; रचना-काल दूसरी से नौवीं सदी के बीच विवादित है, और छठी सदी के आसपास का मत सबसे ठोस माना जाता है। यह हिंदू नहीं, बौद्ध ग्रंथ है — जिसमें वैदिक, शैव, वैष्णव, आजीविक और जैन परंपराएँ भी बोलती हैं।
- यह कथा किसलिए — एक कन्या जो नाचने से इनकार करती है, एक कटोरा जो कभी खाली नहीं होता — सिलप्पदिकारम् के बाद की कथा, एक अनाज-व्यापारी कवि की कलम से
- इंद्र-उत्सव के दिन — अठाईस दिन का उत्सव, जिसमें एक माँ बेटी को लेकर नहीं आई — और पूरा पुहार उसी की चर्चा करता रहा
- संगमरमर का मंडप — एक पागल हाथी, एक राजकुमार, एक बंद दरवाज़ा — और रात में समुद्र की एक देवी, जो मणिमेखलै को आकाश में उठा ले गई
- मणिपल्लवम् — एक अनजान द्वीप पर अकेली जागी लड़की, एक चमकता हुआ पीठ जो उसे उसके पिछले जन्म दिखा देता है — और पता चलता है कि वह राजकुमार को क्यों नहीं भूल पा रही
- अमृतसुरभि — साल में एक बार, बुद्ध-जयंती की पूर्णिमा पर, एक तालाब से एक कटोरा उठता है जो कभी ख़ाली नहीं होता — और उस दिन वह एक गणिका की बेटी के हाथों में आता है
- आपुत्रन् — गाय के दूध पर पला एक बच्चा जिसने यज्ञ की गाय चुराई, मदुरै के मंदिर में भिक्षा माँगकर भूखों को खिलाया — और इंद्र के सामने हँस पड़ा
- पहली भिक्षा — पुहार की सड़कों पर कटोरा लिए एक युवा भिक्षुणी, एक सती जिसे आग ने नहीं जलाया, और एक अप्सरा जिसकी भूख बारह वर्ष से नहीं मिटी थी
- नानी की क़सम — नानी राजकुमार के पास जाती है, राजकुमार मंदिर पहुँचता है, और मणिमेखलै एक भूखी अप्सरा का रूप धर लेती है — जिससे एक राजा अपना कारागार धर्मशाला बना देता है
- काञ्चनन् की तलवार — बारह साल बाद पत्नी को खोजता एक विद्याधर, एक राजकुमार जो आधी रात को मंदिर लौटता है — और एक ग़लतफ़हमी जो एक जान ले लेती है
- राजा का न्याय, रानी की चालें — एक राजा जो अपने बेटे को चिता पर रखने का आदेश देता है, एक माँ जो बदला लेना चाहती है, और एक कन्या जिसे ज़हर, झूठ और भूख कुछ नहीं छू पाते
- जिस नगर को सागर निगल गया — एक राजा जो अपने पिछले जन्म की हड्डियाँ ख़ुद खोदकर निकालता है, एक रुका हुआ उत्सव जिसकी क़ीमत पूरा नगर चुकाता है — और एक मूर्ति जो माँ जैसी बात करती है
- वंजि से काँची — पुरुष-साधु के वेश में दर्शनों की एक पूरी सभा, भूख से सूखी काँची में कटोरे की बारिश — और एक उपदेश जिस पर यह महाकाव्य समाप्त होता है
मणिमेखलै के बारे में सवाल
यहाँ मणिमेखलै कैसे बँटा है?
मणिमेखलै की इस कथा में १२ अध्याय हैं: यह कथा किसलिए, इंद्र-उत्सव के दिन, संगमरमर का मंडप, मणिपल्लवम्, अमृतसुरभि, आपुत्रन्, पहली भिक्षा, नानी की क़सम, काञ्चनन् की तलवार, राजा का न्याय, रानी की चालें, जिस नगर को सागर निगल गया, वंजि से काँची।
मणिमेखलै किस बारे में है?
एक कटोरा जो कभी ख़ाली नहीं होता — और एक गणिका की बेटी जिसने भूख को सबसे बड़ा रोग माना।
इस कथा का स्रोत क्या है?
तमिल पंचकाव्य — मणिमेखलै (परंपरा से सीतलै सात्तनार रचित)।
क्या मणिमेखलै पर प्रश्नोत्तरी है?
हाँ। हर अध्याय के अंत में १० सवाल हैं, और हर सही उत्तर के पीछे एक छोटी कथा है जो उसे समझाती है। कुल १२० सवाल।