कथासरित्सागर
कथासरित्सागर — १२ अध्याय, १२० सवाल। सोमदेव भट्ट — कथासरित्सागर (कश्मीर, ग्यारहवीं सदी), गुणाढ्य की खोई हुई बृहत्कथा का संक्षेप।
कथासरित्सागर ("कथाओं की धाराओं का सागर") कश्मीर के कवि सोमदेव का संस्कृत महाग्रंथ है, जो ग्यारहवीं सदी में रानी सूर्यवती के लिए लिखा गया माना जाता है। इसमें 18 लंबक, 124 तरंग और सैकड़ों कथाएँ हैं, जो एक के भीतर एक बुनी हुई हैं। सोमदेव के अनुसार यह गुणाढ्य की खोई हुई बृहत्कथा का संक्षेप है। यह पुराण नहीं, कथा-साहित्य है। यह कथा सी. एच. टॉनी के पूरे अंग्रेज़ी अनुवाद (एन. एम. पेंज़र द्वारा 1924–28 में पुनःप्रकाशित) के मूल पाठ को सीधे पढ़कर लिखी गई है, उसकी टिप्पणियों से नहीं।
- शिव ने जो कथा सुनाई — कैलास पर पार्वती ने एक ऐसी कहानी माँगी जो किसी ने न सुनी हो — और एक छिपकर सुनने वाले गण को उसकी क़ीमत शाप से चुकानी पड़ी
- वह राजा जिसे व्याकरण नहीं आता था — पानी में खेलते राजा पर रानी ने एक शब्द की ग़लती पकड़ ली — और उस एक अपमान से एक शर्त, एक वरदान और एक नया व्याकरण निकला
- सात लाख श्लोक और एक आग — पिशाचों की भाषा में सात लाख श्लोक, ख़ून की स्याही से लिखे — और जिस राजा के लिए लिखे, उसने उन्हें 'पिशाच की भाषा' कहकर लौटा दिया
- नकली हाथी और वीणा की शिष्या — वीणा बजाते हुए हाथी पकड़ने निकला वत्स का राजा ख़ुद पकड़ा गया — और जिस राजकुमारी को उसे संगीत सिखाना था, उसी के साथ उसे भागना पड़ा
- यौगंधरायण की चाल — एक मंत्री ने अपनी ही रानी को 'जला' दिया — राजा को सम्राट बनाने के लिए, और रानी की अपनी सहमति से
- जीमूतवाहन — जिस राजकुमार ने कल्पवृक्ष सबको दे दिया, फिर एक नाग की जगह गरुड़ के सामने ख़ुद को रख दिया
- सोने का नगर — एक राजकुमारी ने कहा, 'मैं उसी से ब्याह करूँगी जिसने सोने का नगर देखा हो' — और एक जुआरी ने पहले झूठ बोलकर, फिर सचमुच उसे खोजने का संकल्प किया
- बेताल का पहला सवाल — श्मशान के पेड़ पर लटकी लाश, कंधे पर बेताल — और हर कहानी के अंत में एक सवाल, जिसका जवाब देते ही वह वापस पेड़ पर लौट जाता है
- बेताल का वरदान — आख़िरी रात में बेताल ने राजा को बताया कि संन्यासी असल में उसी की बलि देना चाहता है — और राजा ने संन्यासी की चाल उसी पर लौटा दी
- कौए, उल्लू और नीति — बूढ़े कौए ने अपने ही पंख नुचवाए, दुश्मन उल्लुओं के बीच जा बैठा — और उन्हें उन्हीं की गुफा में बंद करवा दिया
- मृगांकदत्त की खोज — सपने में मिली राजकुमारी की खोज में निकला राजकुमार, साँप के शाप से बिछड़े दस मंत्री — और उज्जयिनी के मंदिर में एक रात
- सम्राट और कथा का अंत — गुफ़ा में सात रत्न, कैलास के आर-पार एक सम्राट — और जहाँ से कथा चली थी, वहीं लौटकर कश्मीर की रानी तक
कथासरित्सागर के बारे में सवाल
यहाँ कथासरित्सागर कैसे बँटा है?
कथासरित्सागर की इस कथा में १२ अध्याय हैं: शिव ने जो कथा सुनाई, वह राजा जिसे व्याकरण नहीं आता था, सात लाख श्लोक और एक आग, नकली हाथी और वीणा की शिष्या, यौगंधरायण की चाल, जीमूतवाहन, सोने का नगर, बेताल का पहला सवाल, बेताल का वरदान, कौए, उल्लू और नीति, मृगांकदत्त की खोज, सम्राट और कथा का अंत।
कथासरित्सागर किस बारे में है?
एक कथा जो शिव ने पार्वती को सुनाई, शाप से होकर धरती पर उतरी — और फिर सैकड़ों कथाओं का सागर बन गई।
इस कथा का स्रोत क्या है?
सोमदेव भट्ट — कथासरित्सागर (कश्मीर, ग्यारहवीं सदी), गुणाढ्य की खोई हुई बृहत्कथा का संक्षेप।
क्या कथासरित्सागर पर प्रश्नोत्तरी है?
हाँ। हर अध्याय के अंत में १० सवाल हैं, और हर सही उत्तर के पीछे एक छोटी कथा है जो उसे समझाती है। कुल १२० सवाल।